संबल योजना के पंजीयन का कोई दायरा नहीं
ब्यावरा. प्रधानमंत्री आवास पात्रता के हिसाब से दिए गए हैं, शासन ने जो बिंदू शहरी क्षेत्र में आवास के लिए तय किए हैं उसके हिसाब से साढ़े तीन सौ स्क्वेयर फीट के हिसाब से ही मकान बनाए जाना है। आवास का अलॉटमेंट शासन के सर्वे के आधार पर ही हुए हैं। वहीं, शासन की महत्ती संबल योजना में तमाम पंजीयन मर्जी से हुए हैं, शासन स्तर पर इसके लिए कोई दायरा तय नहीं किया गया है।
इन तमाम बिंदुओं पर अपनी गलती विभाग ने स्वीकारी है। हालांकि विभाग का दावा है कि वे तथ्यों के आधार पर कहीं गलत नहीं है, अब यदि हितग्राही ने ही गलत जानकारी देकर आवंटन करवाया है तो शासन अपने स्तर पर उनसे वसूली करेगा। संबल योजना में मुफ्त की बिजली (महज दो सौ रुपएमाह में) लेने वाले और पुराने बिल माफ करवाने वालों की संख्या भी काफी है, लेकिन इसके लिए जिला प्रशासन, नगर पालिका, जनपद और जिला पंचायत कहीं भी कोई दायरा तय नहीं है। चुनावी साल में शासन की ओर से ही यह नरमी बरती गई है।
...तो चुनाव के बाद बदल जाएंगे नियम
जानकारों की मानें तो आम आदमी को वोट समझने वाली राजनीतिक पार्टियां हर बार चुनावी प्रोपोगेंडा तैयार करती हैं। उसमें वे तमाम प्रलोभन भरी योजनाएं तैयार की जाती हैं, जिससे आम आदमी को डायवर्ट किया जा सके। इसके बाद जैसे ही सरकारें बनती हैं ये तमाम योजनाएं सामान्य हो जाती हैं। इन तमाम बिंदुओं पर कोई ध्यान नहीं देता और वर्तमान की सुविधा को देखकर आगे की सख्ती से दूर हो जाता है। फिलहाल यह भी तय नहीं है कि जिस संबल योजना को आधार बनाया जा रहा है वह बाद में भी रहेगी या नहीं या फिर बिजली कंपनी फिर से नये नियम तैयार कर लेगी यह भी सुनिश्चित नहीं है।
शहरों से ज्यादा बुरे हाल ग्रामीण क्षेत्रों के
योजनाओं का दुरुपयोग शहरी क्षेत्रों से ज्यादा गांवों में हुआ है। गांवों में कई नामी लोगों, बिल्डिंगधारियों को आवास मिले हैं, यह जानकारी सीईओ लेवल तक के अधिकारियों को है लेकिन कोई कुछ नहीं कर पाता। इसके अलावा पंच परमेश्वर योजना सहित अन्य योजनाओं की हकीकत से भी कोई अछूता नहीं है। कई ऐसे मस्टर मजदूर डायरी के माध्यम से सरपंच, सचिव और जीआरएस निकाल लेते हैं जिनके पात्र हितग्राही वहां रहते ही नहीं हैं।
सब नियमानुसार हुए आवंटित
आवास का चयन पात्रता के हिसाब से ही हुआ है। शासन के पैरामीटर्ससे ही अलॉट हुए हैं, अभी तक के जो आरोप लगे हैं वे निराधार हैं। जहां तक संबंल योजना की बात है तो उसके पंजीयन की घोषणा हितग्राही को खुद करना है, ऐसे में हम सख्ती नहीं कर सकते।
-इकरार अहमद, सीएमओ, नपा, ब्यावरा