
सांकेतिक इमेजः एआई
मौसमी भोज की बात सुनते ही मन में ताजगी, स्वाद और सेहत का ख्याल आता है। जब हम मौसम के अनुसार फल, सब्जियां और स्थानीय खाद्य पदार्थ चुनते हैं, तो न केवल स्वाद बढ़ता है, पोषण, पर्यावरण और स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। आइए जानें कि मौसमी भोज क्यों आवश्यक है और इसे अपनाने से हमें क्या-क्या लाभ मिलते हैं।
एक अध्ययन में पाया गया कि भारत में किशोरों में विटामिन ए की कमी (VAD) का स्तर मौसम के अनुसार बदलता है। जून से अगस्त के दौरान, जब विटामिन ए युक्त फल और सब्जियां अधिक उपलब्ध होती हैं, VAD की दर 10% से भी कम हो जाती है, जबकि मई में यह 25–28% तक पहुंच जाती है। इसका अर्थ है कि मौसमी भोज सीधे तौर पर शरीर को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराता है।
पंजाब में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि सर्दियों में पारंपरिक सब्जी व्यंजन (जैसे सरसों का साग, आलू-प्याज आदि) विटामिन सी (एस्कॉर्बिक एसिड) और बीटा-कैरोटीन का अच्छा स्रोत होते हैं। इन व्यंजनों से वयस्कों को विटामिन सी की 269.9% और बीटा-कैरोटीन की 77.5% RDA (Recommended Dietary Allowance) प्राप्त होती है।
स्थानीय और मौसमी खाद्य पदार्थ ताजे होते हैं और लंबी दूरी से लाए गए खाद्य पदार्थों की तुलना में पर्यावरण पर कम दबाव डालते हैं। ये स्वाद में बेहतर होते हैं और पोषक तत्वों से भरपूर भी होते हैं। साथ ही, मौसमी भोजन से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी आती है, जिससे कम कार्बन वाला आहार सुनिश्चित होता है।
भारत में फलों और सब्जियों की मौसमी उपलब्धता में सुधार हुआ है। 2011–12 और 2023–24 के बीच, ताजे फल और सब्जियों की मौसमी उतार-चढ़ाव में कमी आई है, जिससे पोषण की स्थिरता बढ़ी है। इसका श्रेय बेहतर शीत भंडारण, परिवहन और आपूर्ति श्रृंखला को जाता है।
एक अध्ययन में पाया गया कि ग्रामीण भारत में गर्मी के मौसम में फसलों की पैदावार घटने से घरों में पोषण संबंधी कमी बढ़ जाती है। विशेषकर कैलोरी, आयरन, जिंक जैसे पोषक तत्वों की कमी होती है। हालांकि, कुछ परिवार भोजन खरीदकर इस कमी को पूरा करने का प्रयास करते हैं। इसी प्रकार, उच्च तापमान के कारण ताजे खाद्य पदार्थों की उपलब्धता घटने से गरीब परिवारों में पोषण संबंधी नुकसान अधिक होता है, खासकर उन परिवारों में जिनके पास फ्रिज नहीं है।
ICMR–NIN की 2024 की आहार संबंधी दिशानिर्देशों में विविधता, स्थानीय और पारंपरिक खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। इसका अर्थ है कि मौसमी भोज केवल स्वाद या परंपरा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और नीति का भी हिस्सा है।
मौसमी भोज अपनाने के कुछ आसान तरीके:
मौसमी भोज केवल स्वाद का विषय नहीं है। यह आपके शरीर को आवश्यक पोषक तत्व देता है, पर्यावरण की रक्षा करता है और पारंपरिक भोजन संस्कृति को भी जीवित रखता है। जब आप मौसम के अनुसार खाने का चयन करते हैं, तो आप अपने स्वास्थ्य और समाज दोनों में योगदान देते हैं।
Updated on:
31 Aug 2026 08:46 pm
Published on:
31 Aug 2026 08:46 pm
