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फ्रांस में छात्र आंदोलन: सड़कों पर लोग, आंसू गैस और हजारों गिरफ्तारियां, मैक्रों कार्यकाल के आखिरी महीनों में क्यों बढ़ा विवाद?

फ्रांस में स्कूलों की बदहाली और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। पुलिस की सख्ती, हजारों गिरफ्तारियों और किशोरों के गंभीर रूप से घायल होने के बाद विवाद बढ़ गया है।
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Oct 16, 2026
student protest in france
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

फ्रांस में खस्ताहाल स्कूलों और शिक्षा पर ज्यादा खर्च की मांग को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब राष्ट्रीय संकट बन चुका है। मई में पद छोड़ने जा रहे राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के कार्यकाल के आखिरी महीनों में यह आंदोलन सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। सख्त पुलिस कार्रवाई, हजारों गिरफ्तारियों और किशोरों के गंभीर रूप से घायल होने से विवाद और गहरा गया है।

कैसे शुरू हुआ आंदोलन?

सितंबर के आखिर में 15 से 17 साल के छात्रों ने सैकड़ों हाई स्कूलों (लीसे) के गेट रोकने शुरू किए। उनकी शिकायतें थीं जर्जर इमारतें, शिक्षकों की कमी और भीड़भाड़ वाली कक्षाएं। देखते-देखते आंदोलन पेरिस के गरीब उपनगरों से निकलकर दूसरे शहरों और कस्बों तक फैल गया। 6 अक्टूबर को देशभर में करीब ढाई लाख लोग सड़कों पर उतरे। यह आंकड़ा गृह मंत्रालय का है।

कई जगह प्रदर्शन हिंसक हुए, स्कूलों में आगजनी और तोड़फोड़ हुई। शिक्षा मंत्री एडुआर जेफ्रे के अनुसार एक दिन में 24 स्कूल जला दिए गए या उनमें तोड़फोड़ हुई। हालात बिगड़ने पर प्रशासन को स्कूल बंद करने पड़े। शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक 6 अक्टूबर को 891 स्कूलों में कक्षाएं पूरी या आंशिक रूप से ठप रहीं।

गिरफ्तारियां और घायलों का आंकड़ा

अक्टूबर के पहले हफ्ते तक 6,500 से ज्यादा लोग गिरफ्तार किए जा चुके थे, जिनमें ज्यादातर नाबालिग हैं। सिर्फ 6 अक्टूबर को 488 गिरफ्तारियां हुईं और सुरक्षाबलों के 43 जवान घायल हुए। अकेले 1 अक्टूबर को गृह मंत्रालय ने 1,949 गिरफ्तारियां बताई थीं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 900 से ज्यादा पुलिसकर्मी और करीब 150 शिक्षक व स्कूल कर्मचारी घायल हुए हैं। सरकार का कहना है कि कुछ लोग भीड़ की आड़ में पुलिस पर पत्थर और पटाखे फेंक रहे हैं और आगजनी कर रहे हैं।

किशोरों की गंभीर चोटें

सबसे ज्यादा आक्रोश किशोरों के घायल होने से है। 5 अक्टूबर को उत्तरी शहर लेंस में 15 साल के एक छात्र का हाथ पुलिस के स्टन ग्रेनेड से उड़ गया। पुलिस यूनियन के एक सूत्र के मुताबिक किशोर ने जमीन से ग्रेनेड उठाया था और वह उसके हाथ में फट गया। छात्र की मां ने इसे नकारा और कहा कि उनका बेटा ग्रेनेड उठाने की कोशिश नहीं कर रहा था।

इससे पहले पेरिस के उत्तर-पश्चिमी इलाके में 14 साल का एक छात्र आंसू गैस ग्रेनेड लगने से कई दांत खो बैठा। इसके बाद गृह मंत्री लोरां नुनेज ने छात्र प्रदर्शनों में स्टन ग्रेनेड का इस्तेमाल रोक दिया। एक अन्य मामले में 16 साल के किशोर की आंख को आंशिक नुकसान पहुंचाने के संदिग्ध पुलिसकर्मी पर गंभीर हिंसा का आरोप लगा है। नुनेज ने बताया कि पुलिस के खिलाफ 36 जांच चल रही हैं।

पुलिस की तैयारी पर सवाल

नुनेज के मुताबिक अब तक कम से कम 18,000 बार भीड़ नियंत्रण हथियार इस्तेमाल हुए, ज्यादातर धुआं और आंसू गैस, कुछ बार प्रक्षेपास्त्र और ग्रेनेड। उन्होंने कार्रवाई को "आनुपातिक" बताया और कहा- हम गर्दन से ऊपर निशाना लगाने से बचते हैं। वहीं, पुलिस व्यवस्था के जानकार जीन-मैरी गोडार्ड कहते हैं कि कम प्रशिक्षित और कमजोर साजोसामान वाले पुलिसकर्मियों को हिंसक प्रदर्शनों में भेजा जा रहा है।

पेरिस के उत्तरी उपनगरों में पुलिस अधिकारी और यूनियन प्रतिनिधि वालिद हरार के मुताबिक कुछ जवानों की वर्दी आग से नहीं बचाती, हेलमेट घिसे हुए और ढालें अनुपयुक्त हैं। वालिद हरार का कहना है कि हमें जवानों की जरूरत थी, इसलिए भेज दिया। पुलिस यूनियन अलायंस ने राज्य के खिलाफ कानूनी शिकायत की घोषणा की है, उसका आरोप है कि अस्पष्ट और विरोधाभासी निर्देशों से जवानों को खतरे में डाला गया।

सरकार का रुख

प्रधानमंत्री सेबास्तियन लेकोर्नू ने हिंसा को बर्दाश्त न करने की बात कही, लेकिन पुलिस दमन के आदेश के आरोप खारिज किए। उन्होंने माना कि युवाओं का गुस्सा "बेवजह नहीं है" और अक्टूबर के अंत तक योजना लाने का वादा किया। छात्र संगठन सीधे उनसे मिलकर अपने प्रस्ताव रखना चाहते हैं। सरकार ने सत्ता-विपक्ष की खींचतान में हार्ड-लेफ्ट पार्टी एलएफआई पर तनाव भड़काने का आरोप लगाया है।

रिकॉर्ड गरीबी और बढ़ते सरकारी कर्ज के बीच छात्रों की मांगों को जनसमर्थन मिल रहा है। यह आंदोलन मैक्रों के दशक भर के कार्यकाल में हुए कई विरोध-आंदोलनों की कड़ी में ताजा है। विश्लेषकों के मुताबिक पुलिस की प्रतिक्रिया इस पर भी निर्भर करती है कि सरकार आंदोलन को राजनीतिक रूप से कैसे देखती है। आने वाले दिनों में बड़े प्रदर्शनों की तैयारी है, इसलिए सरकार के सामने सुधार और कानून-व्यवस्था में संतुलन साधने की कठिन परीक्षा है।

Updated on:
16 Oct 2026 08:23 pm
Published on:
16 Oct 2026 08:23 pm