
आज के डिजिटल युग में ठगों ने अपनी चालाकी को एक नए स्तर पर ले जाकर वॉयस क्लोनिंग तकनीक का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। यह तकनीकी खतरा वित्तीय रूप से आम परिवारों के लिए खतरनाक जाल है। इस लेख में हम समझेंगे कि यह स्कैम कैसे काम करता है, इसके पीछे की तकनीक क्या है, कौन-से मामले सामने आए हैं और आप इससे कैसे बच सकते हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से केवल 3 से 10 सेकंड की ऑडियो क्लिप से किसी की आवाज की नकल तैयार की जा सकती है। यह क्लिप सोशल मीडिया पोस्ट, वॉयस नोट या वीडियो कॉल से ली जा सकती है। फिर इस नकली आवाज का इस्तेमाल फोन कॉल या वॉयस मैसेज में किया जाता है, जिससे सुनने वाला विश्वास कर लेता है कि यह उसका कोई करीबी बोल रहा है।
स्कैम की आम स्क्रिप्ट यह होती है कि कॉल करने वाला किसी रिश्तेदार की आपात स्थिति (Emergency) का हवाला देता है, जैसे अस्पताल में भर्ती, गिरफ्तारी या दुर्घटना और तुरंत पैसे भेजने का दबाव बनाता है। यह “डिजिटल अरेस्ट” जैसा रूप भी ले सकता है, जिसमें पुलिस या सरकारी अधिकारी बनकर डराया जाता है।
दिल्ली पुलिस ने जून 2026 में एक गिरोह को गिरफ्तार किया था, जिसने मुंबई की एक कंपनी के एमडी की आवाज क्लोन कर डीजीएम (डिप्टी जनरल मैनेजर) को फोन किया और ₹10 करोड़ से अधिक की ठगी की। यह राशि 63 अलग-अलग बैंक खातों में भेजी गई थी और गिरोह का एक सदस्य ₹9 लाख का चेक कैश कराने बैंक गया था, जहां बैंककर्मी की शंका पर मामला उजागर हुआ।
इसके अलावा, तमिलनाडु साइबर पुलिस ने अप्रैल 2024 में एक एडवाइजरी जारी की थी, जिसमें बताया गया कि स्कैमर्स रिश्तेदारों की आवाज क्लोन कर तत्काल UPI ट्रांसफर के लिए दबाव बनाते हैं। McAfee के 2023 के सर्वे में पाया गया कि 47% भारतीय वॉयस क्लोनिंग स्कैम का सामना कर चुके हैं या किसी को जानते हैं और 69% लोग नकली आवाज को असली से अलग नहीं कर पाते। हालांकि यह आंकड़ा 2026 का नया अध्ययन नहीं, बल्कि 2023 का ही पुराना डेटा है।
वॉयस क्लोनिंग कॉल में अक्सर आवाज में रोबोट जैसा टोन, होंठ और आवाज का तालमेल न होना या चेहरे के हावभाव में असामान्यता जैसी बातें होती हैं। कॉल करने वाला डर या आपात स्थिति का माहौल बनाकर सोचने का समय नहीं देता।
एक प्रभावी तरीका है “सेफ वर्ड” तय करना, परिवार में एक गुप्त शब्द, जिसे केवल असली व्यक्ति ही जानता हो। अगर कॉल करने वाला वह शब्द नहीं बोलता, तो समझ जाइए कि यह स्कैम हो सकता है। इसके अलावा:
AI वॉयस क्लोनिंग ने पहचान और बैंकिंग सुरक्षा को चुनौती दी है। McAfee के अनुसार, केवल तीन सेकंड की क्लिप से आवाज क्लोन करना संभव है। अमेरिकी कांग्रेस में भी इस तकनीक के दुरुपयोग को रोकने के लिए AI वॉयस क्लोनिंग कंपनियों से जवाब मांगा गया है।
वॉयस क्लोनिंग स्कैम भावनात्मक और वित्तीय जाल है, जो परिवारों को निशाना बनाता है। यह खतरा बढ़ रहा है और आम लोगों को इससे बचने के लिए सजग और तैयार रहना चाहिए। सबसे असरदार बचाव है, रुककर सोचें, कॉल करने वाले की जांच करें और परिवार में एक गुप्त कोड तय करें। यदि आपको शक हो, तो तुरंत संबंधित व्यक्ति से संपर्क करें और साइबर पुलिस को रिपोर्ट करें।