राजसमंद. स्थापत्य एवं संगीत कला प्रेमी महाराणा कुंभा के अजेय दुर्ग कुंभलगढ़ में 18 वे कुंभलगढ़ महोत्सव का रंगारंग आगाज रविवार को हुआ। राजस्थान के विभिन्न जिलों से आए कलाकारों ने राजस्थान के विभिन्न प्रांतों की संस्कृति कला की छठा बिखरी नजर आई।
उद्घाटन के साथ ही पहले दिन सुबह 11 से दोपहर 3 बजे तक लोक कलाकारों की विभिन्न प्रस्तुतियां हुई।
समारोह का आगाज जोधपुर से आए लंगा पार्टी जीवन नाथ एवं पार्टी ने केसरिया बालम आवोनी पधारो म्हारे देश से किया। पर्यटन विभाग की उपनिदेशक शिखा सक्सेना ने बताया कि तीन दिनों तक चलने वाले इस फेस्टिवल में राजस्थानी झलक दिखाई देगी।
प्रथम दिन रविवार शाम को फेस्टिवल ग्राउंड में रत्ना दत्ता ग्रुप कि ओर से क्लासिकल आर्ट फोर्म में कत्थक, ओडिसी व भरतनाट्यम की प्रस्तुति दी गई।
कार्यक्रम में जैसे ही राजस्थानी घूमर नृत्य की प्रस्तुति हुई तो परिसर में मौजूद देसी- विदेशी महिला पर्यटकों ने भी कलाकारों के साथ खूब ठुमके लगाए।
इस दौरान बूंदी से कच्छी घोडी, अप्पा नाथ जोधपुर से कालबेलिया नृत्य, मीना देवी बाड़मेर से घूमर के साथ जीवन नाथ जोधपुर से मंगणियार कलाकार, आशा बाई बारा से चकरी नृत्य, गोपाल धानुक बारा से सहरिया नृत्य, तगाराम बाड़मेर से सफेद आंगी गैर नृत्य तथा चरी नृत्य सहित राजस्थान के प्रसिद्ध नृत्यों की प्रस्तुतियां हुई।
साफा बांधों प्रतियोगिता, रंगोली मांडना, रस्सा कशी सहित विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित हुई जिसमें विजेताओं को पर्यटन विभाग की ओर से पुरस्कृत किया गया।
इसके अलावा चित्तौड़ से आए कलाकारों ने बहरूपिया बनकर लोगों का मनोरंजन किया। महोत्सव में दूर-दराज क्षेत्रों से लोग आए। इस दौरान विदेशी पर्यटकों ने भी महोत्सव में उत्साह के साथ भागीदारी निभाई।