
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने पाकिस्तान से आग्रह किया है कि वह अहमदिया समुदाय के खिलाफ भेदभाव, उत्पीड़न और हिंसा को समाप्त करने के लिए तुरंत कदम उठाए। UN ने पाकिस्तान सरकार से अहमदिया समुदाय के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा को मजबूत करने की मांग की है।
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने चिंता व्यक्त की है कि अहमदिया समुदाय के खिलाफ लगातार हमले, गिरफ्तारियां, उत्पीड़न, नफरत भरी बातें और कानूनी प्रतिबंध जारी हैं। मानवाधिकार विशेषज्ञों ने पाकिस्तान के अधिकारियों से अपील की है कि वे इस समुदाय के खिलाफ हिंसा के अपराधियों के खिलाफ जवाबदेही सुनिश्चित करें।
संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने कहा है कि पाकिस्तान में अहमदियों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार नहीं दिया जा रहा है। उन्हें अपने विश्वास के कारण भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति न केवल पाकिस्तान के भीतर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता का विषय बन गई है।
अहमदिया समुदाय के खिलाफ हो रहे हमलों की बढ़ती घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों का ध्यान आकर्षित किया है। विशेषज्ञों ने पाकिस्तान से आग्रह किया है कि वह अपने कानूनों में सुधार करे ताकि सभी धार्मिक समुदायों को समान अधिकार मिल सकें।
पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय को अल्पसंख्यक माना जाता है। उन्हें कई कानूनी और सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। सरकार ने इस समुदाय के खिलाफ भेदभावपूर्ण कानून बनाए हैं, जो उनके अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने पाकिस्तान सरकार से अपील की है कि वह इस समस्या का समाधान निकाले और सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करे।
धार्मिक त्योहारों पर रोक: अहमदिया समुदाय के लोगों को बकरा ईद (ईद-उल-अजहा) और ईद-उल-फितर जैसे मुस्लिम त्योहारों को मनाने से जबरन रोका जाता है। उन्हें सार्वजनिक स्थलों पर नमाज पढ़ने या कुर्बानी देने की अनुमति नहीं होती और घरों के भीतर भी ऐसा करने पर पुलिसिया कार्रवाई का सामना करना पड़ता है।
इबादतगाहों और कब्रों की बेअदबी: चरमपंथी समूहों और यहां तक कि स्थानीय पुलिस द्वारा अहमदिया इबादतगाहों की मीनारें ढहाने, उनके धार्मिक स्थलों पर हमले करने और उनकी कब्रों से शवों को निकालने या कब्रों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं आम हैं।
ईशनिंदा कानूनों का दुरुपयोग: पाकिस्तान के सख्त ईशनिंदा कानूनों (PPC 295 और 298) का इस्तेमाल अहमदिया समुदाय को निशाना बनाने के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता है। अपने धार्मिक साहित्य या किताबों को पास में रखने मात्र से भी उन्हें ईशनिंदा के झूठे आरोपों में गिरफ्तार कर लिया जाता है।