
यह कहानी उस विवाद की है जिसने मीडिया और आर्थिक हलकों में हलचल मचा दी है। एक समय ‘₹22,006 करोड़’ के दावे के बीच अब केवल ‘₹6.25 करोड़’ की अदायगी की बात हो रही है। आइए समझते हैं कि असल में क्या हुआ, यह मामला चर्चा में क्यों है, और इसका असर क्या हो सकता है।
हालांकि नई जानकारी के अनुसार, एस्सेल ग्रुप के संस्थापक सुभाष चंद्रा को बड़ा झटका लगा है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की पांच सदस्यीय विशेष पीठ ने मंगलवार को ट्रिब्यूनल की एकल सदस्यीय पीठ के 25 अगस्त के फैसले के अमल पर रोक लगा दी।
पिछले दिनों एकल सदस्यीय पीठ ने अपने फैसले में सुभाष चंद्रा को 22,006.57 करोड़ रुपये के स्वीकृत दावों के मुकाबले 6.25 करोड़ रुपये का भुगतान कर अपनी व्यक्तिगत दिवाला कार्यवाही का निपटारा करने की अनुमति दी थी। अब विशेष पीठ ने इस फैसले के संचालन पर रोक लगा दी है।
सबसे पहले, हाल की सुनवाई में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने एक व्यक्तिगत दिवालियापन (personal insolvency) योजना को मंजूरी दी थी। इस योजना के तहत, जी ग्रुप के संस्थापक और एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा को व्यक्तिगत गारंटर के रूप में लगभग ₹22,006.57 करोड़ के दावे के मुकाबले केवल ₹6.25 करोड़ चुकाने होंगे। साथ ही, ₹25 लाख प्रक्रिया लागत के लिए अलग रखे गए थे। इस फैसले से लेनदारों को लगभग 0.03% की ही वसूली होगी, यानी लगभग 99.97% का ‘haircut’ हुआ है।
यह फैसला NCLT के दो सदस्यों के बीच मतभेद के बाद आया। दोनों की राय अलग थी, इसलिए तीसरे सदस्य- न्यायिक सदस्य निलेश शर्मा को नियुक्त किया गया। उन्होंने इस योजना को IBC की धारा 114 के तहत मंजूर कर दिया।
हालांकि, यह मंजूरी अंतिम नहीं रही। 1 सितंबर 2026 को NCLT ने इस आदेश को रोक दिया है। एक पांच-सदस्यीय विशेष पीठ ने यह निर्णय लिया कि पहले का आदेश लागू नहीं होगा, क्योंकि तीन सदस्यों में कोई स्पष्ट बहुमत नहीं था। साथ ही, चंद्रा को अपनी संपत्तियां बेचने या हस्तांतरित करने से रोक दिया गया है। यह मामला अब फिर से सुनवाई के लिए भेजा गया है।
सुभाष चंद्रा ने स्वयं स्पष्ट किया है कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से ₹22 हजार करोड़ का कर्ज नहीं लिया है। यह राशि उन गारंटी दावों की है, जो उन्होंने एस्सेल समूह की कंपनियों द्वारा लिए गए कर्जों के लिए दी थीं। उन्होंने कहा कि आपत्तिकर्ता लेनदारों ने ₹3,992 करोड़ के दावे पेश किए थे, जबकि कुल ₹22,006 करोड़ की राशि में से ₹21,696 करोड़ को रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने स्वीकार किया था।
सरकारी सूत्रों ने भी इस बात पर जोर दिया है कि यह ‘haircut’ केवल व्यक्तिगत गारंटर के तौर पर चंद्रा से वसूली पर लागू होता है, न कि समूह की कंपनियों के कर्ज पर। कंपनियों की संपत्तियों और ऋणों पर लेनदारों की वसूली का अधिकार अभी भी बना हुआ है।
कुछ प्रमुख बैंकों और वित्तीय संस्थानों जैसे LIC हाउसिंग फाइनेंस, HDFC बैंक, एक्सिस बैंक, केनरा बैंक, RBL बैंक और यूनियन बैंक ने इस योजना का विरोध किया है। LIC हाउसिंग फाइनेंस का दावा था कि उसे ₹1,322.39 करोड़ का भुगतान मिलना था, लेकिन प्रस्तावित योजना में उसे केवल ₹38.09 लाख ही मिलेंगे, यानी लगभग 0.028% ही।
सरकार और कुछ विशेषज्ञों ने इस ‘99.97% haircut’ को भ्रामक बताया है, क्योंकि यह केवल व्यक्तिगत गारंटी से जुड़ी वसूली को दर्शाता है, न कि पूरे समूह की देनदारी को।
अब सवाल यह उठता है कि इस फैसले का असर आम पाठक पर क्या हो सकता है? सबसे पहले, यह मामला यह दिखाता है कि व्यक्तिगत गारंटी देने वाले उद्योगपतियों की संपत्ति और देनदारी के बीच कितना बड़ा अंतर हो सकता है। यह भी स्पष्ट होता है कि IBC की प्रक्रिया में बहुमत का वोट कितना निर्णायक हो सकता है, भले ही वसूली नगण्य हो। साथ ही, यह मामला यह भी दर्शाता है कि न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और बहुमत की स्पष्टता कितनी महत्वपूर्ण है—इसी कारण NCLT ने आदेश को रोक दिया।
आगे क्या हो सकता है? अब यह मामला पांच-सदस्यीय विशेष पीठ के सामने फिर से आएगा। इस दौरान चंद्रा अपनी संपत्तियां नहीं बेच सकते। यदि यह पीठ योजना को खारिज कर देती है, तो मामला वापस मूल पीठ के पास जाएगा, जहां फिर से बहस होगी। लेनदारों के पास अब NCLAT में अपील का रास्ता भी खुला है।
यह कहानी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाती है कि बड़े उद्योगपतियों के व्यक्तिगत गारंटी मामलों में न्यायिक प्रक्रिया कितनी जटिल हो सकती है। आम पाठक के लिए यह समझना जरूरी है कि ‘हेडलाइन’ में दिखने वाला बड़ा आंकड़ा- ₹22 हजार करोड़ वास्तविकता में व्यक्तिगत देनदारी नहीं है, बल्कि गारंटी से जुड़ा एक दायरा है। और यह भी कि न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और बहुमत की स्पष्टता कितनी मायने रखती है।
इस मामले की अगली सुनवाई और फैसला आम पाठकों के लिए यह संकेत होगा कि IBC की प्रक्रिया में व्यक्तिगत गारंटी मामलों में न्याय कितना संतुलित और पारदर्शी है।