US-Israel-Iran War: दुनिया में चल रहे तनाव, खासकर ईरान से जुड़े घटनाक्रम, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर डाल रहे हैं और इसका प्रभाव भारत पर भी पड़ना तय है। उन्होंने कहा कि ईरान की ओर से ऑयल इंडस्ट्री पर हमले और समुद्री व्यापार मार्गों में रुकावट से वैश्विक सप्लाई प्रभावित हो रही है।
US-Israel-Iran War: @ Tabeer Hussain। देश-दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच ईरान से जुड़े हालात का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। जाने-माने अर्थशास्त्री प्रोफेसर अरुण कुमार ने रायपुर में कहा कि यदि यह टकराव जल्दी खत्म नहीं हुआ तो तेल आपूर्ति, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गंभीर दबाव पड़ेगा।
इसका असर भारत के टेक्सटाइल, एक्सपोर्ट पर पड़ सकता है। इससे महंगाई बढ़ने की आशंका रहेगी। वे राजधानी में रोटरी क्लब ऑफ रायपुर हेरिटेज की ओर से आयोजित व्याख्यान में शामिल होने आए थे। उन्होंने पत्रिका से खास बातचीत में डिजिटल अर्थव्यवस्था, एआई से रोजगार में बदलाव, नोटबंदी के बाद काले धन की स्थिति और भारत की जीडीपी ग्रोथ पर भी खुलकर अपनी राय रखी।
उन्होंने कहा कि दुनिया में चल रहे तनाव, खासकर ईरान से जुड़े घटनाक्रम, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर डाल रहे हैं और इसका प्रभाव भारत पर भी पड़ना तय है। उन्होंने कहा कि ईरान की ओर से ऑयल इंडस्ट्री पर हमले और समुद्री व्यापार मार्गों में रुकावट से वैश्विक सप्लाई प्रभावित हो रही है। जहां रोज करीब 100 जहाज गुजरते थे, वहां अब बहुत कम जहाज निकल पा रहे हैं। यदि यह स्थिति दो-तीन हफ्ते और बनी रही तो आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा कि तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल से रोजगार के स्वरूप में बड़ा बदलाव आ रहा है। बड़ी आईटी कंपनियां कर्मचारियों की संख्या कम कर रही हैं क्योंकि एआई के कारण काम की दक्षता बढ़ गई है। प्रोफेसर कुमार ने कहा कि पहले तकनीकी बदलाव से मुख्य रूप से मैनुअल लेबर प्रभावित होता था, लेकिन अब पहली बार स्किल्ड वर्कर्स भी प्रभावित हो रहे हैं। कॉल सेंटर और बीपीओ जैसे कई क्षेत्रों में भविष्य में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
नोटबंदी के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह ज्यादा सफल कदम साबित नहीं हुआ। काले धन का मतलब सिर्फ कैश नहीं होता। काली कमाई कई तरीकों से होती है, जैसे अंडर इनवॉइसिंग, ओवर इनवॉइसिंग या संपत्तियों के गलत मूल्यांकन के जरिए। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार लगभग 99.3 प्रतिशत नकदी वापस बैंकिंग सिस्टम में आ गई थी। इससे स्पष्ट है कि केवल नकदी हटाने से काले धन की अर्थव्यवस्था खत्म नहीं होती।
भारत की आर्थिक वृद्धि पर उन्होंने कहा कि देश में संगठित और असंगठित दो तरह की अर्थव्यवस्था है। संगठित क्षेत्र तो तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन असंगठित क्षेत्र लगातार कमजोर हो रहा है। उनके अनुसार नोटबंदी के बाद से औसत वास्तविक वृद्धि दर उतनी अधिक नहीं रही जितनी बताई जाती है। मांग का बड़ा हिस्सा असंगठित क्षेत्र से संगठित क्षेत्र में स्थानांतरित हो गया है, जिससे असमानता बढ़ने की स्थिति बन रही है।
व्याख्यान में प्रोफेसर कुमार ने देश की कृषि, मजदूरी और अर्थव्यवस्था से जुडे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि कृषि नीति में बदलाव, मजदूरों को बेहतर वेतन और किसानों व वर्कर्स के बीच गठजोड से ही अर्थव्यवस्था को संतुलन मिल सकता है। कुमार ने कहा कि देश में 23 फसलों के लिए मिनिमम सपोर्ट प्राइस घोषित होता है, लेकिन इसका प्रभावी क्रियान्वयन बहुत कम फसलों में होता है। गन्ना, गेहूं और धान जैसी फसलों में एमएसपी लागू होने से उनका उत्पादन बढ़ जाता है, जबकि अन्य फसलों का उत्पादन घट जाता है।
उन्होंने कहा कि किसानों और मजदूरों के बीच सहयोग बढ़ेगा तो मांग बढ़ेगी और इससे कृषि उत्पादों के दाम अपने आप सुधरने लगेंगे। साथ ही उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, रिसर्च और रोजगार के क्षेत्र में बड़े बदलाव की जरूरत भी बताई। व्याख्यान में रोटरी क्लब ऑफ रायपुर हेरिटेज के संयोजक, सनत जैन, अध्यक्ष पंकज शर्मा, पूर्व अध्यक्ष महेंद्र कश्यप, उप संयोजक राजेंद्र जैन, रविवि के प्रोफेसर आरके ब्रम्हे, एक्स ब्यूरोक्रेट्स सुशील त्रिवेदी, इंदिरा मिश्र, एसके मिश्रा के अलावा ललित सिंघानिया समेत बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी मौजूद रहे।