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राजस्थान: दो साल में TET पास नहीं की तो जाएगी नौकरी, न प्रमोशन मिलेगा और न वेतन वृद्धि

राजस्थान सहित देशभर के लाखों शिक्षकों के लिए अब ‘करो या मरो’ की स्थिति बन गई है। नौकरी बचाने और पदोन्नति पाने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य कर दी गई है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर केंद्र सरकार ने भी मुहर लगा दी है।

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MP TET Controversy

MP TET Controversy: शिक्षकों की नौकरी पर लटकी तलवार (पत्रिका फाइल फोटो)

राजसमंद: शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर लंबे समय से चली आ रही असमंजस की स्थिति अब समाप्त हो गई है। शिक्षा मंत्रालय ने संसद में साफ शब्दों में कहा है कि टीईटी केवल नई भर्ती के लिए ही नहीं, बल्कि सेवारत शिक्षकों की पदोन्नति के लिए भी अनिवार्य होगी।

लोकसभा में सोमवार को सांसद लालजी वर्मा द्वारा यह प्रश्न उठाया गया कि क्या वर्ष 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी के अभाव में अनिश्चितता और प्रशासनिक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है? साथ ही यह भी पूछा गया कि क्या सरकार उनके लिए कोई समान राष्ट्रीय नीति बनाकर टीईटी से पूर्ण छूट देने पर विचार कर रही है?

2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर भी लागू होंगी शर्तें

लोकसभा में स्पष्ट किया गया है कि वर्ष 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को भी अब टीईटी उत्तीर्ण करनी होगी। बिना टीईटी पास किए न तो पदोन्नति मिलेगी और न ही उच्च पदों का रास्ता खुलेगा।

मंत्रालय का स्पष्ट जवाब

शिक्षा मंत्रालय ने उत्तर में कहा कि निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम 2009 की धारा 23 के तहत राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने 23 अगस्त 2010 को अधिसूचना जारी कर कक्षा 1 से 8 तक शिक्षक बनने के लिए न्यूनतम योग्यता निर्धारित की थी, जिसमें टीईटी अनिवार्य है।

मंत्रालय ने यह भी बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने 1 सितंबर 2025 के अपने निर्णय में स्पष्ट किया है कि आरटीई अधिनियम के तहत आने वाले स्कूलों में शिक्षक नियुक्ति के लिए टीईटी न्यूनतम अनिवार्य योग्यता है। सरकार ने यह भी साफ कर दिया कि वर्ष 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को लेकर पूर्ण छूट देने की कोई नीति फिलहाल विचाराधीन नहीं है। कोर्ट के निर्देशों के अनुसार ही व्यवस्था लागू रहेगी।

यह है लागू व्यवस्था

  • जिन शिक्षकों की सेवा में 5 वर्ष से अधिक समय शेष है, उन्हें 1 सितंबर 2025 से दो वर्ष के भीतर टीईटी उत्तीर्ण करनी होगी। अन्यथा वे सेवा में बने नहीं रह सकेंगे।
  • जिन शिक्षकों की सेवा में 5 वर्ष से कम समय शेष है, उन्हें बिना टीईटी के सेवानिवृत्ति तक सेवा में बने रहने की अनुमति दी गई है।
  • हालांकि, ऐसे शिक्षक टीईटी पास किए बिना किसी भी स्थिति में पदोन्नति के पात्र नहीं होंगे।

मंत्रालय का दोहराव

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि शिक्षक के रूप में सीधी भर्ती ही नहीं, बल्कि पदोन्नति के माध्यम से नियुक्ति के लिए भी टीईटी अनिवार्य योग्यता है। इसे किसी भी स्तर पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

शिक्षा गुणवत्ता की दिशा में बड़ा कदम, पर पुराने शिक्षकों के लिए चुनौती

इस फैसले को शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। लेकिन इससे हजारों परिवारों की आजीविका पर प्रभाव पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है। शिक्षक संघ रेसटा के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर टीईटी से छूट देने की मांग की है। उनका कहना है कि वरिष्ठ शिक्षकों के लिए ओरिएंटेशन कोर्स की व्यवस्था की जाए, जिससे वे अद्यतन हो सकें और उनके प्रमोशन का रास्ता अवरुद्ध न हो।