..जब ‘द जंगल बुक’ के जन्मदाता से नाराज हो गये महात्मा गांधी

इलाहाबाद में दो साल पत्रकारिता के क्षेत्र में किया काम 
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Apr 09, 2016
rudyard
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इलाहाबाद. द जंगल बुक के लेखक रूडयार्ड कीपलिंग करीब दो साल इलाहाबाद में भी रहे थे। यहां उन्होंने दो साल तक एक अखबार में कार्य किया था। इसी दौरान महात्मां गांधी उनके पास एक शिकायत लेकर पहुंचे थे। तब कीपलिंग ने गांधी की शिकायत को ना केवल सुना बल्कि प्रमुखता भी दी।

सन 1888 से 1889 तक रूडयार्ड इलाहाबाद में एक अग्रेजी अखबार में एडिटर थे। रूडयार्ड के आवास के करीब 20 कदम की दूरी पर उनका आॅफिस था। कीपलिंग जिस अंग्रेजी अखबार से कार्यरत थे उसे ब्रिटिश अखबार के रूप में जाना जाता था। यह अखबार केवल ब्रिटिश सरकार की भाषा ही लिखता व समझता था। इससे देश के आंदोलनकारियों में इस अखबार के प्रति काफी रोष था। उस संस्था से जुड़े लोगों के अनुसार एक बार महात्मां गांधी ट्रेन से कहीं जा रहे थे। उन्हें इलाहाबाद में ट्रेन बदलनी थी। ट्रेन लेट होने के कारण महात्मां गांधी रूडयार्ड से मिलने उनके आफिस पहुंच गए।
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इस दौरान उन्होंने रूडयार्ड से मुलाकात करते हुए अखबार को एकतरफा बताया। साथ ही उन्होनें रूडयार्ड से शिकायत की कि आप के अखबार में हमारा कवजेर नहीं होता है। रूडयार्ड ने महात्मां गांधी की इस शिकायत को ध्यान से सुना। इसके बाद रूडयार्ड ने खुद गांधी जी का इंटरव्यू लिया।
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इस इंटरव्यू को रूडयार्ड ने प्रमुखता से अखबार में अगले दिन प्रकाशित किया। रूडयार्ड का बंगला आज भले ही जर्जर हो गया हो लेकिन अब भी शिलापट्ट पर उनके नाम व कार्यकाल को एक विरासत की तरह खडा किया गया है।
Published on:
09 Apr 2016 04:22 pm