National DNA Day: डीएनए एविडेंस अदालत में निर्णायक साबित हो रहा है। हाल के वर्षों में सामने आए केस यह संकेत देते हैं कि पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया में वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग तेजी से बढ़ा है।
National DNA Day: @ताबीर हुसैन। बदलते दौर में क्राइम इन्वेस्टिगेशन में साइंस की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है। छत्तीसगढ़ में भी डीएनए टेस्टिंग अब जांच का अहम हिस्सा बन चुकी है, जो दुष्कर्म, हत्या और पहचान जैसे जटिल मामलों में सच्चाई तक पहुंचने का सबसे भरोसेमंद जरिया साबित हो रही है। हर साल 25 अप्रैल को राष्ट्रीय डीएनए दिवस मनाया जाता है।
कई मामलों में जहां गवाह कमजोर पड़ जाते हैं या बयान बदल जाते हैं, वहां डीएनए एविडेंस अदालत में निर्णायक साबित हो रहा है। हाल के वर्षों में सामने आए केस यह संकेत देते हैं कि पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया में वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग तेजी से बढ़ा है।
यौन शोषण के एक मामले में कोर्ट ने आरोपी और पीडि़ता के बच्चे का डीएनए टेस्ट कराने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि सच्चाई तक पहुंचने के लिए वैज्ञानिक जांच जरूरी है, खासकर तब जब पारंपरिक साक्ष्य पर्याप्त न हों। इस फैसले ने स्पष्ट किया कि डीएनए टेस्ट न केवल पितृत्व बल्कि आपराधिक मामलों में भी सटीकता का मजबूत आधार बन सकता है और जांच एजेंसियों के लिए मार्गदर्शक साबित होता है।
गैंगरेप के एक मामले में पीडि़ता ने घटना के काफी समय बाद डीएनए प्रोफाइलिंग की मांग की, लेकिन लंबी देरी के कारण कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने माना कि समय पर सैंपल न लिए जाने से वैज्ञानिक साक्ष्य कमजोर हो सकते हैं और उनकी विश्वसनीयता प्रभावित होती है। यह केस बताता है कि डीएनए जांच में टाइम फैक्टर बेहद अहम होता है और देरी न्याय प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।
मुंगेली जिले में 7 साल की बच्ची की हत्या के सनसनीखेज मामले में डीएनए जांच ने अहम भूमिका निभाई। बच्ची की पहचान सुनिश्चित करने और पूरे घटनाक्रम को स्पष्ट करने में यह रिपोर्ट निर्णायक साबित हुई। जांच में सामने आया कि घटना अंधविश्वास से जुड़ी थी।
शरीर से लिए गए सैंपल को फॉरेंसिक लैब में प्रोफाइल किया जाता है, फिर संदिग्ध के सैंपल से मिलान किया जाता है। रिपोर्ट आने में आमतौर पर कुछ सप्ताह लगते हैं, लेकिन गंभीर मामलों में प्रक्रिया तेज भी की जाती है।
फॉरेंसिक जांच में तकनीक ने पिछले 15-20 वर्षों में बड़ी छलांग लगाई है। पहले जहां केवल रक्त समूह के आधार पर पहचान होती थी, वहीं अब डीएनए जांच से व्यक्ति की सटीक पहचान संभव हो गई है, यहां तक कि कंकाल या हड्डियों के आधार पर भी। उन्होंने बताया कि राजधानी रायपुर के टिकरापारा स्थित राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला के अलावा छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में डीएनए टेस्टिंग होने लगी है।