
रायपुर@ताबीर हुसैन। AI Supply Chain: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई अब केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं है। इसका इस्तेमाल सामान के उत्पादन, भंडारण और परिवहन को अधिक प्रभावी बनाने में भी किया जा सकता है। भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर के शोधकर्ताओं दीपक कुमार घिदोड़े, एम. रामकुमार, मोहित गोस्वामी और संजीव पराशर ने अपने अध्ययन में जेनरेटिव एआई के जरिए सप्लाई चेन को अधिक टिकाऊ बनाने की संभावनाओं पर चर्चा की है। अध्ययन का केंद्र यह समझना है कि कंपनियां सरकारी नियमों, बाजार की अपेक्षाओं और पर्यावरण संबंधी जिम्मेदारियों के बीच एआई का उपयोग कैसे कर सकती हैं।
सप्लाई चेन में कच्चे माल की उपलब्धता से लेकर उत्पादन, भंडारण, परिवहन और उपभोक्ता तक सामान पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया शामिल होती है। इस दौरान ईंधन की खपत, अतिरिक्त माल का भंडारण, संसाधनों की बर्बादी और कार्बन उत्सर्जन जैसी चुनौतियां सामने आती हैं। जेनरेटिव एआई और डेटा आधारित प्रणालियां इन समस्याओं को कम करने में मदद कर सकती हैं।
एआई की मदद से कंपनियां बाजार में किसी उत्पाद की मांग का अनुमान लगा सकती हैं। इससे जरूरत के अनुसार उत्पादन और भंडारण की योजना बनाने में मदद मिलती है। परिवहन के लिए बेहतर मार्ग चुनने और माल की आवाजाही को व्यवस्थित करने से ईंधन की खपत तथा समय दोनों बचाए जा सकते हैं। ऊर्जा उपयोग की निगरानी भी संसाधनों के अधिक कुशल इस्तेमाल में सहायक हो सकती है। इसका पर्यावरणीय लाभ तभी मिलेगा, जब कंपनियां एआई से मिली जानकारी के आधार पर वास्तविक बदलाव करें और तकनीक के संचालन में लगने वाली ऊर्जा को भी ध्यान में रखें।
सप्लाई चेन में अनावश्यक खर्च और सामान की बर्बादी कम होने से कंपनियों की परिचालन लागत घट सकती है। इसका लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचने की संभावना है, हालांकि वस्तुओं की कीमतों में कमी इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियां बचत का कितना हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचाती हैं।
डिजिटल ट्रैकिंग और एआई आधारित निगरानी से उत्पाद की उत्पत्ति, परिवहन और गुणवत्ता संबंधी जानकारी जुटाना भी आसान हो सकता है। इससे आपूर्ति व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, उत्पाद की प्रामाणिकता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विश्वसनीय डेटा तथा प्रभावी जांच व्यवस्था जरूरी है।