
रायपुर@पीलूराम साहू। World Trauma Day 2026: प्रदेश में रोजाना औसतन 19 व सालभर में 6700 से ज्यादा मौतें केवल सड़क दुघर्टना में हो रही हैं। इसकी मुख्य वजह अधूरे ट्रामा सेंटर हैं, जो बस नाम के है। गोल्डन पीरियड में अस्पताल नहीं पहुंचने के कारण आधे से ज्यादा गंभीर लोगों की मौतें हो रही हैं। प्रदेश में ट्रामा सेंटर का पूरा दबाव आंबेडकर अस्पताल व एम्स पर है। यही कारण है कि कई बार बेड खाली नहीं होने से भी इलाज प्रभावित होता है।
विश्व ट्रामा दिवस 17 अक्टूबर को है। प्रदेश में सड़क हादसों में मौतों का आंकड़ा हर साल बढ़ रहा है, लेकिन जीवन बचाने वाले ट्रॉमा केयर सेंटर आज भी कागजों व अधूरे निर्माण में उलझे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2024 में प्रदेश में 14,857 सड़क हादसे हुए, जिनमें 6944 लोगों की जान चली गई। ये आंकड़े 2012 के 3,165 मौतों से दोगुना से भी ज्यादा है।
स्थिति की गंभीरता इस बात से पता चलती है कि हाईकोर्ट में पेश डेटा के अनुसार 2023 की तुलना में 2024 में हादसे 10.28 फीसदी बढ़े और मौतें 9.50 फीसदी बढ़ीं। सरकार ने खुद विधानसभा में माना कि 2019 से 2024 के बीच 6 साल में 79,523 हादसों में 33,734 लोगों की मौत हुई और 70,255 घायल हुए।
कोरबा व सरगुजा जिले में कोयला परिवहन वाले डंपरों के कारण हादसे 25 से 42 फीसदी तक बढ़े हैं, लेकिन राजधानी रायपुर, दुर्ग, जांजगीर, सक्ती व मुंगेली में चिह्नित ब्लैक स्पॉट आज तक नहीं सुधरे हैं। प्रदेश में 848 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए, जिनमें से 790 पर ही सुधार कार्य हुआ है।
केंद्र की राष्ट्रीय योजना नेशनल प्रोग्राम फॉर प्रिवेंशन एंड मैनेजमेंट ऑफ ट्रॉमा एंड बर्न इंजरीज के तहत पूरे देश में 196 ट्रॉमा केयर मंजूर किया गया है, जिनमें से प्रदेश को सिर्फ 06 मिली हैं। इनमें आंबेडकर अस्पताल रायपुर लेवल-2 का निर्माण भी शुरू नहीं हुआ है इसके अलावा सिम्स बिलासपुर व जगदलपुर में भी लेवल-2 का ट्रामा सेंटर अधूरा है। कांकेर, रायगढ़ व अंबिकापुर में लेवल-3 का निर्माण अब तक शुरू नहीं हुआ है। केंद्र ने संसद में बताया कि पिछले तीन साल में राज्य सरकार ने इन केंद्रों के लिए कोई फंड यूटिलाइज नहीं किया है।
डॉक्टरों के मुताबिक सड़क हादसे में पहला एक घंटा गोल्डन ऑवर होता है। आंबेडकर अस्पताल में रोजाना 45 से 50 ट्रॉमा केस आते हैं। इनमें कई रेफरल होते हैं, जो दूसरे जिलों से भेजे जाते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि 108 एंबुलेंस सेवा व डॉयल 112 सेवा के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में मदद पहुंचने में देरी होती है।
डॉ. विवेक चौधरी, डीन नेहरू मेडिकल कॉलेज के मुताबिक, ट्रामा सेंटर लेवल-2 का निर्माण आने वाले दिनों में किया जाना है। इससे ट्रामा सेंटर बड़ा हो जाएगा और बेड की संख्या भी बढ़ेगी। सड़क दुर्घटना व अचानक बीमार होकर आने वाले मरीजों को बेहतर इलाज मिलने लगेगा। कई गंभीर दूसरे जिलों से भेजे जाते हैं।
डॉ. राजीव साहू, एचओडी न्यूरो सर्जरी डीकेएस अस्पताल के मुताबिक, सड़क दुघर्टना में ज्यादातर केस में सिर में चोट होती है। गोल्डन ऑवर यानी घटना के एक घंटे के भीतर मरीज अस्पताल पहुंच जाए तो इलाज का बेहतर रिजल्ट मिलता है। कई बार मरीज के अस्पताल पहुंचने में देरी होती है, जो मौत का कारण बनती है।