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‘आपके मोबाइल पर अग्निवीर परीक्षा फॉर्म का OTP आया है’, राजगढ़ में अभ्यर्थी के वकील पिता के खाते से उड़ाए 1 लाख

Cyber Fraud: सोशल मीडिया ठगी के नए-नए तरीके, बेटा अग्निवीर का फॉर्म जमा करने के लिए गया था, वकील पिता के पास आया फोन- फॉर्म जमा करने के लिए आपके मोबाइल पर आया ओटीपी लगेगा।

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rajgarh

Cyber Fraud otp scam (AI IMAGE)

राजेश विश्वकर्मा

Rajgarh OTP Scam: साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अब पढ़े-लिखे लोग भी इसके झांसे में आ रहे हैं। खासकर अब साइबर ठग अपने काम का तरीका बदल रहे हैं। संबंधितो को भरोसे में लेने के लिए वे पहले एनालिसिस करते हैं कि आखिर किस काम में वे भरोसा कर ओटीपी दे देंगे, फिर उनके साथ ठगी कर लेते हैं। ताजा मामला मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले का है जहां एक वकील को साइबर ठगों ने अपना निशाना बनाया है। ठगों ने अग्निवीर परीक्षा के फॉर्म का ओटीपी बताकर वकील से ओटीपी लिया और खाते से 1 लाख रुपये उड़ा दिए।

अग्निवीर परीक्षा के आवेदन का ओटीपी बताकर ठगा

राजगढ़ के छापीहेड़ा निवासी एडवोकेट कमल उमठ के साथ एक लाख रुपए की ठगी हो गई। कमल उमठ जिला कोर्ट में वकील हैं, उन्होंने अपने साथ हुई ठगी की पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी है। एडवोकेट कमल उमठ ने पत्रिका को बताया कि मेरा बेटा अग्निवीर की तैयारी कर रहा है। इसके लिए होने वाली परीक्षा के लिए वह फॉर्म जमा करने गया था। इस बीच किसी का उसे कॉल आया और कहा कि इस फॉर्म को डालने के लिए आपका ओटीपी लगेगा, बच्चा भरोसे में आ गया। ठग ने कहा कि आपके नंबर पर तकनीकी दिक्कत आ रही है, यह ओटीपी अब आपके पिता के नंबर पर आएगा। बच्चा झांसे में आ गया और पिता से कहा कि पापा ऐसा ओटीपी आएगा। पिता को पहले से ही पता था कि बेटा ऐसी परीक्षा दे रहा है। इसी कारण वे भी भरोसे में आ गए और चार बार अलग-अलग ओटीपी दे दिए। जब राशि कटी तब उन्हें इसका पता चला।

चार बार ओटीपी लेकर उड़ाए एक लाख

एडवोकेट उमठ ने बताया कि मैंने बैंक से विवरण निकाला तब पता चला कि ठगी हो चुकी है। मैंने बैंक से गोल्ड लोन लिया था, गोल्ड जमा करने के बाद राशि को खाते में जमा करना था। वही राशि खाते में थी। जिसमें से एक लाख रुपए चार बार ओटीपी लेकर एक बार में 90 हजार, फिर 5 हजार और फिर 3 व 2 हजार रुपए निकाले गए। पहली बार में कहा कि ओटीपी दीजिए आवेदन कंफर्म होगा, फिर कहा कि फॉर्म अपडेट नहीं हो रहा है, एक ओटीपी और आएगा लेकिन ऐसे करते-करते उसने चार बार में राशि डलवा ली और अग्निवीर का फॉर्म भी उसका नहीं डल पाया।

पत्रिका व्यू- डिजिटल ट्रैकिंग और डेटा कलेक्शन से निजता पर बढ़ रही चिंता

सोशल मीडिया का जरूरत से ज्यादा उपयोग और लोकेशन, वॉइस और अन्य जरूरी अनुमतियां दे देने (अलॉव) कर देने के चलते हमारी निजता का उल्लंघन हो रहा है। यानी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स (मोबाइल, लैपटॉप, कम्प्यूटर, टैब इत्यादि) ऐसी संभावना है कि हमारी 24 घंटे की बातें सुन रहे हैं और समझ भी रहे हैं। यानी यदि हम किसी एक जरूरत की सामग्री को सर्च करते हैं तो सभी सोशल मीडिया साइट्स उसे ही दिखाना शुरू कर देते हैं। हमारी प्राइवेट कॉल में यदि किसी पर्टिकूलर ब्रांड का नाम या अन्य कोई बात कर देते हैं तो भी वही दिखना शुरू हो जाता है। यानी हमारी निजता सोशल मीडिया के माध्यम से अब निजता नहीं रही, बल्कि उसे हर कोई जान पा रहा है। इसके लिए जरूरी सावधानियों की जरूरत है। अनजान लिंक के साथ ही सभी प्रकार की अनुमतियां सोशल मीडिया ऐप को देने की जरूरत नहीं है।