
भारत में हर साल लाखों सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। इन हादसों में हजारों लोग अपनी जान गंवा देते हैं। देश में होने वाली ज्यादातर दुर्घटनाएं ओवरस्पीडिंग, रैश ड्राइविंग और ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन की वजह से होती हैं। दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) ने V2X टेक्नोलॉजी पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। हाल ही में TRAI ने इस संबंध में कंसल्टेशन पेपर जारी किया और स्टेकहोल्डर्स के साथ ओपन चर्चा भी की।
V2X का पूरा नाम Vehicle-to-Everything है। यह एक उन्नत संचार प्रणाली है जिसमें सेंसर, कैमरे, वायरलेस कनेक्टिविटी, LTE, 5G और शॉर्ट रेंज रेडियो फ्रीक्वेंसी (DSRC) का इस्तेमाल होता है। इस तकनीक के जरिए गाड़ियां आसपास के वातावरण, अन्य वाहनों, ट्रैफिक सिग्नल, पैदल यात्रियों और क्लाउड नेटवर्क के साथ रीयल-टाइम डेटा शेयर कर सकेंगी। मौजूदा समय में कई आधुनिक कारों में ADAS (Advanced Driver Assistance Systems) उपलब्ध हैं, लेकिन वे मुख्य रूप से अपने सेंसर तक सीमित रहते हैं। V2X इन सिस्टम्स को अगले स्तर पर ले जाएगा, जहां गाड़ियां देख नहीं पाती, वहां भी स्थिति को भांप सकेंगी।
1- V2V (Vehicle-to-Vehicle): दो या अधिक गाड़ियां आपस में शॉर्ट रेंज रेडियो फ्रीक्वेंसी से कम्युनिकेट करेंगी। अगर आगे वाली गाड़ी अचानक ब्रेक लगाए, तो पीछे वाली गाड़ी को तुरंत अलर्ट मिल जाएगा। इससे रियर-एंड collision रोका जा सकेगा।
2- V2I (Vehicle-to-Infrastructure): गाड़ियां सड़क किनारे लगे ट्रैफिक लाइट, साइन बोर्ड, स्पीड ब्रेकर और स्मार्ट पोल के साथ जुड़ेंगी। इससे ट्रैफिक सिग्नल का स्टेटस, रोड वर्क या ब्लॉकेज की पहले से जानकारी मिल सकेगी।
3- V2P (Vehicle-to-Pedestrian): गाड़ियां स्मार्टफोन वाले पैदल यात्रियों से कम्युनिकेट कर सकेंगी। अगर कोई पैदल यात्री सड़क पार कर रहा है, तो गाड़ी ऑटोमैटिक ब्रेक लगा सकती है या ड्राइवर को अलर्ट दे सकती है।
4- V2N (Vehicle-to-Network): गाड़ियां मोबाइल नेटवर्क टावर और क्लाउड से जुड़कर रीयल-टाइम मैप अपडेट, ट्रैफिक कंजेशन, मौसम अलर्ट और इमरजेंसी सर्विसेज एक्सेस कर सकेंगी।
5- V2D (Vehicle-to-Device): अन्य स्मार्ट डिवाइसेज (जैसे साइकिल या मोटरसाइकिल) के साथ कनेक्शन।
TRAI ने V2X टेक्नोलॉजी पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। TRAI की इस खास पहल से V2X टेक्नोलॉजी के जरिए सड़क पर दौड़ रही गाड़ियों को बीच कम्युनिकेशन (Communication) स्थापित होगा और सड़क हादसों पर लगाम लगेगी। यह तकनीक सड़क पर चल रही गाड़ियों को आपस में, इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ और पैदल यात्रियों से जोड़कर दुर्घटनाओं को कम करने का लक्ष्य रखती है। विशेषज्ञों का मानना है कि V2X के व्यापक क्रियान्वयन से भारत में रोड एक्सीडेंट्स में 30-50% तक की कमी आ सकती है।
V2X सिस्टम गाड़ी में लगे GPS, कैमरे, रडार, लाइDAR और कम्युनिकेशन मॉड्यूल्स का इस्तेमाल करता है। 5G की कम लेटेंसी (1-2 मिलीसेकंड) इसे बेहद प्रभावी बनाती है। उदाहरण के लिए- कोहरे या बारिश में आगे की गाड़ी दिखाई न दे तो V2V अलर्ट देगा। एम्बुलेंस आने पर आसपास की गाड़ियां ऑटोमैटिक रास्ता बनाने का अलर्ट प्राप्त करेंगी। ट्रैफिक जाम या सड़क बंद होने की सूचना कई किलोमीटर पहले मिल जाएगी। ट्रायल में यह पाया गया है कि V2X से प्रतिक्रिया समय काफी कम हो जाता है, जो पारंपरिक ब्रेकिंग से कहीं बेहतर है।