
भारत में गन्ना सिर्फ एक फसल नहीं, बल्कि चीनी मिलों, किसानों, गुड़, एथेनॉल और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ी पूरी आर्थिक श्रृंखला है। देश में गन्ने की खेती मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, तमिलनाडु, बिहार और कुछ अन्य राज्यों में होती है।
लेकिन सवाल यह है कि गन्ने का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य कौन है? सबसे ज्यादा जमीन पर गन्ना कहां उगाया जाता है और प्रति हेक्टेयर उत्पादन में कौन आगे है?
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के 2024-25 के अंतिम आंकड़ों के मुताबिक, भारत में कुल 5.45 मिलियन हेक्टेयर यानी करीब 54.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती हुई और उत्पादन 454.61 मिलियन टन रहा। इसमें उत्तर प्रदेश सबसे आगे रहा।
2024-25 में उत्तर प्रदेश ने करीब 220.80 मिलियन टन गन्ने का उत्पादन किया। यह देश के कुल उत्पादन का लगभग 48.57% है। यानी भारत में पैदा होने वाले करीब हर दो टन गन्ने में लगभग एक टन उत्तर प्रदेश से आता है। इसके बाद महाराष्ट्र का नंबर है, जहां 109.97 मिलियन टन गन्ने का उत्पादन हुआ। कर्नाटक करीब 48.06 मिलियन टन के साथ तीसरे स्थान पर रहा।
| राज्य | गन्ने का क्षेत्रफल | उत्पादन | राष्ट्रीय उत्पादन में हिस्सा |
|---|---|---|---|
| उत्तर प्रदेश | 27.2 लाख हेक्टेयर | 220.80 मिलियन टन | 48.57% |
| महाराष्ट्र | 11.7 लाख हेक्टेयर | 109.97 मिलियन टन | 24.19% |
| कर्नाटक | 5.4 लाख हेक्टेयर | 48.06 मिलियन टन | 10.57% |
| गुजरात | 1.9 लाख हेक्टेयर | 13.71 मिलियन टन | 3.02% |
| तमिलनाडु | 1.3 लाख हेक्टेयर | 13.35 मिलियन टन | 2.94% |
| बिहार | 1.9 लाख हेक्टेयर | 12.15 मिलियन टन | 2.67% |
| उत्तराखंड | 0.9 लाख हेक्टेयर | 7.65 मिलियन टन | 1.68% |
| पंजाब | 0.9 लाख हेक्टेयर | 7.28 मिलियन टन | 1.60% |
| मध्य प्रदेश | 1.1 लाख हेक्टेयर | 6.11 मिलियन टन | 1.34% |
| हरियाणा | 0.7 लाख हेक्टेयर | 5.83 मिलियन टन | 1.28% |
| भारत | 54.5 लाख हेक्टेयर | 454.61 मिलियन टन | 100% |
यहां भी उत्तर प्रदेश नंबर-1 है। 2024-25 में यूपी में करीब 27.2 लाख हेक्टेयर जमीन पर गन्ना था। देश के कुल गन्ना क्षेत्र का लगभग 49.92% हिस्सा अकेले उत्तर प्रदेश में था। महाराष्ट्र करीब 11.7 लाख हेक्टेयर के साथ दूसरे और कर्नाटक करीब 5.4 लाख हेक्टेयर के साथ तीसरे स्थान पर रहा। यानी खेती के क्षेत्रफल और कुल उत्पादन-दोनों में उत्तर प्रदेश सबसे आगे है। लेकिन, प्रति हेक्टेयर उत्पादन में कहानी बदल जाती है
कुल उत्पादन में यूपी आगे है, लेकिन प्रति हेक्टेयर उत्पादकता में कुछ दूसरे राज्य आगे निकल जाते हैं। 2024-25 में भारत की औसत गन्ना उत्पादकता करीब 83.4 टन प्रति हेक्टेयर रही। प्रमुख राज्यों में तमिलनाडु की उत्पादकता करीब 102 टन प्रति हेक्टेयर, महाराष्ट्र की करीब 94.2 टन, कर्नाटक की 89 टन और उत्तराखंड की करीब 84.7 टन प्रति हेक्टेयर रही। उत्तर प्रदेश में यह करीब 81.2 टन प्रति हेक्टेयर थी।
इससे एक महत्वपूर्ण बात सामने आती है…सबसे ज्यादा गन्ना पैदा करने वाला राज्य जरूरी नहीं कि प्रति हेक्टेयर सबसे ज्यादा गन्ना पैदा करे। यूपी की बड़ी बढ़त का एक बड़ा कारण उसका बहुत विशाल गन्ना क्षेत्र है।
उत्तर प्रदेश का बड़ा हिस्सा उपोष्णकटिबंधीय गन्ना क्षेत्र में आता है। यहां गंगा-यमुना के मैदानों की उपजाऊ मिट्टी, सिंचाई की सुविधा और गन्ने के लिए लंबे समय से विकसित कृषि व्यवस्था ने इसे देश का सबसे बड़ा गन्ना क्षेत्र बनाया है।
इसके अलावा पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश में गन्ने की खेती का संबंध सीधे चीनी मिलों और किसानों से है। बड़ी संख्या में किसान गन्ने को नकदी फसल के तौर पर देखते हैं।
ICAR के मुताबिक देश के गन्ने का 55% से अधिक क्षेत्र उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्र में आता है, हालांकि वहां गन्ने की उपज और चीनी रिकवरी उष्णकटिबंधीय भारत की तुलना में अपेक्षाकृत कम रहती है।
महाराष्ट्र और कर्नाटक भारत के प्रमुख उष्णकटिबंधीय गन्ना क्षेत्र हैं। महाराष्ट्र में कुल गन्ना क्षेत्र उत्तर प्रदेश से काफी कम है, लेकिन प्रति हेक्टेयर उत्पादन अधिक है। 2024-25 में महाराष्ट्र की उत्पादकता करीब 94.2 टन प्रति हेक्टेयर रही। कर्नाटक में यह करीब 89 टन प्रति हेक्टेयर थी।
इन राज्यों में गन्ने का संबंध चीनी मिलों और सहकारी चीनी उद्योग से भी गहराई से जुड़ा है। इसलिए यहां गन्ने की खेती सिर्फ खेत तक सीमित नहीं रहती, बल्कि किसानों से लेकर मिल और फिर चीनी व एथेनॉल उद्योग तक पूरी आर्थिक श्रृंखला बनाती है।
यानी गन्ना एक ऐसी फसल है जिसका इस्तेमाल खाद्य उद्योग से लेकर ऊर्जा क्षेत्र तक होता है। इसीलिए सरकार की चीनी और एथेनॉल नीतियों का सीधा असर गन्ना किसानों पर भी पड़ता है।
गन्ने की सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ उत्पादन नहीं, पानी है। ICAR के एक आकलन के अनुसार गन्ना पानी की अधिक जरूरत वाली फसल है। उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में इसकी पानी की जरूरत करीब 2,500 मिमी और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में करीब 1,500 मिमी तक बताई गई है। संस्थान ने लगातार गन्ने की खेती से जल संसाधनों पर दबाव की चिंता भी जताई है। यही वजह है कि गन्ने के बड़े उत्पादक राज्यों में सिंचाई दक्षता और भूजल प्रबंधन महत्वपूर्ण मुद्दा बन जाते हैं।
ICAR ने गन्ने में पानी बचाने के लिए ड्रिप सिंचाई, सिंचाई का सही समय तय करने और नमी संरक्षण जैसी तकनीकों पर जोर दिया है।
अगर कुल उत्पादन देखें तो तस्वीर बिल्कुल साफ है-उत्तर प्रदेश → महाराष्ट्र → कर्नाटक। ये तीन राज्य मिलकर 2024-25 में देश के कुल गन्ना उत्पादन का लगभग 83% हिस्सा देते हैं। सिर्फ उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र मिलकर करीब 72.8% उत्पादन करते हैं।लेकिन उत्पादकता की तस्वीर अलग है। तमिलनाडु और महाराष्ट्र जैसे राज्य प्रति हेक्टेयर उत्पादन में यूपी से आगे हैं।
इसलिए भारत में गन्ने की कहानी सिर्फ यह नहीं है कि “सबसे ज्यादा गन्ना कहां पैदा होता है?” असल सवाल यह भी है कि कितनी जमीन और कितना पानी लगाकर कितना गन्ना पैदा हो रहा है।
और आने वाले वर्षों में गन्ने की खेती की सबसे बड़ी चुनौती यही होगी-चीनी और एथेनॉल की बढ़ती जरूरत को पूरा करते हुए पानी और जमीन पर दबाव को कैसे कम किया जाए।