नीट पीजी में माइनस 2 अंक लाने वाले छात्र को कोई सीट नहीं मिली है। प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में एमडी-एमएस कोर्स में प्रवेश लिए यह पंजीयन कराया गया था। शनिवार को चिकित्सा शिक्षा विभाग ने मापअप राउंड के लिए आवंटन सूची जारी कर दी। इसमें अपग्रेड समेत 337 छात्रों के नाम हैं। इसमें माइनस […]
नीट पीजी में माइनस 2 अंक लाने वाले छात्र को कोई सीट नहीं मिली है। प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में एमडी-एमएस कोर्स में प्रवेश लिए यह पंजीयन कराया गया था। शनिवार को चिकित्सा शिक्षा विभाग ने मापअप राउंड के लिए आवंटन सूची जारी कर दी। इसमें अपग्रेड समेत 337 छात्रों के नाम हैं। इसमें माइनस मार्किंग वाले छात्र का नाम नहीं है। हालांकि अगला स्ट्रे वेकेंसी राउंड का इंतजार करना होगा। नीट पीजी में 800 में 42 व 55 अंक वालों को फोरेंसिक मेडिसिन व फार्माकोलॉजी की सीटें मिली हैं। छात्र संबंधित मेडिकल कॉलेजों में 19 फरवरी तक प्रवेश ले सकेंगे। रविवार को भी एडमिशन प्रक्रिया जारी रहेगी।
मापअप राउंड में 174 छात्रों को फ्रेश अलाटमेंट किया गया है। 73 छात्रों का अपग्रेड किया गया है। उनकी सीट से लेकर कॉलेज भी बदला है। 90 छात्रों का अपग्रेडेशन नहीं हुआ है। माइनस 2 अंक वाले छात्र ने प्रदेश में पहली बार ऑनलाइन पंजीयन करवाया था। यह छात्र इनसर्विस कैटेगरी का है। यानी वह सरकारी अस्पताल में बतौर डॉक्टर सेवाएं दे रहा है। चूंकि उसने गवर्नमेंट कोटे का चयन किया है इसलिए किसी भी मेडिकल कॉलेज में सीट मिलने की संभावना कम है। निजी कोटा चयन किया होता तो कहीं न कहीं, नॉन क्लीनिकल विभाग में सीट मिल सकती थी।
55 अंक वाले छात्र को रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में फाेरेंसिक की सीट मिली है। वहीं, 42 अंक वाले छात्र को एक निजी कॉलेज में फार्माकोलॉजी की सीट आवंटित की गई है। प्रदेश के सरकारी व निजी मेडिकल कॉलेजों में एमडी-एमएस कोर्स की खाली 245 सीटें खाली हैं। प्रवेश के लिए 681 छात्र पात्र हैं। हालांकि मेरिट के अनुसार प्रवेश होगा। इस हिसाब से 436 छात्रों को प्रवेश नहीं मिल पाएगा।
तीन निजी मेडिकल कॉलेजों में एनआरआई कोटे की 39 सीटें हैं। इसके लिए 64 छात्रों ने ऑनलाइन पंजीयन करवाया है। पहले-दूसरे कंबाइंड राउंड में दो छात्राें ने प्रवेश लिया है। इसलिए मापअप राउंड के लिए 37 छात्रों का आवंटन किया गया है। इनमें नीट पीजी में 108 अंक वालों की सीट मिली है। हालांकि इसकी अधिकृत फीस 90 हजार यूएसए डॉलर सालाना है। पीजी तीन साल का कोर्स होता है इसलिए इसकी पूरी फीस 2.44 करोड़ रुपए से ज्यादा है। यानी इसमें काेई सामान्य परिवार का छात्र पीजी नहीं कर सकता। ज्यादातर छात्र बिजनेसमैन व डॉक्टर के बेटे या रिश्तेदार होते हैं। प्रदेश में स्पांसरशिप एनआरआई कोटा का नियम लागू है। इसके तहत दो पीढ़ी तक के रिश्तेदार इस कोटे के तहत एडमिशन ले सकते हैं।