
रायपुर@ ताबीर हुसैन। School Bullying: स्कूल में दोस्तों के बीच हंसी-मजाक सामान्य बात है, लेकिन जब यही मजाक किसी बच्चे को बार-बार अपमानित करने, चिढ़ाने या समूह से अलग करने का जरिया बन जाए तो यह बुलिंग का रूप ले लेता है। आज बुलिंग सिर्फ क्लासरूम तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया पर तस्वीरों और वीडियो के जरिए अपमानित करना, ग्रुप में मजाक उड़ाना और ऑनलाइन धमकाना भी बच्चों के लिए परेशानी बन रहा है। कई बार बच्चे डर और शर्म के कारण इसकी शिकायत तक नहीं कर पाते। 5 नवंबर को स्कूलों में हिंसा और बुलिंग के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय दिवस पर बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा यह मुद्दा चर्चा में है।
बुलिंग सिर्फ मारपीट नहीं है। इसके चार प्रमुख रूप हैं। शारीरिक बुलिंग में मारना, धक्का देना और सामान छीनना शामिल है। मौखिक बुलिंग में गाली देना, चिढ़ाना और अपमानजनक नाम रखना आता है। सामाजिक बुलिंग में समूह से अलग करना, अफवाह फैलाना और बहिष्कार करना शामिल है। वहीं साइबर बुलिंग में सोशल मीडिया पर ट्रोल करना, आपत्तिजनक संदेश भेजना और तस्वीरों के जरिए अपमानित करना शामिल है।
केस 1 : मारपीट का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाला
अगस्त 2026 में रायपुर के स्वामी आत्मानंद स्कूल में नौवीं के एक छात्र के साथ सहपाठी की मारपीट का वीडियो वायरल हुआ। शिकायत के मुताबिक, घटना का वीडियो बनाकर रील के रूप में पोस्ट किया गया। पीडि़त परिवार ने स्कूल में शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया। परेशान होकर छात्र ने टीसी ले ली।
केस 2 : अंग्रेजी में सवाल पूछकर चिढ़ाया, फिर पीट-पीटकर मार डाला
जुलाई 2022 में रायपुर के भानपुरी में दसवीं का छात्र पूरक परीक्षा देने दूसरे स्कूल गया था। परीक्षा के बाद वहां के कुछ छात्रों ने अंग्रेजी में सवाल पूछकर उसे चिढ़ाया। विरोध करने पर उसे घेरकर लात-घूंसों से पीटा गया। गंभीर चोटों के कारण छात्र की मौत हो गई।
एससीईआरटी की रिपोर्ट
छत्तीसगढ़ एससीईआरटी की स्कूल छोडऩे के कारणों पर आधारित अध्ययन रिपोर्ट में रायपुर के विद्यार्थियों ने बताया कि साथी छोटे कद, वजन और रंग-रूप के आधार पर उन्हें छोटू, मोटू और बिल्ली जैसे नामों से चिढ़ाते थे। जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने की शिकायतें भी सामने आईं। रिपोर्ट में शिक्षकों की उदासीनता का भी उल्लेख किया गया था।
स्कूलों में बुलिंग रोकने के लिए हर कक्षा और सेक्शन में प्रतिनिधि नियुक्त करने की व्यवस्था की जाती है। उनके अध्यक्ष या प्रभारी का संपर्क नंबर विद्यार्थियों के साथ साझा किया जाता है। कई स्कूलों में गुमनाम शिकायत की सुविधा भी है, ताकि बच्चे बिना डर अपनी बात रख सकें। इसके अलावा साल में दो से तीन बार बुलिंग के खिलाफ जागरूकता कार्यक्रम और वर्कशॉप आयोजित की जाती हैं।
राजीव गुप्ता, अध्यक्ष प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन छत्तीसगढ़
डॉ. उषा किरण अग्रवाल, मनोवैज्ञानिक और प्राचार्य देवेंद्र नगर गर्ल्स कॉलेज के मुताबिक, बुलिंग का बच्चों के आत्मविश्वास और आत्मसम्मान पर सीधा असर पड़ता है। लगातार अपमानित होने या चिढ़ाए जाने से उनमें हीनभावना विकसित हो सकती है। ऐसे बच्चे कक्षा में सवाल पूछने, मंच पर बोलने और समूह गतिविधियों में भाग लेने से कतराने लगते हैं। इसका असर उनकी निर्णय लेने की क्षमता, नींद और पढ़ाई में एकाग्रता पर पड़ता है। कुछ बच्चे चिड़चिड़े, गुस्सैल या आक्रामक हो जाते हैं।