राजसमंद

सफाई का स्मार्ट युग शुरू:अब कचरा गाड़ियों की रियल टाइम निगरानी,नौ और गाडि़यां नगरपरिषद को सौंपी

नगरपरिषद ने सफाई व्यवस्था को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है।

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RFID Project

राजसमंद. नगरपरिषद ने सफाई व्यवस्था को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। शहर में अब आरएफआईडी आधारित रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया गया है। इस अत्याधुनिक तकनीक की मदद से डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण करने वाली हर गाड़ी की ऑनलाइन ट्रैकिंग संभव हो जाएगी। अधिकारियों ने इसकी शुरुआत कर दी है और आने वाले दिनों में पूरा शहर इस व्यवस्था से जुड़ जाएगा।

कैसे काम करेगा यह स्मार्ट सिस्टम?

नई व्यवस्था के तहत:

  • हर कचरा संग्रहण गाड़ी में आरएफआईडी चिप लगाई जाएगी।
  • इसी तरह हर गली के लगभग 15 मकानों में से एक मकान पर चिप लगाई जाएगी।
  • जैसे ही गाड़ी उस गली से गुजरेगी, वहां लगी चिप को वह ऑटोमैटिक रीड कर लेगी।
  • तुरंत यह जानकारी ऑनलाइन रिपोर्ट के रूप में दर्ज हो जाएगी।

क्या होगा फायदा

इसका फायदा यह होगा कि अब यह देखना बेहद आसान हो जाएगा कि कौन सी गाड़ी कब और कहां गई, उसने वास्तव में कचरा उठाया या नहीं। पहले जहां सफाईकर्मियों और गाड़ियों पर निगरानी करना मुश्किल था, अब तकनीक के सहारे पूरा सिस्टम पारदर्शी बनेगा।

आरएफआईडी का तकनीकी पहलू

आरएफआईडी डिवाइस असल में छोटे-छोटे टैग होते हैं, जिन्हें मकानों या गाड़ियों पर लगाया जाता है। गाड़ी में लगे रीडर जब टैग के पास से गुजरते हैं, तो वह सिग्नल पकड़कर डेटा सर्वर पर भेज देता है। इस डेटा में समय, स्थान और गाड़ी की पहचान जैसी जानकारी दर्ज होती है। इससे अधिकारियों को तुरंत पता चल जाएगा कि किस गली से गाड़ी गुजरी और किस समय कचरा उठा। दरअसल, यह योजना पहले भी प्रस्तावित की गई थी। शहर के हर घर के बाहर ऐसे आरएफआईडी टैग लगाने का प्रावधान था ताकि मॉनिटरिंग पूरी तरह डिजिटल हो सके। लेकिन ठेका मिलने के महीनों बाद भी मशीनें और ट्रैकिंग सिस्टम समय पर शुरू नहीं हो पाए थे। अब जाकर इसे अमलीजामा पहनाया गया है।

गाड़ियों का बढ़ा बेड़ा

नगरपरिषद फिलहाल 14 गाड़ियों के जरिए कचरा उठाती थी। अब इसमें 9 नई गाड़ियां और जोड़ दी गई हैं। यानी अब कुल 23 गाड़ियां शहर की गलियों में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण करेंगी। प्रत्येक गाड़ी में ड्राइवर और एक हेल्पर मौजूद रहेगा। ड्राइवर का नाम, मोबाइल नंबर और गाड़ी का नंबर भी ऑनलाइन सिस्टम में दर्ज रहेगा। इससे न सिर्फ अधिकारियों को, बल्कि नागरिकों को भी जरूरत पड़ने पर जानकारी मिल सकेगी।

सिटीजन ऐप से सीधे जुड़ेंगे नागरिक

नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा आम नागरिकों को होगा। नगरपरिषद ने इसके लिए एक सिटीजन ऐप उपलब्ध कराया है। इसके जरिए लोग देख सकेंगे कि उनकी गली में गाड़ी कब आई, उसकी लोकेशन क्या है और किस समय कचरा संग्रहण हुआ। यह सुविधा नगरपरिषद और नागरिकों के बीच पारदर्शिता और विश्वास दोनों को मजबूत करेगी। इस एप के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज करा सकेंगे।

32 टन प्रतिदिन कचरा उठाने का लक्ष्य

राजसमंद शहर में इस समय 27 से 28 टन कचरा प्रतिदिन एकत्र किया जा रहा है। नगरपरिषद ने इसे बढ़ाकर 32 टन प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा है। अधिकारियों का मानना है कि नए आरएफआईडी सिस्टम से गाड़ियों की गति और कार्यक्षमता बढ़ेगी, जिससे यह लक्ष्य आसानी से पूरा किया जा सकेगा।

2500 मकानों पर लगेंगी चिप्स

जिला मुख्यालय में करीब 2500 मकानों पर आरएफआईडी चिप लगाने का काम शुरू हो गया है। जयपुर की एक फर्म को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। तय समय सीमा के अनुसार कंपनी को यह कार्य एक माह में पूरा करना होगा। इसके बाद पूरे सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से बाकी इलाकों में भी लागू किया जाएगा।

फायदे और चुनौतियां

यह व्यवस्था शहर को साफ-सुथरा बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

  • फायदे: पारदर्शी सिस्टम, जवाबदेही तय, नागरिकों का विश्वास बढ़ना, स्मार्ट सिटी की ओर कदम।
  • चुनौतियां: समय पर चिप इंस्टॉलेशन, तकनीकी गड़बड़ी, गाड़ियों का सुचारू संचालन और ऐप का सही उपयोग सुनिश्चित करना।
Published on:
31 Aug 2025 10:50 am
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