
CG News: @ताबीर. कई बार किसी की खास रुचि उसकी पहचान बन जाती है। लोग नाम भी उसी आधार पर रख देते हैं। ऐसा ही हुआ रायपुर बोरियाखुर्द के परसराम साहू के साथ। पत्थरों के संग्रहण के कारण लोग उन्हें पथरा वाले गुरुजीकहने लगे। वे राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित सेवानिवृत्त शिक्षक हैं।
परसराम साहू के पास लगभग 200 प्रकार के पत्थरों का संग्रह है, जिनमें फॉसिल और कई बेशकीमती स्टोन शामिल हैं। इन पत्थरों को उन्होंने घर पर ही एक छोटे म्यूजियम का रूप दे दिया है। दूर-दराज से लोग इसे देखने आते हैं। हाल ही में एक एग्जीबिशन में उन्होंने इन पत्थरों को प्रदर्शित किया था।
छत्तीसगढ़ आने के बाद बस्तर सहित कई जगहों से उन्होंने पत्थर जुटाए। महाराष्ट्र, ओडिशा और मध्यप्रदेश में कई एग्जीबिशन लगा चुके हैं। बालोद, भिलाई और दुर्ग समेत विभिन्न स्थानों पर उन्हें सम्मान भी मिला है। साथ ही उन्होंने कई स्कूलों में प्रदर्शनी लगाकर बच्चों को पत्थरों की दुनिया से परिचित कराया है।
वे बताते हैं कि उनका जन्म छिंदवाड़ा में पेंच नदी के किनारे हुआ। बचपन में रोज नदी में नहाने जाते और रंग-बिरंगे पत्थर चुनकर घर ले आते। पिता अक्सर डांटते कि बेकार चीजें क्यों लाते हो, लेकिन यही आदत धीरे-धीरे जुनून बन गई। आगे चलकर उन्होंने क्रिस्टल, कटेला और अन्य दुर्लभ पत्थरों को भी संग्रहित करना शुरू किया।