
ईरान पर सैन्य दबाव के साथ अब उसकी अर्थव्यवस्था और वैश्विक वित्तीय नेटवर्क को निशाना बनाने की रणनीति तेज हो रही है। अमेरिका के ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ को यूरोपीय सहयोग मिलने के संकेतों ने तेहरान के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि यूरोपीय संघ इस अभियान से जुड़ गया है। हालांकि, यूरोपीय पक्ष ने सार्वजनिक रूप से अमेरिका दावे जैसी स्पष्ट भाषा में ‘औपचारिक रूप से शामिल होने’ की पुष्टि नहीं की है। यूरोप ने ईरान पर दबाव बनाए रखने के साथ कूटनीतिक समाधान और क्षेत्रीय तनाव घटाने पर भी जोर दिया है।
यूरोपीय संघ की रणनीति अमरीका की तुलना में अधिक संतुलित दिखाई देती है। वह ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को लेकर दबाव और आगे के प्रतिबंधात्मक कदमों की संभावना बनाए रखते हुए बातचीत जारी रखने पर भी जोर दे रहा है। साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित और निर्बाध नौवहन यूरोप की प्रमुख चिंता है।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर EU पहले ही प्रतिबंधात्मक कार्रवाई कर चुका है। 8 जून को यूरोपीय परिषद ने ईरान से संबंधित दो व्यक्तियों और एक संस्था पर प्रतिबंध लगाए थे। परिषद ने कहा था कि मध्य पूर्व में नौवहन की स्वतंत्रता को खतरे में डालने वाली कार्रवाइयां अंतरराष्ट्रीय कानून और अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य से गुजरने के स्थापित अधिकारों के खिलाफ हैं।
दक्षिण कोरिया भी होर्मुज में अपनी भूमिका बढ़ाने पर विचार कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रपति कार्यालय ने पुष्टि की है कि सरकार ‘फ्रीडम ऑफ नेविगेशन’ में योगदान देने के लिए सैन्य और गैर-सैन्य दोनों विकल्पों की समीक्षा कर रही है, लेकिन अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
संभावित विकल्पों में समुद्री गश्ती विमान, लॉजिस्टिक सपोर्ट जहाज या बारूदी सुरंग हटाने वाली इकाई जैसे संसाधनों का उल्लेख रिपोर्टों में किया गया है। दक्षिण कोरिया के लिए होर्मुज स्ट्रेट का महत्व ऊर्जा सुरक्षा से भी जुड़ा है। देश के 60 प्रतिशत से अधिक कच्चे तेल का आयात इस समुद्री मार्ग से जुड़ा है। इसलिए यहां लंबे समय तक अस्थिरता सियोल के लिए केवल सुरक्षा नहीं, बल्कि ऊर्जा और आर्थिक चिंता भी है।
अमेरिकी वित्त विभाग के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर 24 अगस्त को ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ शुरू किया गया। इसका घोषित उद्देश्य ईरान के उन आर्थिक और वित्तीय रास्तों को काटना है, जिनके जरिए तेहरान तेल बेचता है। प्रतिबंधों से बचता है और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) समेत अपने नेटवर्क के लिए धन जुटाता है। अभियान में डिजिटल एसेट, तकनीक, सोना, विमानन और शिपिंग जैसे क्षेत्रों पर सेकेंडरी प्रतिबंधों का जोखिम भी बढ़ाया गया है।
अमेरिकी अभियान केवल घोषणा तक सीमित नहीं है। 4 सितंबर को अमेरिकी वित्त विभाग ने तुर्किये स्थित "Golden Global Bank" और उसकी सहायक कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि बैंक ने "IRGC-Quds Force" से जुड़े करोड़ों डॉलर के लेन-देन में भूमिका निभाई और ईरान को अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग तक पहुंच उपलब्ध कराई। इसी आधिकारिक बयान में अमरीकी वित्त विभाग ने कहा कि वह यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, खाड़ी देशों और दूसरे साझेदारों के साथ ईरान की कथित प्रतिबंध-चोरी व्यवस्था को निशाना बना रहा है।