24 अगस्त 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

नवागांव का 500 साल पुराना शिव मंदिर! जहां मिलता है नौ पत्तियों वाला अनोखा बेलपत्र, जानिए पूरा इतिहास

500 Year Old Shiva Temple: आरंग के नवागांव में करीब 500 साल पुराना शिव मंदिर आज भी धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहर के रूप में प्रसिद्ध है। यहां का नौ पत्तियों वाला अनोखा बेलपत्र, प्राचीन शिवलिंग और दुर्लभ धार्मिक प्रतिमाएं श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र हैं।
2 min read
Google source verification
Nawagaon Ancient Shiva Temple

Nawagaon Ancient Shiva Temple: नौ पत्तियों वाला अनोखा बेलपत्र(photo-patrika)

Nawagaon Ancient Shiva Temple @त्रिलोचन मानिकपुरी: छत्तीसगढ़ के आरंग मार्ग से करीब 22 किलोमीटर दूर स्थित नवागांव अपनी ऐतिहासिक, धार्मिक और रहस्यमयी पहचान के लिए खास माना जाता है। गांव में मौजूद प्राचीन मंदिर और दुर्लभ धार्मिक धरोहरें श्रद्धालुओं के साथ ही इतिहास प्रेमियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र हैं। खासकर सावन के महीने में यहां श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है। इस प्राचीन परिसर की सबसे अनोखी पहचान यहां का नौ पत्तियों वाला बेल वृक्ष है।

Ancient Shiva Temple: 16वीं शताब्दी का माना जाता है प्राचीन शिव मंदिर

नवागांव में स्थित प्राचीन शिव मंदिर का निर्माण कलचुरीकालीन ईंटों से हुआ है। इसे लगभग 16वीं शताब्दी का माना जाता है। समय के साथ मंदिर भले ही भग्नावस्था में पहुंच गया है, लेकिन इससे जुड़ी धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहर आज भी संरक्षित है। मंदिर का करीब 500 वर्ष पुराना शिवलिंग वर्तमान में समीप स्थित अंबिका मंदिर में सुरक्षित स्थापित है।

शिव के पांच गणों के साथ विराजमान हैं भगवान

मंदिर परिसर में भगवान शिव के साथ उनके पांच गण नंदी, कुबेर, कार्तिकेय, वीरभद्र और गणेश की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। यहां मौजूद अष्टधातु की गणेश प्रतिमा और पारद शिवलिंग भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र हैं। इसके अलावा परिसर में स्फटिक से बने द्वादश ज्योतिर्लिंग तथा स्फटिक मणियों से निर्मित करीब एक हजार शिवलिंग भी बताए जाते हैं।

हनुमान के पांच भाइयों की प्रतिमाएं भी मौजूद

मंदिर परिसर की एक और खासियत यहां स्थापित प्रतिमाएं हैं। यहां वायु पुराण में वर्णित हनुमान के पांच भाइयों की प्रतिमाएं भी मौजूद हैं। धार्मिक मान्यताओं और स्थानीय परंपराओं के चलते इन प्रतिमाओं का विशेष महत्व माना जाता है।

तीन साधुओं की जीवंत समाधियां

प्राचीन मंदिर परिसर में तीन साधुओं की जीवंत समाधियां भी हैं। इसके अलावा यहां एकमुखी, पंचमुखी और अष्टमुखी रुद्राक्ष की दुर्लभ मालाएं भी संरक्षित हैं। इन धार्मिक धरोहरों के कारण यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र बना हुआ है।

सामान्य बेलपत्र से अलग है नौ पत्तियों वाला बेल वृक्ष

इस पूरे परिसर का सबसे अनोखा आकर्षण यहां मौजूद बेल का वृक्ष है। आमतौर पर बेलपत्र में तीन या चार पत्तियां देखने को मिलती हैं, लेकिन यहां नौ पत्तियों वाला बेलपत्र मिलने की बात कही जाती है। यही वजह है कि सावन के दौरान इस बेल वृक्ष को देखने और यहां पूजा-अर्चना करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

भैरव बाबा को अर्पित की जाती है मदिरा

मंदिर परिसर में स्थित भैरव बाबा के मंदिर में प्रतिदिन मदिरा अर्पित करने की परंपरा निभाई जाती है। वहीं भैरव जयंती के अवसर पर विशेष अभिषेक के साथ धार्मिक आयोजन भी किए जाते हैं। यह परंपरा भी मंदिर की विशिष्ट पहचान का हिस्सा है।

10 पीढ़ियों से दाऊ अग्रवाल परिवार कर रहा संरक्षण

इस प्राचीन धार्मिक धरोहर के संरक्षण की जिम्मेदारी आरंग के दाऊ अग्रवाल परिवार द्वारा निभाई जा रही है। बताया जाता है कि परिवार की करीब 10 पीढ़ियां मंदिर की देखरेख और यहां की धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाती आ रही हैं।

सावन में बढ़ जाता है धार्मिक महत्व

स्थानीय लोगों के अनुसार सावन के महीने में नवागांव के इस प्राचीन मंदिर का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व और बढ़ जाता है। इसी वजह से सावन में यहां दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। करीब 500 साल पुरानी धरोहर, दुर्लभ धार्मिक प्रतिमाएं और नौ पत्तियों वाला बेलपत्र इस स्थल को आरंग क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक आकर्षणों में शामिल करते हैं।