27 जुलाई को सदी का सबसे लंबा ग्रहण लगने वाला है। ग्रहण के दुष्प्रभाव से बचने के लिए इन मंत्रों का जाप करना होगा।
रायपुर. 27 जुलाई को सदी का सबसे लंबा ग्रहण लगने वाला है। यह चंद्र ग्रहण लगभग 3 घंटे 55 मिनट का होगा, जोकि 27 जुलाई की मध्य रात्रि में 11 बजकर 54 मिनट से शुरू होकर मोक्ष काल यानी 28 जुलाई की सुबह 3 बजकर 49 मिनट पर खत्म होगा।
इस बार गुरुपूर्णिमा पर चंद्रग्रहण का साया रहेगा। इसलिए के वल दोपहर दो बजे तक ही मंदिरों में गुरुपूजन हो सकेगा। इसके बाद 18 घंटे के लिए मंदिरों के पट बंद कर दिए जाएंगे। पंडि़तों के अनुसार इस साल का सबसे अधिक समय तक रहने वाला ग्रहण 3 घंटा 55 मिनट तक दिखाई देगा। जो देश के अनेक राज्यों सहित पूरे छत्तीसगढ़ में ग्रहण का खगोलीय दृश्य देखा जा सकेगा। ग्रहणकाल में मंत्र जाप, सत्संग, प्रवचन करना और श्रवण करना विशेष फलदायी होता है, जबकि मंदिरों में पूजा-अर्चना वर्जित माना गया है।
इन मंत्रों के जाप से नहीं होगा चंद्रग्रहण का दुष्प्रभाव
ज्योतिषियों के अनुसार चंद्रग्रहण के दौरान गायत्री मंत्र का जाप करने से सभी राशि के लोगों के दोषों का निवारण होता है। इसके अलावा ग्रहण के दौरान हनुमान चालीसा और हनुमान जी के मंत्रोच्चारण से भी विशेष लाभ मिलता है।
आमतौर पर लोगों को लगता है कि ग्रहण का असर उसके रहने तक ही रहता है लेकिन ज्योतिष शास्त्रियों की मानें तो चंद्र ग्रहण क प्रभाव 108 दिनों तक बना रहता है। उनके अनुसार जिस समय चंद्र ग्रहण लगा हो उस वक्त जाप जरूर किया जाना चाहिए।
महामाया मंदिर के पुजारी पं. मनोज शुक्ला के अनुसार गुरु पूर्णिमा के दिन चंद्रग्रहण का स्पर्शकाल रात 11.54 मिनट पर प्रारंभ होगा। ग्रहण मोछ भोर चार बजे होगा। चंद्र ग्रहण का सूतक दोपहर 2 बजकर 54 मिनट पर प्रारंभ होगा, जिसके 12 घंटे पहले सभी मंदिरों के पट बंद कर दिए जाएंगे।
इस दिन गुरुपूजन का कार्यक्रम में सुबह से पूजा-आरती के साथ ही पहले पहर तक होगा। दूसरे पहले मंदिरों में पूजा-आरती नहीं होगी। ग्रहण मोक्ष के बाद दूसरी दिन सुबह मंदिरों में शुद्धिकरण के कारण बाद भगवान का अभिषेक-पूजन और आरती की जाएगी।
दिखेगा चंद्र ग्रहण
पूर्णिमा के दिन चंद्रमा खूबसूरत लाल या भूरे रंग का दिखाई देगा और इस चंद्र ग्रहण का खूबसूरत नजारा रायपुर सहित देश के लगभग सभी जगहों पर दिखाई देगा। इसके अलावा यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका और पश्चिम एशिया में भी दिखाई देगा।
ग्रहण के समय क्या करें और क्या न करें
सूर्यग्रहण में ग्रहण के 4 पहर पूर्व और चंद्र ग्रहण में 3 पहर पूर्व भोजन नहीं करना चाहिए। बुजुर्ग, बालक और रोगी डेढ़ प्रहर पूर्व तक खा सकते हैं। ग्रहण-वेध के पहले जिन पदार्थों में कुश या तुलसी की पत्तियां डाल दी जाती हैं, वे पदार्थ दूषित नहीं होते।
ग्रहण-वेध के प्रारंभ में तिल या कुश मिश्रित जल का उपयोग भी अत्यावश्यक परिस्थिति में ही करना चाहिए। ग्रहण शुरू होने से लेकर अंत तक अन्न या जल नहीं लेना चाहिए। चंद्र ग्रहण पर सभी को दान-पुण्य करना चाहिए, इसका बड़ा लाभ मिलता है। चन्द्र ग्रहण पर किया गया जप, ध्यान, दान आदि एक लाख गुना पुण्य लाभ देते है। ग्रहण-काल जप, दीक्षा, मंत्र-साधना के लिए उत्तम काल है।
चंद्रग्रहण का समय
- ग्रहण 27 जुलाई की मध्य रात्रि 11 बजकर 54 मिनट पर शुरू होगा।
- चंद्रग्रहण मध्य रात 1 बजकर 52 मिनट पर स्पष्ट व पूरा दिखाई देगा।
- ग्रहण का मोक्ष काल यानी अंत 28 जुलाई को सुबह 3 बजकर 49 मिनट पर हो जाएगा।