
Chhattisgarh Politics: छत्तीसगढ़ में बढ़ती महंगाई, राशन सामग्री की कीमतों, बिजली बिल और धान खरीदी से पहले पटवारियों की हड़ताल को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार एक तरफ महतारी वंदन योजना के तहत महिलाओं को आर्थिक सहायता दे रही है, वहीं दूसरी तरफ महंगाई बढ़ाकर आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रही है। बैज ने राशन सामग्री, पेट्रोल-डीजल, यात्री बस किराए और बिजली बिल में बढ़ोतरी को लेकर सरकार से राहत देने की मांग की।
दीपक बैज ने धान खरीदी से पहले पटवारियों की हड़ताल, कौशल्या माता धाम में भगवान राम की नई मूर्ति स्थापित नहीं होने और आदिवासी विभाग का नाम बदलने जैसे मुद्दों पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने अलग-अलग मामलों को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कई फैसलों को वापस लेने और आम लोगों को राहत देने की मांग की।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सप्ताह की शुरुआत से ही चावल, दाल और अन्य राशन सामग्री के दाम बढ़ाए गए हैं। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ आम लोगों पर महंगाई का दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने यात्री बस किराए में वृद्धि का मुद्दा उठाते हुए दावा किया कि एक साल में दो बार किराया बढ़ाया गया है और कुल बढ़ोतरी 75 प्रतिशत से अधिक रही है। बैज ने आरोप लगाया कि महतारी वंदन योजना के तहत महिलाओं को आर्थिक सहायता देने के बावजूद सरकार दूसरी तरफ महंगाई बढ़ाकर आम जनता की जेब पर बोझ डाल रही है।
उन्होंने कहा कि लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए अधिक खर्च करना पड़ रहा है, जिससे घरेलू बजट प्रभावित हो रहा है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार से राशन सामग्री और परिवहन सहित जरूरी सेवाओं की कीमतों पर राहत देने की मांग की। उनका कहना है कि महंगाई का सीधा असर आम परिवारों पर पड़ता है और सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
छत्तीसगढ़ में नवंबर से प्रस्तावित धान खरीदी से पहले पटवारियों की हड़ताल का मुद्दा उठाते हुए दीपक बैज ने सरकार से तत्काल बातचीत कर आंदोलन समाप्त कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि पटवारियों की हड़ताल के कारण किसानों के राजस्व संबंधी काम और धान खरीदी से जुड़ी प्रक्रियाएं प्रभावित हो सकती हैं। बैज ने कहा कि धान खरीदी के लिए किसानों के जमीन संबंधी रिकॉर्ड, रकबा और अन्य जरूरी दस्तावेजों का सही होना महत्वपूर्ण है।
ऐसे में यदि पटवारी लंबे समय तक हड़ताल पर रहते हैं, तो किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने दावा किया कि पिछली बार भी ऐसी स्थिति बनी थी, जिसके कारण कुछ किसान अपना धान नहीं बेच पाए थे। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार इस समस्या को गंभीरता से नहीं ले रही है। उन्होंने सरकार से पटवारियों के साथ तत्काल बातचीत कर समाधान निकालने और किसानों के हितों की रक्षा करने की मांग की।
कौशल्या माता धाम में भगवान राम की नई मूर्ति स्थापित नहीं होने के मुद्दे पर भी दीपक बैज ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मूर्ति तैयार है, तो उसे अब तक स्थापित क्यों नहीं किया गया है। बैज ने दावा किया कि मूर्ति बदलने का निर्णय कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में लिया गया था और उसी दौरान मूर्ति तैयार कराई गई थी। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार को इस मामले में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और बताना चाहिए कि मूर्ति स्थापित करने में देरी क्यों हो रही है।
इस मुद्दे पर तंज कसते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि भाजपा भगवान राम और गौ माता के नाम पर राजनीति करती है। उन्होंने मंदिरों में चढ़ावे और दान के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए। बैज ने कहा कि सरकार को धार्मिक स्थलों से जुड़े मुद्दों पर राजनीति करने के बजाय लंबित कामों को पूरा करना चाहिए।
आदिवासी विभाग का नाम बदलकर जनजाति विभाग किए जाने के मुद्दे पर दीपक बैज ने राज्य सरकार के फैसले का विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आदिवासी समुदाय के हितों को नजरअंदाज कर रही है। बैज ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आदिवासी समाज की महत्वपूर्ण भूमिका है और राज्य की पहचान में जनजातीय समुदायों का विशेष स्थान है। ऐसे में विभाग के नाम में बदलाव को लेकर सरकार को अपनी मंशा स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार को आदिवासी समाज से जुड़ी पहचान को लेकर आपत्ति क्यों है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने इस निर्णय को तत्काल वापस लेने की मांग करते हुए सरकार पर आदिवासी विरोधी होने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में आदिवासी मुख्यमंत्री और मंत्री होने के बावजूद इस तरह का निर्णय लिया जाना चिंताजनक है। हालांकि, विभाग के नाम में बदलाव को लेकर सरकार का पक्ष और फैसले के पीछे का आधिकारिक तर्क भी सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
बिजली बिल को लेकर दीपक बैज ने दावा किया कि एक साल में दो बार बिजली की दरें बढ़ाई गई हैं। उन्होंने कहा कि इस बार कई उपभोक्ताओं के बिल में 600 से 1000 रुपये तक अतिरिक्त प्रभार जुड़कर आया है। इससे घरेलू उपभोक्ताओं और आम परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। बैज ने सरकार से बढ़े हुए बिजली बिलों की समीक्षा करने और उपभोक्ताओं को तत्काल राहत देने की मांग की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में कोयला और बिजली उत्पादन के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं, इसके बावजूद राज्य को दूसरे राज्यों से महंगी दरों पर बिजली खरीदनी पड़ रही है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने बिजली व्यवस्था और उत्पादन को लेकर सरकार से जवाब मांगा। उनका कहना है कि बिजली जैसी बुनियादी जरूरत की लागत बढ़ने से आम लोगों के मासिक खर्च पर सीधा असर पड़ता है। ऐसे में सरकार को बिजली दरों और अतिरिक्त प्रभार के मामले में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
दीपक बैज ने महंगाई, धान खरीदी, पटवारियों की हड़ताल, कौशल्या माता धाम में भगवान राम की मूर्ति स्थापित करने और आदिवासी विभाग के नाम में बदलाव जैसे मुद्दों को उठाकर राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सरकार से आम जनता को महंगाई से राहत देने, किसानों की धान खरीदी से जुड़ी समस्याओं का समाधान करने और विवादित फैसलों पर पुनर्विचार करने की मांग की।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के इन बयानों से राज्य की राजनीति में इन मुद्दों पर बहस तेज होने की संभावना है। वहीं, राशन और बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी, बस किराए तथा विभाग के नाम में बदलाव जैसे मामलों में संबंधित सरकारी आदेशों और आधिकारिक पक्ष के आधार पर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।