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तालाब में सिंघाड़े की खेती, कम लागत में बढ़िया मुनाफा, मछली पालन के साथ दोगुनी हो सकती है आय

Singhara cultivation in pond guide : तालाब में सिंघाड़े की खेती से बढ़ाएं कमाई! जानें रोपण का सही समय, थॉर्नलेस किस्में, मछली पालन के साथ सह-खेती और लागत-मुनाफे की पूरी जानकारी।
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Aug 27, 2026
singhara cultivation in pond guide
Singhara cultivation in pond guide : कैसे करे सिंघाड़े की खेती, PC- Chatgpt

तालाब में सिंघाड़े की खेती एक ऐसा अवसर है जो जलाशयों को उत्पादक बनाकर किसानों की आय बढ़ा सकता है। यह खेती कैसे होती है, इसके फायदे क्या हैं, कौन-कौन से कदम जरूरी हैं और किस तरह सावधानी बरतने से मुनाफा सुरक्षित रखा जा सकता है?

सबसे पहले तालाब की मिट्टी और पानी का सही संतुलन समझना जरूरी है। सिंघाड़ा एक जलीय फसल है, जिसे तालाब, पोखर, नहर या जलभराव वाले खेतों में उगाया जाता है। इसके लिए मिट्टी में पर्याप्त जैविक पदार्थ और पानी की गहराई लगभग 0.5 से 1.5 मीटर उपयुक्त मानी जाती है। यह गहराई प्रबंधन में आसान होती है और उत्पादन भी बेहतर मिलता है।

रोपण का सही समय और जरूरी तैयारियां

तालाब की तैयारी के साथ रोपण का समय भी महत्वपूर्ण होता है। मानसून के दौरान जून से जुलाई के बीच बीज को पानी में भिगोकर अंकुरित करें और फिर तैयार तालाब में रोपण करें।

नर्सरी में बीज से पौधे तैयार कर अप्रैल से जून के बीच लगभग 1 मीटर लंबी बेलों का रोपण किया जा सकता है। रोपण से पहले तालाब की सफाई, खरपतवार हटाना और मिट्टी में गोबर खाद या जैविक खाद मिलाना फायदेमंद रहता है।

बेहतर उत्पादन के लिए सही किस्मों का चयन

उपयुक्त किस्मों का चयन खेती की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बिना कांटों वाली (थॉर्नलेस) किस्में हाथ से कटाई में आसान होती हैं और उत्पादन भी बेहतर देती हैं।

जल्दी पकने वाली किस्मों जैसे लाल गठुआ, हरीरा गठुआ, लाल चिकनी गुलरी और कटीला में पहली तुड़ाई रोपण के 120–135 दिन बाद शुरू हो जाती है। वहीं देर से पकने वाली किस्मों में पहली तुड़ाई 150–165 दिनों में होती है।

कब और कैसे मिलेगी बेहतर कीमत

सिंघाड़े की कटाई आमतौर पर अक्टूबर से दिसंबर के बीच होती है। इस दौरान फसल की बार-बार तुड़ाई कर बाजार में बिक्री की जा सकती है।

व्रत और त्योहारों के मौसम में ताजे सिंघाड़ों की मांग बढ़ जाती है। इसके अलावा सिंघाड़े के आटे के रूप में वैल्यू एडिशन कर किसानों को बेहतर कीमत प्राप्त हो सकती है।

मछली पालन के साथ सह-खेती का लाभ

तालाब में मछली पालन के साथ सिंघाड़े की सह-खेती एक लाभदायक मॉडल माना जाता है। इसमें तालाब में सिंघाड़ा और मछली दोनों का उत्पादन किया जाता है।

सिंघाड़े की पत्तियां और शाखाएं मछलियों के लिए भोजन का काम करती हैं, जबकि बचा हुआ जैविक पदार्थ विघटित होकर तालाब की उत्पादकता बढ़ाता है। इस मॉडल से एक हेक्टेयर तालाब में लगभग 1000–1200 किलोग्राम सिंघाड़ा और 1500 किलोग्राम मछली का उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। यह संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ आय बढ़ाने का प्रभावी तरीका है।

छोटे तालाब में भी हो सकती है अच्छी कमाई

मध्य प्रदेश के महिदपुर तहसील के किसान लालू ने लगभग 0.5 हेक्टेयर तालाब में सिंघाड़ा और मछली की सह-खेती कर 60–70 हजार रुपये की आमदनी प्राप्त की। इसके अलावा मछली से अतिरिक्त 12 हजार रुपये की आय भी हुई। यह उदाहरण बताता है कि छोटे तालाबों में भी यह मॉडल लाभदायक साबित हो सकता है।

छोटे किसानों और फार्महाउस के लिए भी उपयुक्त

फार्महाउस या छोटे स्तर पर खेती करने वाले किसान कृत्रिम तालाब या टैंक में भी सिंघाड़े की खेती कर सकते हैं।

प्लास्टिक या सीमेंट के टैंक, ड्रम या ग्रो बैग में मिट्टी की परत बिछाकर 1–2 फीट पानी भरें और खेती शुरू करें। गोबर खाद या वर्मीकंपोस्ट से पोषण सुनिश्चित करें। साथ ही रोजाना 5–6 घंटे धूप मिलना और पानी का साफ रहना जरूरी है। यह तरीका छोटे किसानों और फार्महाउस मालिकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।

एक नजर में सिंघाड़ा खेती की जरूरी जानकारी

पहलूविवरण
जलाशय का प्रकारतालाब, पोखर, जलभराव खेत, कृत्रिम टैंक
पानी की गहराई0.5–1.5 मीटर (उथला पानी बेहतर)
रोपण समयजून–जुलाई (बीज अंकुरण के बाद)
किस्मेंथॉर्नलेस, जल्दी पकने वाली (120–135 दिन) और देर से पकने वाली (150–165 दिन)
कटाई समयअक्टूबर–दिसंबर
सह-खेतीमछली के साथ, उत्पादन: सिंघाड़ा 1000–1200 किग्रा, मछली 1500 किग्रा प्रति हेक्टेयर
फार्महाउस विकल्पटैंक/ड्रम/ग्रो बैग में खेती, 1–2 फीट पानी, खाद व धूप का ध्यान

किसानों के लिए क्यों है यह बेहतर विकल्प?

जो किसान तालाब या खेत में सिंघाड़ा उगाने की सोच रहे हैं, उनके लिए यह एक सस्ता और लाभदायक विकल्प हो सकता है। खासकर तब, जब तालाब खाली पड़ा हो या खेत में जलभराव की स्थिति रहती हो। मछली पालन को इसके साथ जोड़ने पर आय की संभावनाएं और बढ़ जाती हैं।

निवेश से पहले इन बातों का रखें ध्यान

मंडी भाव जैसे तेजी से बदलते आंकड़ों के लिए नजदीकी मंडी या eNAM पोर्टल पर ताजा जानकारी देखना सबसे सुरक्षित रहेगा। बड़े निवेश से पहले स्थानीय कृषि विभाग या विशेषज्ञ से सलाह लेना भी समझदारी भरा कदम है।

खाली तालाब को बनाइए कमाई का साधन

सिंघाड़े की खेती से किसान परिवारों की आमदनी बढ़ सकती है, जलाशयों का बेहतर उपयोग हो सकता है और त्योहारों के मौसम में मांग वाली फसल का उत्पादन किया जा सकता है। अगला कदम यह हो सकता है कि आप अपने तालाब या खेत की मिट्टी और जल स्तर की जांच करें, नर्सरी तैयार करें और इस लाभदायक खेती की शुरुआत करें।

Updated on:
27 Aug 2026 04:32 pm
Published on:
27 Aug 2026 04:32 pm