
SonSilli School Building News: छत्तीसगढ़ के ग्राम सोनसिल्ली में जर्जर स्कूल भवन को लेकर ग्रामीणों और विद्यार्थियों के विरोध के बाद विकास कार्यों की पहल हुई है। स्कूल परिसर में अतिरिक्त कक्ष सहित विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन किया गया। इससे विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं मिलने की उम्मीद जगी है। इससे पहले लगातार बारिश के बीच भवन की खराब स्थिति को लेकर ग्रामीणों और पालकों ने नाराजगी जताई थी। बच्चों की सुरक्षा की मांग करते हुए स्कूल में ताला भी लगाया गया था। अब ग्रामीणों की मांग है कि जर्जर भवन की समस्या का स्थायी समाधान कर नए भवन को जल्द स्वीकृति दी जाए।
ग्राम सोनसिल्ली के शासकीय प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक शाला के भवनों की स्थिति खराब होने के कारण ग्रामीणों, पालकों और विद्यार्थियों ने चिंता जताई थी। लगातार बारिश के बीच बच्चों की सुरक्षा को लेकर यह मुद्दा और गंभीर हो गया था। ग्रामीणों ने स्कूल भवन की जर्जर स्थिति के विरोध में स्कूल में ताला जड़ दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि बच्चों की सुरक्षा सबसे जरूरी है। ग्रामीणों की मांग थी कि पहले सुरक्षित भवन की व्यवस्था की जाए, इसके बाद ही नियमित पढ़ाई कराई जाए।
प्रदर्शन के बाद प्रशासन का ध्यान स्कूल भवन की समस्या की ओर गया। अधिकारियों ने जर्जर भवन को हटाने और नए भवन की स्वीकृति के लिए प्रस्ताव भेजने का आश्वासन दिया था। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े इस मामले में जल्द कार्रवाई होगी।
अब स्कूल परिसर में अतिरिक्त कक्ष सहित विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन किया गया है। इसे स्कूल में सुविधाएं बढ़ाने की दिशा में पहल माना जा रहा है। इन कार्यों से विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलने की उम्मीद है। हालांकि, विकास कार्यों का भूमिपूजन होने के बाद भी जर्जर भवन को लेकर ग्रामीणों की चिंता पूरी तरह दूर नहीं हुई है। नए भवन की स्वीकृति और पुराने भवन की समस्या के समाधान को लेकर स्थिति स्पष्ट होना अभी बाकी है।
ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल में विकास कार्यों के साथ बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी जरूरी है। उनकी मांग है कि निर्माण कार्य जल्द पूरे किए जाएं और जर्जर भवन की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए, ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित वातावरण में पढ़ाई करने का अवसर मिल सके। सोनसिल्ली के स्कूल भवन का मुद्दा सामने आने के बाद विकास कार्यों की पहल जरूर हुई है, लेकिन ग्रामीणों की नजर अब इस बात पर है कि बच्चों को सुरक्षित स्कूल भवन कब तक मिल पाएगा।