
बराक ओबामा और डोनाल्ड ट्रंप (फोटो सोर्स- Janani)
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव- 2026 में रिपब्लिकन पार्टी को झटका लगा है। कई अहम सीटों पर रिपब्लिकन पार्टी की हार हुई है। अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजे आने के बाद पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने तंज कसा है। बराक ओबामा ने कहा- ये जनता, लोगों को बांटने की कोशिश करने वाली सियासत को नकार रही है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर बराक ओबामा ने लिखा- अमेरिकी जनता ने एक स्पष्ट संदेश दे दिया है। वो ये है कि जनता ऐसी राजनीति चाहते हैं, जो लोगों को बांटने के बजाय उन्हें एकजुट करे और ऐसे नेता चाहते हैं जो उनके सामने आने वाली चुनौतियों का ठोस समाधान प्रस्तुत कर सके।
ओबामा ने जीत का कारण साझा मूल्यों और एकजुटता से आगे बढ़ने की सोच को माना। उन्होंने आगे लिखा कि ये नतीजे इसलिए संभव हो पाए, क्योंकि देश के हर हिस्से से बेहतरीन उम्मीदवार आगे आए। यहां तक कि उन इलाकों से भी, जहां जीत की उम्मीद बहुत कम मानी जाती थी। वे अलग-अलग पृष्ठभूमि से आए थे और उनके राजनीतिक विचार भी अलग-अलग थे, लेकिन वे कुछ साझा मूल्यों, जनसेवा में विश्वास और अपने जिलों व राज्यों के लोगों को सबसे ऊपर रखने की प्रतिबद्धता से एकजुट थे।
ओबामा ने मध्यावधि चुनाव प्रचार में जुटे रहे कार्यकर्ताओं और वॉलंटियर्स का भी आभार जताया। उन्होंने कहा, "हम उन हजारों चुनाव कार्यकर्ताओं और दोनों पार्टियों के स्वयंसेवकों के भी आभारी हैं, जिन्होंने चुनाव को सुचारू रूप से संपन्न कराने में मदद की और हमारे लोकतंत्र के सबसे महत्वपूर्ण कार्यों में से एक को बखूबी निभाया।
पूर्व राष्ट्रपति ने अपने बयान में लोगों को भविष्य के लिए तैयार रहने की बात कही। उन्होंने कहा, "मौजूदा प्रशासन का कार्यकाल अभी दो साल और है। ऐसे में हमारा काम और अहम हो जाता है। अब पार्टी और सहयोगियों को अपनी आस्तीनें चढ़ाकर काम करना होगा। जहां भी हमारे पास बदलाव लाने का अधिकार है, वहां बदलाव लाना होगा ताकि आगे और नुकसान न होने दें और भविष्य के लिए तैयार हों।
अमेरिका के 2026 के मध्यावधि चुनाव में भारतीय मूल के उम्मीदवारों ने एक बार फिर अपनी राजनीतिक ताकत का अहसास कराया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी और डेमोक्रेटिक पार्टी के बीच कड़े मुकाबले के दौरान भारतीय-अमेरिकी समुदाय के कई चेहरे चुनावी मैदान में उतरे। इनमें कुछ ने जीत हासिल कर अमेरिकी राजनीति में अपनी जगह मजबूत की, जबकि कुछ उम्मीदवार मतगणना के दौरान बढ़त बनाए हुए थे।
इन चुनावों में भारतीय मूल के नेताओं की मौजूदगी अमेरिकी राजनीति में बदलते सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधित्व की कहानी भी बयां करती है। सबसे उल्लेखनीय सफलताओं में पीया दांडिया, सुहास सुब्रमण्यम और मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर अरुणा मिलर की जीत शामिल है। वहीं, रो खन्ना और प्रमिला जयपाल जैसे अनुभवी नेताओं ने भी अपनी सीटें बरकरार रखीं। दूसरी ओर, राष्ट्रपति ट्रंप के करीबी माने जाने वाले विवेक रामास्वामी को ओहायो के गवर्नर चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।
Updated on:
4 Nov 2026, 1:57 PM IST
Published on:
4 Nov 2026, 1:57 PM IST
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