
रायपुर. छत्तीसगढ़ में डेंगू अपना भयावह रूप ले चुका है। इसकी चपेट में आने वाले मरीजों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है। वहीं इलाज के दौरान भी कई की जान जाने का सिलसिला बरकरार है।
डेंगू अब भिलाई के बाद रायपुर में भी पांव पसार चुका है। राजधानी के जिला कोषालय कार्यालय के 6 कर्मचारियों में डेंगू के लक्षण पाए गए, जिसके बाद इन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया है। रायपुर में डेंगू के दस्तक से शहर में दहशत का माहौल है। डेंगू से अब तक छत्तीसगढ़ के भिलाई में 8 बच्चों समेत 10 मरीजों की मौत हो चुकी है।
उधर, जिला कोषालय कार्यालय के 6 कर्मचारियों के डेंगू से ग्रसित होने पर कर्मचारी संघ ने स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है। संघ का कहना है कि डेंगू के रोकथाम के लिए विभाग गंभीर नहीं है और न ही रोकथाम के उपाय किए जा रहे हैं। रोकथाम के लिए की जा रही कार्रवाई संतोषजनक नहीं है।
संघ ने ज्ञापन सौंपते हुए साफ-सफाई और समुचित इलाज की व्यवस्था के लिए कार्यवाही किए जाने की मांग की। विभाग द्वारा डेंगू के रोकथाम के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाने पर सभी कर्मचारियों ने एक साथ छुट्टी लेने की चेतावनी दी है।
इससे पहले गुरुवार को भिलाई के खुर्सीपार में 12 घंटे के भीतर तीन बच्चों समेत चार लोगों की डेंगू से मौत जाने से शहर में हड़कंप मच गया है। बुधवार देर रात दो बालक व एक युवक की मौत हो गई है। उसके बाद गुरुवार दोपहर को एक बच्ची ने दम तोड़ दिया।
डेंगू से दस दिन के भीतर शहर में 10 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि शहर में अब तक डेंगू के 1000 से अधिक मरीज सामने आ चुके हैं। साढ़े तीन सौ से अधिक पीडि़तों का अलग-अलग अस्पतालों में उपचार चल रहा है। सरकारी की जगह निजी हॉस्पिटलों में डेंगू मरीजों की खासी भीड़ है।
स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर लगाया है, पर डेंगू पर काबू नहीं पाया सका है। सबसे अधिक प्रभावित खुर्सीपार व छावनी क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग दवा वितरण कर रहा है। दुर्ग कलक्टर उमेश अग्रवाल ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया। जांच शिविरों का निरीक्षण किया।