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Modi Trump Meeting: भारत नहीं चाहता था सवाल-जवाब? ट्रंप ने अचानक पत्रकारों को बुलाया और फिर जो हुआ.., सर्जियो गोर के दावे से उठे बड़े सवाल

Modi Trump G7 Meeting: अमेरिकी राजदूत के मुताबिक, भारत चाहता था कि कैमरे बैठक में रहें, लेकिन पत्रकारों को सवाल करने का मौका न मिले। फिर ट्रंप ने कैमरों की ओर देखकर पूछा “कोई सवाल?” और यहीं से पूरी कहानी पलट गई।
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भारत

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Manoj Vashisth

Aug 24, 2026

Modi Trump G7 Meeting

Modi Trump G7 Meeting: मोदी-ट्रंप मुलाकात का वो राज, जो अब खुला! सर्जियो गोर के दावे ने बढ़ाई दिल्ली की टेंशन (फोटो सोर्स:Photo/@narendramodi)

Modi Trump Meeting Questions: भारत और अमेरिका के रिश्तों के बीच अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के एक दावे ने अचानक प्रेस की भूमिका और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मीडिया रणनीति को बहस के केंद्र में ला दिया है। गोर के मुताबिक, जून में फ्रांस के एवियां में पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात से पहले भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से सवाल-जवाब से बचने की इच्छा जताई गई थी। लेकिन ट्रंप ने मौके पर पत्रकारों को सवाल पूछने का न्योता दे दिया और मुलाकात का पूरा माहौल बदल गया।

Modi Trump Meeting: ट्रंप ने पूछा था- भारत की क्या मांग है?

सर्जियो गोर ने यह दावा 23 अगस्त को आयोजित इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम में किया। उन्होंने जून 2026 में फ्रांस के एवियां-ले-बैंन्स में हुई मोदी-ट्रंप मुलाकात के पर्दे के पीछे की बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि बैठक से पहले वह ट्रंप के साथ मंच के पीछे मौजूद थे।

गोर के मुताबिक, ट्रंप ने उनसे पूछा कि भारतीय पक्ष किन मुद्दों को उठाने वाला है और उसकी कोई खास मांग है या नहीं। इसी बातचीत में गोर ने कथित तौर पर भारत की प्राथमिकता के बारे में अमेरिकी राष्ट्रपति को बताया।

दावे के अनुसार, भारतीय विदेश मंत्रालय चाहता था कि बैठक में मीडिया मौजूद रहे, कैमरों को अंदर आने दिया जाए, लेकिन इसे पारंपरिक सवाल-जवाब वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस में न बदला जाए।

गोर ने कहा कि उन्होंने ट्रंप से साफ तौर पर कहा था कि भारतीय पक्ष सवाल-जवाब नहीं चाहता। ट्रंप ने उस समय कथित तौर पर इस पर सहमति जताई और कहा कि इसमें कोई समस्या नहीं है।

फिर कमरे में आए करीब 50 कैमरे और बदल गया पूरा प्लान

बैठक शुरू हुई तो मीडिया को अंदर आने दिया गया। गोर के मुताबिक, कमरे में करीब 50 कैमरे मौजूद थे। मोदी और ट्रंप ने कुछ मिनट तक अपनी शुरुआती बातें रखीं।

इसके बाद घटनाक्रम ने अचानक करवट ली।

गोर का कहना है कि ट्रंप ने कैमरों की तरफ देखा और पत्रकारों से सवाल पूछने के लिए कह दिया। अमेरिकी राजदूत के अनुसार, इसके बाद जो हुआ वह पहले से तय सीमित मीडिया इंटरेक्शन से बिल्कुल अलग था और बातचीत करीब 45 मिनट तक चलती रही।

यानी जिस मुलाकात को सीमित मीडिया कवरेज के साथ आगे बढ़ाने की योजना बताई जा रही थी, वह ट्रंप के एक सवाल के बाद खुला मीडिया सेशन बन गई।

हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि ‘नो क्वेश्चन’ वाली व्यवस्था को लेकर भारत सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि या खंडन सामने नहीं आया है। इसलिए सर्जियो गोर के बयान को फिलहाल उनके दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

मोदी-ट्रंप की उस मुलाकात में क्या हुआ था?

17 जून 2026 को G7 शिखर सम्मेलन के दौरान एवियां में मोदी और ट्रंप की मुलाकात हुई थी। भारतीय प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका संबंधों के कई अहम पहलुओं पर चर्चा की।

बातचीत में व्यापार, ऊर्जा, रक्षा और रणनीतिक तकनीक जैसे विषय प्रमुख रहे। इसके अलावा पश्चिम एशिया की स्थिति, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आवाजाही को लेकर भी चर्चा हुई। भारत ने समुद्री व्यापार और नाविकों की सुरक्षा के महत्व पर जोर दिया था।

दोनों देशों के बीच अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर चल रही बातचीत भी इस मुलाकात का अहम हिस्सा थी। भारतीय और अमेरिकी पक्ष ने बातचीत को आगे बढ़ाने और एक संतुलित तथा दोनों देशों के लिए लाभकारी समझौते की दिशा में काम करने पर जोर दिया था।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सार्वजनिक बातचीत में भी मोदी के साथ अपने व्यक्तिगत रिश्ते को मजबूत बताया था। अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, उन्होंने भारत-अमेरिका संबंधों को बेहद करीबी बताया और दोनों नेताओं की दोस्ती का जिक्र किया।

एक दावे ने क्यों छेड़ दी प्रेस की आजादी पर बहस?

सर्जियो गोर के बयान का राजनीतिक असर सिर्फ मोदी-ट्रंप मुलाकात तक सीमित नहीं है। इसके बाद सोशल मीडिया पर यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रधानमंत्री और विदेशी नेताओं की बातचीत के दौरान पत्रकारों को सीधे सवाल पूछने का अवसर मिलना चाहिए?

सरकार के आलोचक इस दावे को प्रधानमंत्री की प्रेस से दूरी की बहस से जोड़ रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ यह भी तर्क दिया जा सकता है कि किसी उच्चस्तरीय कूटनीतिक बैठक का प्रारूप पहले से तय करना असामान्य नहीं होता। खासकर तब, जब बातचीत में व्यापार, रक्षा, सुरक्षा और संवेदनशील रणनीतिक मुद्दे शामिल हों।

इसलिए असली सवाल सिर्फ यह नहीं है कि सवाल पूछे गए या नहीं। बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत ने वास्तव में सवाल न लेने की औपचारिक मांग की थी? यदि हां, तो इसका कारण क्या था और यह फैसला किस स्तर पर लिया गया?

भारत की तरफ से जवाब आया तो साफ होगी तस्वीर

फिलहाल इस पूरे विवाद की सबसे अहम कड़ी भारत सरकार की प्रतिक्रिया है। विदेश मंत्रालय की ओर से सर्जियो गोर के दावे पर आधिकारिक प्रतिक्रिया आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि अमेरिकी राजदूत ने जिस बातचीत का जिक्र किया है, वह भारतीय पक्ष की वास्तविक स्थिति थी या फिर बैठक के प्रारूप को लेकर हुई अनौपचारिक चर्चा की उनकी व्याख्या।

एक बात जरूर साफ है ट्रंप और मोदी की मुलाकात सिर्फ दो नेताओं की सामान्य द्विपक्षीय बैठक नहीं थी। इसके पीछे व्यापार समझौते, ऊर्जा, रक्षा सहयोग, पश्चिम एशिया और भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी जैसे कई बड़े मुद्दे जुड़े हुए थे।

ऐसे में एक पत्रकार के सवाल से शुरू हुई 45 मिनट की बातचीत अब खुद एक बड़ा सवाल बन गई है। क्या यह महज ट्रंप का अचानक लिया गया फैसला था, या फिर भारत-अमेरिका कूटनीति में प्रेस की भूमिका को लेकर कोई बड़ी कहानी पर्दे के पीछे चल रही थी?

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