
PM E-Bus Service: केंद्र सरकार की पीएम ई-बस सेवा के तहत राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ को कुल 2,362 ई-बसें मंजूर की गई हैं, लेकिन बसों के जमीन पर उतरने की रफ्तार अलग-अलग राज्यों में काफी धीमी है। राजस्थान में जहां 110 ई-बसें आठ शहरों तक पहुंच चुकी हैं, वहीं मध्यप्रदेश में भोपाल और इंदौर में 46 बसों का संचालन शुरू हो गया है। दूसरी ओर, छत्तीसगढ़ को मंजूर 240 ई-बसें अभी सड़कों पर उतरने का इंतजार कर रही हैं।
केंद्र के आधिकारिक आवंटन के अनुसार छत्तीसगढ़ के चार शहरों के लिए कुल 240 बसें मंजूर हैं। इनमें रायपुर को 100, दुर्ग-भिलाई को 50, बिलासपुर को 50 और कोरबा को 40 बसें मिलनी हैं। राज्य शासन की ओर से अब इन बसों के संचालन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए संबंधित निकायों को पत्र जारी किया गया है। चारों शहरों में डिपो, चार्जिंग स्टेशन और अन्य जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने का काम भी चल रहा है।
पीएम ई-बस सेवा के तहत राजस्थान को सबसे ज्यादा 1,150 बसें स्वीकृत हुई हैं। इनमें से अब तक 110 बसें आठ शहरों- जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, बीकानेर, भीलवाड़ा, अलवर और अजमेर-तक पहुंच चुकी हैं। 12 अगस्त को जयपुर में 16 नई पीएम ई-बसों को हरी झंडी दिखाई गई। इसके साथ ही राजस्थान में योजना के तहत बसों का संचालन लगातार बढ़ाया जा रहा है।
मध्यप्रदेश को पीएम ई-बस सेवा के तहत 972 बसें मंजूर हुई हैं। ये बसें भोपाल, इंदौर, जबलपुर, सागर, ग्वालियर, सतना, देवास और उज्जैन समेत आठ शहरों के लिए हैं। जुलाई के शहरवार अपडेट के अनुसार इंदौर में 36 और भोपाल में 10 ई-बसों का परिचालन शुरू हो चुका था। इंदौर में तीन और भोपाल में एक रूट पर बस सेवा शुरू की गई है। आने वाले समय में इनकी संख्या बढ़ाने की तैयारी है।
राजधानी रायपुर में 100 ई-बसें चलाने की तैयारी है। राज्य शासन ने नगर निगम को लेटर ऑफ ऑर्डर जारी कर दिया है। अब निगम की ओर से रूट सर्वे और कंडक्टरों की नियुक्ति के लिए निविदा प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। रायपुर के आउटर क्षेत्र हीरापुर-जरवाय में रिंग रोड-2 के पास करीब 5 एकड़ जमीन पर ई-बस डिपो तैयार किया जा रहा है। करीब 12 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इस डिपो में बसों के लिए चार्जिंग प्वाइंट समेत जरूरी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
ई-बसों के संचालन के लिए केंद्र सरकार का अहमदाबाद की कंपनी के साथ अनुबंध है। इसके तहत नगर निगम कंपनी को 62 रुपए प्रति किलोमीटर की दर से भुगतान करेगा। डिपो तैयार होने के बाद बसों के संचालन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अधिकारियों के मुताबिक डिपो को पूरी तरह तैयार होने में अभी करीब 5 से 6 महीने का समय लग सकता है।
दुर्ग-भिलाई क्षेत्र के लिए 50 ई-बसें मंजूर हैं। शासन की अनुमति के बाद दुर्ग जिला अर्बन सोसाइटी के स्तर पर संविदा प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। स्थानीय जानकारी के अनुसार भिलाई में ई-बस डिपो का काम करीब 90 फीसदी पूरा हो चुका है। अब बसों के संचालन से जुड़ी अन्य प्रक्रियाओं को पूरा किया जा रहा है।
बिलासपुर को 50 ई-बसें मिलनी हैं। इसके लिए कोनी स्थित सिटी बस डिपो में टर्मिनल तैयार किया जा रहा है। यहां बसों के लिए 13 चार्जिंग स्टेशन, वर्कशॉप और अन्य जरूरी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। डिपो और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर का काम अंतिम चरण में बताया जा रहा है। तैयारियां पूरी होने के बाद बसों के संचालन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
कोरबा के लिए 40 ई-बसें मंजूर की गई हैं। दर्री स्थित प्रतीक्षा बस स्टैंड में चार्जिंग सब-स्टेशन और टर्मिनल तैयार किया जा रहा है। स्थानीय निकाय के अनुसार तैयारी करीब 80 फीसदी तक पहुंच चुकी है। ई-बसों के संचालन के लिए करीब 20 रूटों का रूट चार्ट भी तैयार किया गया है।
केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार ई-बसों की डिलीवरी डिपो हैंडओवर होने के बाद चरणबद्ध तरीके से की जाती है। 100 फीसदी बसों की डिलीवरी के लिए टेंटेटिव टाइमलाइन करीब 30 सप्ताह तक बताई गई है। इस लिहाज से छत्तीसगढ़ में अब सबसे महत्वपूर्ण चरण डिपो का काम पूरा करना, उसे हैंडओवर करना, अनुबंध और अन्य औपचारिकताएं पूरी करना है। इसके बाद बसों की वास्तविक डिलीवरी शुरू हो सकेगी।
रायपुर में ई-बसों का इंतजार करीब दो साल से किया जा रहा है। पीएम ई-बस सेवा के तहत राजधानी के लिए 100 बसों की घोषणा के बाद अब राज्य शासन की ओर से लेटर ऑफ ऑर्डर जारी होने से प्रक्रिया आगे बढ़ी है।
ई-बसों के सड़कों पर आने से राजधानी में सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने और पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, बसों के वास्तविक संचालन के लिए अभी डिपो निर्माण, रूट सर्वे, कंडक्टर नियुक्ति और अन्य प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।