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भारत को लंबे समय तक यूरेनियम की आपूर्ति करेगा उज्बेकिस्तान; दोनों देशों के बीच कई बड़े समझौते

मध्य एशियाई देश उज्बेकिस्तान भारत को लंबे समय तक यूरेनियम की आपूर्ति करता रहेगा। इसके साथ ही दोनों देश मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार को एक अरब डॉलर से 2030 तक 5 अरब डॉलर तक बढ़ाएंगे।
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Aug 31, 2026
India-Uzbekistan Trade Agreement
इमेज सोर्स -Chatgpt

भारत और मध्य एशियाई देश उज्बेकिस्तान ने अपने रिश्तों को नई रणनीतिक ऊंचाई देने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के बीच ताशकंद में हुई वार्ता में दोनों देशों ने अपनी ‘रणनीतिक साझेदारी’ को बढ़ाकर ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ करने पर सहमति जताई है। इसके साथ ही ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण कदम के रूप में उज्बेकिस्तान से भारत को यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति की व्यवस्था में हुई प्रगति का स्वागत किया गया।

भारत- उज्बेकिस्ता के बीच कई बड़े मुद्दों पर चर्चा


दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 5 अरब डॉलर से अधिक पहुंचाने का लक्ष्य भी रखा है। प्रधानमंत्री मोदी 29 से 30 अगस्त तक उज्बेकिस्तान की राजकीय यात्रा पर रहे। यह उज्बेकिस्तान की उनकी चौथी यात्रा थी। ताशकंद में राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ व्यक्तिगत और प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत में व्यापार, निवेश, रक्षा-सुरक्षा, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, UPI, स्वास्थ्य, फार्मा, क्रिटिकल मिनरल्स, कृषि, शिक्षा, पर्यटन, अंतरिक्ष और लोगों के बीच संपर्क सहित कई क्षेत्रों पर चर्चा हुई।

यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति पर जोर


भारत के लिए बातचीत का सबसे रणनीतिक पहलू यूरेनियम रहा। प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक मोदी ने उज्बेकिस्तान से भारत को यूरेनियम की आपूर्ति के लिए दीर्घकालिक व्यवस्था में हुई प्रगति की सराहना की। दोनों नेताओं ने परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल में सहयोग बढ़ाने में भी रुचि दिखाई। इसके अलावा भूविज्ञान, खनन, क्रिटिकल और स्ट्रैटेजिक मिनरल्स की खोज, प्रोसेसिंग तथा वैल्यू चेन विकसित करने में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। हालांकि, दोनों देशों की वार्ता के बाद जारी आधिकारिक दस्तावेज में किसी नई यूरेनियम आपूर्ति की मात्रा या अवधि घोषित नहीं की गई है।

व्यापार को 5 अरब डॉलर करने का लक्ष्य


दोनों देशों के आर्थिक संबंध तेजी से बढ़ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत-उज्बेकिस्तान द्विपक्षीय व्यापार करीब एक अरब डॉलर रहा। अब दोनों देशों ने इसे 2030 तक 5 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इसके लिए कारोबार का दायरा बढ़ाने, गैर-टैरिफ बाधाओं और निवेश संबंधी अड़चनों को दूर करने तथा कंपनियों के बीच सहयोग बढ़ाने की योजना है। इलेक्ट्रिकल सामान, इंजीनियरिंग उत्पाद, ऑटोमोबाइल और फार्मा को व्यापार बढ़ाने की बड़ी संभावनाओं वाले क्षेत्रों के रूप में पहचाना गया है।

दोनों पक्ष निवेशकों की समस्याओं के समाधान के लिए संस्थागत व्यवस्था बनाने पर भी सहमत हुए हैं। साथ ही उज्बेकिस्तान की Investment Promotion Agency और Invest India के बीच बिजनेस फोरम, रोड शो और निवेश से जुड़े कार्यक्रमों के जरिए सहयोग बढ़ाने की योजना है। भारत-उज्बेकिस्तान Preferential Trade Agreement की संयुक्त व्यवहार्यता स्टडी पूरी होने के बाद दोनों नेताओं ने संबंधित मंत्रालयों को अगले कदम समयबद्ध तरीके से तलाशने को कहा है।

दोनों देशों में 11 समझौते, UPI की उज्बेकिस्तान में एंट्री


PM मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा के दौरान कुल 11 समझौते (MoU) हुए। इनमें 2026-30 का सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम, फयाज टेपा और कारा टेपा के प्राचीन बौद्ध स्थलों के संरक्षण और पुनर्स्थापन, अभिलेखागार, आयुर्वेद एवं पारंपरिक चिकित्सा, भूविज्ञान एवं खनिज संसाधन, पर्यटन, राजनयिक प्रशिक्षण, आर्थिक-वित्तीय संवाद, पर्यावरण संरक्षण, उच्च शिक्षा एवं वैज्ञानिक अनुसंधान और गुजरात-सामरकंद साझेदारी शामिल हैं।

डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भी अहम प्रगति हुई। NPCI International Payments Limited और उज्बेकिस्तान के National Interbank Processing Centre के बीच वाणिज्यिक समझौता हुआ है। इसके तहत भारतीय UPI ऐप उज्बेकिस्तान के राष्ट्रीय QR सिस्टम ‘UZQR’ को स्कैन करके वहां व्यापारियों को भुगतान करने में सक्षम होंगे। भारत ने अरल सागर क्षेत्र में वृक्षारोपण और पर्यावरणीय पुनर्वास के लिए 10 लाख अमेरिकी डॉलर की सहायता की घोषणा की। इसके अलावा ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज में ICCR संस्कृत चेयर स्थापित की जाएगी। उज्बेक छात्रों के लिए हिंदी भाषा की 100 लाल बहादुर शास्त्री छात्रवृत्तियां भी घोषित की गई हैं।

आतंकवाद पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर जोर

सुरक्षा के मुद्दे पर दोनों देशों ने सीमा पार आतंकवाद सहित आतंकवाद के सभी रूपों की स्पष्ट निंदा की। संयुक्त बयान में आतंकवाद के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ दोहराते हुए आतंकी संगठनों, उनके वित्तपोषण नेटवर्क, सुरक्षित ठिकानों और बुनियादी ढांचे के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जरूरत बताई गई। कानून प्रवर्तन, खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान, कट्टरपंथ, अवैध ड्रग तस्करी, संगठित अपराध और साइबर खतरों से मुकाबले में सहयोग बढ़ाने की बात भी कही गई।

भारत को कूटनीतिक मोर्चे पर भी उज्बेकिस्तान का महत्वपूर्ण समर्थन मिला। संयुक्त बयान में संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार की जरूरत दोहराई गई और उज्बेकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की उम्मीदवारी के प्रति अपना समर्थन फिर से व्यक्त किया। दोनों देशों ने नई व्यापक रणनीतिक साझेदारी को जमीन पर उतारने के लिए विदेश मंत्रियों के नेतृत्व में उच्चस्तरीय व्यवस्था बनाने का फैसला किया है। मौजूदा अंतर-सरकारी आयोग को भी मंत्री स्तर तक बढ़ाया जाएगा।

Updated on:
31 Aug 2026 08:12 pm
Published on:
31 Aug 2026 08:12 pm