
भारतीय शेयर बाज़ार ने अगस्त के अंतिम कारोबारी सप्ताह में लगातार तीसरी साप्ताहिक गिरावट दर्ज की। सेंसेक्स और निफ्टी में यह लगातार गिरावट करीब पांच महीने की सबसे लंबी साप्ताहिक गिरावट बनी। हालांकि सप्ताह के अंत में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) शेयरों में खरीदारी और वैश्विक संकेतों में सुधार से बाजार को कुछ राहत मिली।
यह गिरावट किसी एक कारण का नतीजा नहीं है। विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली, ऊंची कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिका की बॉन्ड यील्ड, भू-राजनीतिक तनाव और कंपनियों के मूल्यांकन को लेकर बढ़ती सावधानी ने बाजार पर दबाव बनाया है। 29 अगस्त तक समाप्त सप्ताह में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से करीब 20,260 करोड़ रुपये की निकासी की।
| गिरावट की वजह | जो सेक्टर टिके | निवेशक रणनीति |
|---|
| FII बिकवाली | IT में चुनिंदा रिकवरी | घबराकर बिक्री नहीं |
| कच्चा तेल व वैश्विक जोखिम | मिडकैप-स्मॉलकैप में मजबूती | चरणबद्ध निवेश |
| अमेरिकी बॉन्ड यील्ड | घरेलू संस्थागत खरीदारी | मजबूत कंपनियों पर फोकस |
बाजार की मौजूदा कमजोरी को समझने के लिए केवल सेंसेक्स या निफ्टी का स्तर देखना पर्याप्त नहीं है। वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती ने उभरते बाजारों के प्रति निवेशकों के रुख को प्रभावित किया है।
इसके साथ कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि महंगा तेल आयात बिल, मुद्रास्फीति और कंपनियों की लागत पर दबाव डाल सकता है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने भी निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है।
हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने विदेशी बिकवाली के प्रभाव को कुछ हद तक सीमित किया है। यही कारण है कि बाजार में गिरावट के बावजूद तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं हुई है।
IT शेयर अगस्त में दबाव में रहे हैं। कमजोर डॉलर, ऊंची वैश्विक बॉन्ड यील्ड, भू-राजनीतिक जोखिम और अमेरिकी बाजार से जुड़ी चिंताओं ने इस क्षेत्र पर दबाव डाला। 17 अगस्त को निफ्टी IT सूचकांक करीब 1.83 प्रतिशत तक नीचे आया था।
लेकिन सप्ताह के अंत में तस्वीर कुछ बदली। 28 अगस्त को IT शेयरों में मजबूती के कारण सेंसेक्स और निफ्टी में भी सुधार आया। बाजार में पहले दबाव झेल चुके IT शेयरों में चयनात्मक खरीदारी दिखाई दी।
इसका मतलब यह नहीं कि IT क्षेत्र का जोखिम खत्म हो गया है। अमेरिकी ग्राहकों की मांग, डॉलर की चाल, AI से जुड़ा बदलाव और कंपनियों की आय आगे भी इस क्षेत्र के लिए निर्णायक रहेंगे।
बड़ी कंपनियों के मुकाबले मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में कुछ मजबूती दिखाई दी। 26 अगस्त के कारोबार में जहां निफ्टी 50 और सेंसेक्स कमजोर रहे, वहीं मिडकैप लगभग स्थिर और स्मॉलकैप सूचकांक करीब 0.8 प्रतिशत ऊपर रहा।
इसका एक कारण घरेलू निवेशकों की सक्रियता और कुछ कंपनियों के बेहतर कारोबारी प्रदर्शन हो सकते हैं। लेकिन यहां निवेशकों को सावधान रहना जरूरी है। किसी पूरे सूचकांक के टिके रहने का अर्थ यह नहीं कि हर मिडकैप या स्मॉलकैप शेयर मजबूत है।
मौजूदा दौर में छोटे निवेशकों के लिए सबसे बड़ा जोखिम घबराहट में बेचने या गिरते बाजार में बिना जांचे खरीदारी करने का है। बाजार में गिरावट को अवसर तभी माना जा सकता है जब कंपनी के कारोबार, मुनाफे, कर्ज, नकदी प्रवाह और मूल्यांकन की स्थिति मजबूत हो।
निवेशकों को एक साथ पूरी रकम लगाने के बजाय चरणबद्ध निवेश पर विचार करना चाहिए। लंबी अवधि के लक्ष्य वाले निवेशक मजबूत कंपनियों में व्यवस्थित निवेश जारी रख सकते हैं, जबकि निकट अवधि में पैसे की जरूरत वाले निवेशकों को इक्विटी में अत्यधिक जोखिम लेने से बचना चाहिए।
म्यूचुअल फंड या शेयरों में निवेश करने वालों के लिए भी बाजार की दिशा से ज्यादा asset allocation महत्वपूर्ण है। आपातकालीन जरूरत का पैसा इक्विटी में लगाने के बजाय अलग रखना और पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखना बेहतर रणनीति हो सकती है।
अभी केवल तीन साप्ताहिक गिरावट के आधार पर लंबी अवधि के बाजार रुझान को नकारात्मक घोषित करना जल्दबाजी होगी। विदेशी बिकवाली और वैश्विक जोखिम बाजार को अस्थिर रख सकते हैं, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेश, आर्थिक वृद्धि और कंपनियों की आय बाजार को सहारा देने वाले कारक हैं।
इसलिए मौजूदा दौर को घबराहट का नहीं, चयन और अनुशासन का बाजार कहना अधिक उचित होगा। छोटे निवेशकों के लिए सवाल यह नहीं होना चाहिए कि बाजार कब नीचे जाएगा, बल्कि यह होना चाहिए कि उनके चुने हुए निवेश की बुनियादी स्थिति कितनी मजबूत है।