
अमेरिका में हुए मध्यावधि चुनाव में 'रिपब्लिकन पार्टी' को झटका लगा है। भले ही इन चुनावों से डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति पद पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन चुनावी नतीजों को ट्रंप के अब तक के कार्यकाल के रुझान के तौर पर देखा जा रहा है।
साल 2024 में हुए राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के डोनाल्ड ट्रंप को जबरदस्त जीत मिली थी। साथ ही संसद (कांग्रेस) की जिन सीटों पर चुनाव हुए थे, उनमें भी रिपब्लिकन पार्टी बढ़त हासिल करने में कामयाब हुई थी। हालांकि, अब राष्ट्रपति चुनाव के ठीक 2 साल बाद होने वाले मध्यावधि चुनाव को न सिर्फ ट्रंप प्रशासन की ओर से उठाए गए कदमों, बल्कि उन्हें लागू करने वाले रिपब्लिकन सांसदों को लेकर भी जनता की राय के तौर पर देखा जा रहा है।
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव (मिडटर्म इलेक्शन) के इतिहास को देखा जाए तो सामने आता है कि देश में 1946 से लेकर अब तक 20 मध्यावधि चुनाव हो चुके हैं। हालांकि, सिर्फ 2 बार ही सत्तासीन राष्ट्रपति की पार्टी संसद में अपनी सीटें बढ़ाने में कामयाब रही। यानी 20 में से 18 मध्यावधि चुनावों में राष्ट्रपति के कामों के आधार पर जनता ने उनके सियासी दल को कोई फायदा नहीं दिया।
अमेरिका में बीते 4 मध्यावधि चुनाव 2010, 2014, 2018 और 2022 में हुए थे। 2010 और 2014 में राष्ट्रपति बराक ओबामा के नेतृत्व में डेमोक्रेटिक पार्टी ने मध्यावधि चुनाव लड़े थे। वहीं 2018 में डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में रिपब्लिकन पार्टी ने जनता का सामना किया। इसके अलावा 2022 में जो बाइडन के प्रतिनिधित्व में डेमोक्रेटिक पार्टी ने मध्यावधि चुनाव लड़े।
प्रतिनिधि सभा: सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक पार्टी को भारी हार का सामना करना पड़ा। इस दौरान डेमोक्रेट्स ने 63 सीटें गंवाईं और सदन का नियंत्रण रिपब्लिकन पार्टी के पास चला गया। इस करारी हार को तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने करारी हार (shellacking) कहा था।
सीनेट: डेमोक्रेट्स ने सीनेट में 6 सीटें गंवाईं, हालांकि कम बहुमत के साथ वे सीनेट पर अपना नियंत्रण बचाने में सफल रहे।
प्रतिनिधि सभा: डेमोक्रेटिक पार्टी को 13 सीटों का नुकसान हुआ और प्रतिनिधि सभा पर रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण बरकरार रहा।
सीनेट: डेमोक्रेट्स को नौ सीटों का नुकसान उठाना पड़ा। इसके साथ ही रिपब्लिकन पार्टी ने सीनेट का बहुमत हासिल कर लिया।
प्रतिनिधि सभा: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी ने सदन में 41 सीटें गंवाईं। इसके बाद रिपब्लिकन पार्टी ने प्रतिनिधि सभा का नियंत्रण खो दिया और डेमोक्रेटिक पार्टी ने बहुमत हासिल किया।
सीनेट: इसके विपरीत, रिपब्लिकन पार्टी ने सीनेट में अपनी स्थिति मजबूत की और 2 सीटें जोड़कर सीनेट पर अपना नियंत्रण बनाए रखा।
प्रतिनिधि सभा: डेमोक्रेट्स को नौ सीटों का नुकसान हुआ और प्रतिनिधि सभा पर मामूली अंतर से रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण स्थापित हो गया।
सीनेट: बड़ी लाल लहर की भविष्यवाणियों के बावजूद, डेमोक्रेट्स ने सीनेट में अपना नियंत्रण बरकरार रखा और एक सीट का फायदा हासिल किया।
अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में राष्ट्रपति की लोकप्रियता और तत्कालीन राजनीतिक व आर्थिक माहौल का चुनाव नतीजों पर गहरा असर पड़ता है। 2010, 2014, 2018 और 2022 में लगातार इसके संकेत सामने आए।
अप्रूवल रेटिंग: 2008 के राष्ट्रपति चुनाव से लेकर अगस्त से अक्टूबर 2010 के दौरान बराक ओबामा की अप्रूवल रेटिंग 44% से 45% के बीच स्थिर थी।
राजनीतिक संदर्भ: ओबामा के पहले कार्यकाल का यह चुनाव 2008 की भारी आर्थिक मंदी के साये में लड़ा गया था, जिससे जनता में गहरा असंतोष था। इसके अलावा, 2010 में पारित अफोर्डेबल केयर एक्ट- ओबामाकेयर को लेकर मतदाताओं में आशंकाएं और भ्रम की स्थिति बनी हुई थी, जिसका रिपब्लिकन पार्टी ने जमकर राजनीतिक लाभ उठाया।
नतीजा: इस कम अप्रूवल रेटिंग और जनआक्रोश के चलते डेमोक्रेट्स को प्रतिनिधि सभा में भारी झटका लगा और पार्टी ने 63 सीटें गंवाईं।
अप्रूवल रेटिंग: अगस्त से अक्तूबर 2014 के दौरान ओबामा की अप्रूवल रेटिंग 41% से 43% के स्तर पर आ गई थी।
राजनीतिक संदर्भ: यह ओबामा का दूसरा कार्यकाल था। ऐतिहासिक रूप से राष्ट्रपतियों के दूसरे कार्यकाल के मध्यावधि चुनावों में उनकी लोकप्रियता और राजनीतिक ऊर्जा में गिरावट देखने को मिलती है। इस चुनाव में दक्षिण और मध्य-पश्चिम के राज्यों में रिपब्लिकन पार्टी का प्रभाव और मजबूत हुआ।
नतीजा: कमजोर रेटिंग और दूसरे कार्यकाल की थकान के कारण डेमोक्रेट्स ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट सीटें गंवाईं। सीनेट का तो बहुमत भी रिपब्लिकन पार्टी के पास चला गया।
अप्रूवल रेटिंग: अगस्त से अक्टूबर 2018 के दौरान डोनाल्ड ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग काफी निचले- 39% से 44% के बीच रही।
राजनीतिक संदर्भ: ट्रंप प्रशासन के शुरुआती दो वर्षों की नीतियों और कार्यशैली को लेकर मतदाताओं में ध्रुवीकरण और विरोध देखने को मिला। हालांकि, यह विरोध पूरे देश और दोनों सदनों में एक समान नहीं था; रिपब्लिकन पार्टी को सीनेट में केवल नौ सीटें बचानी थीं, जिसका उन्हें रणनीतिक और भौगोलिक फायदा मिला।
नतीजा: कम अप्रूवल रेटिंग के चलते प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन पार्टी को 41 सीटों का नुकसान हुआ और बहुमत छिन गया, लेकिन अनुकूल चुनावी नक्शे के दम पर उन्होंने सीनेट में सीटें जोड़कर अपना नियंत्रण बरकरार रखा।
अप्रूवल रेटिंग: चुनाव के समय अगस्त में बाइडन की अप्रूवल रेटिंग 44% थी, जो अक्टूबर के अंत तक गिरकर 40% पर आ गई थी।
राजनीतिक संदर्भ: परंपरागत रूप से 40% अप्रूवल रेटिंग वाले राष्ट्रपति के दल को मध्यावधि चुनावों में भारी हार का सामना करना पड़ता है, और इसी कारण कई विश्लेषक एक बड़ी लाल लहर की उम्मीद कर रहे थे। इसके विपरीत, ऐतिहासिक रुझानों को धता बताते हुए बाइडन के डेमोक्रेट्स ने अप्रत्याशित मजबूती दिखाई।
नतीजा: भारी नुकसान की आशंकाओं के बावजूद, डेमोक्रेट्स ने प्रतिनिधि सभा में केवल 9 सीटें गंवाईं (जिससे सदन पर रिपब्लिकन का मामूली नियंत्रण हुआ) और सीनेट में 1 सीट का लाभ हासिल कर अपना नियंत्रण सफलतापूर्वक बचा लिया।