राजगढ़

Rajgarh News: ई-चालान की फर्जी लिंक खोलते ही शुरू हुई साइबर ठगी, 4 महीने में डेढ़ लाख रुपये गंवाए

E-Challan Scam: साइबर ठगी का नया तरीका, परिवहन विभाग के नाम से आए मैसेज की लिंक पर क्लिक करते ही दो क्रेडिट कार्ड से करीब डेढ़ लाख रुपये की ठगी।
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Updated: 6 Sep 2026, 10:30 PM IST
CYBER FRAUD
CYBER FRAUD- ग्वालियर में एआइ ट्रेडिंग के जरिए मुनाफे का झांसा देकर साइबर ठगी।प्रतीकात्मक तस्वीर (source-gemini)

राजगढ़ से राजेश विश्वकर्मा की रिपोर्ट
Rajgarh E-Challan Scam: मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले में एक बार फिर साइबर ठगी का मामला सामने आया है। इस बार शातिर ठग ने मोबाइल पर परिवहन विभाग के नाम से ई-चालान का मैसेज भेजा। वाहन से संबंधित मैसेज देखकर युवक ने उसे सामान्य समझते हुए लिंक पर क्लिक कर दिया। इसके बाद मोबाइल में ऐसी सेंध लगी कि साइबर ठगों को उसकी डिजिटल गतिविधियों तक की पहुंच मिल गई। ठगों ने करीब 4 महीनों में डेढ़ लाख रुपये की ठगी कर डाली। ठगी का पता तब चला, जब बैंक खाते में लेनदेन की जानकारी सामने आई। मामले में अब पुलिस ने एफआइआर दर्ज कर साइबर सेल की मदद से जांच शुरू की है।

मार्च-2026 में आया था चालान का मैसेज

फरियादी के अनुसार मार्च-2026 में मोबाइल पर राज्य परिवहन के नाम से एक हजार रुपए के चालान का मैसेज आया। वाहन से संबंधित मैसेज होने के कारण उन्होंने इसे सामान्य समझा और लिंक खोल दी। इसके बाद मोबाइल की गतिविधियों में संदिग्ध बदलाव होने लगे। फोन-पे और यूपीआई से संबंधित गतिविधियां भी प्रभावित रहीं। हालांकि उस समय इसे गंभीरता से नहीं लिया गया और मैसेज डिलीट करता चला गया।

सामने आया असली खेल

1 सितंबर को खाते में संदिग्ध भुगतान की जानकारी सामने आने पर फरियादी को संदेह हुआ। उन्होंने तत्काल बैंक से संपर्क कर खाता सीज कराया और साइबर सेल को सूचना दी। जांच में सामने आया कि दो क्रेडिट कार्ड से 45 हजार, 50 और 66 हजार रुपये की ठगी हुई है। करीब डेढ़ लाख रुपए के ट्रांजेक्शन किए गए हैं। बैंक ने आगे के नुकसान को रोकने के लिए कार्ड और खाते पर कार्रवाई की और उन्हें सीज कर दिया। साइबर हेल्पलाइन-1930 और जिला साइबर सेल पर भी शिकायत दर्ज कराई गई है।

वाहन से जुड़ा मैसेज होने से नहीं हुआ संदेह

फरियादी के अनुसार उनके पास वाहन रहता है और वाहन से संबंधित मैसेज पहले भी आते रहे हैं। मार्च में राजस्थान में शादी के सिलसिले में वाहन जाने के कारण भी उन्हें लगा कि संभवत: ऑनलाइन चालान की कोई सूचना हो सकती है। इसी वजह से मैसेज पर ज्यादा संदेह नहीं हुआ। बाद में पता चला कि लिंक खोलना ही परेशानी की शुरुआत बन गया।

Updated on:
6 Sep 2026, 10:30 PM IST
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