खमनोर. महाराणा प्रताप से जुड़े ऐतिहासिक गौरव के प्रतीक हल्दीघाटी और रक्ततलाई अब प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता में हैं। राजस्थान हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद गुरुवार को जिला कलक्टर अरुण कुमार हसीजा और पुलिस अधीक्षक ममता गुप्ता के नेतृत्व में 16 विभागों के प्रभारी अधिकारियों ने इन दोनों ऐतिहासिक स्थलों का व्यापक निरीक्षण किया। […]
खमनोर. महाराणा प्रताप से जुड़े ऐतिहासिक गौरव के प्रतीक हल्दीघाटी और रक्ततलाई अब प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता में हैं। राजस्थान हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद गुरुवार को जिला कलक्टर अरुण कुमार हसीजा और पुलिस अधीक्षक ममता गुप्ता के नेतृत्व में 16 विभागों के प्रभारी अधिकारियों ने इन दोनों ऐतिहासिक स्थलों का व्यापक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कलक्टर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इन स्थलों का संरक्षण, सुरक्षा, स्वच्छता और सुव्यवस्थित विकास किसी भी सूरत में नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
निरीक्षण की शुरुआत रक्ततलाई से हुई, जहां कलक्टर ने क्षेत्र की स्थिति का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने यहां विशेष अभियान चलाकर व्यापक और नियमित सफाई, पर्याप्त संख्या में डस्टबिन लगाने, तथा सीवरेज और वर्षा जल की स्थायी निकासी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही रक्ततलाई क्षेत्र में स्थित अनुपयोगी और जर्जर सरकारी भवनों को ध्वस्त करने, हर समय केयरटेकर की नियुक्ति, तथा आवश्यकता अनुसार फेंसिंग और रेलिंग लगाने के आदेश भी दिए गए। पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सुव्यवस्थित पार्किंग विकसित करने पर भी विशेष जोर दिया गया।
कलक्टर ने नाथद्वारा उपखंड अधिकारी, खमनोर पंचायत समिति के विकास अधिकारी, तहसीलदार और थानाधिकारी को निर्देश दिए कि कस्बे के भीतर से रक्ततलाई तक जाने वाले मार्ग पर सभी अवैध अतिक्रमण तत्काल हटाए जाएं। उन्होंने साफ कहा कि समझाइश के बावजूद यदि कोई दुकानदार सड़क पर सामान रखता है तो उसे जब्त किया जाए और मार्ग को नो-पार्किंग जोन घोषित किया जाए।
रक्ततलाई के बाद निरीक्षण दल हल्दीघाटी पहुंचा। यहां कलक्टर हसीजा ने सड़क किनारे रेलिंग लगाने, स्वच्छता के लिए डस्टबिन स्थापित करने, सुरक्षा कर्मियों की स्थायी तैनाती, तथा पर्यटकों के लिए पार्किंग सुविधा विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने मार्गदर्शन और जागरूकता के लिए साइन बोर्ड लगाने और पार्किंग जोन चिन्हित करने के भी आदेश दिए।
कलक्टर ने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में कहा कि उच्च न्यायालय के आदेशों की पूर्ण, प्रभावी और समयबद्ध अनुपालना सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि हल्दीघाटी और रक्ततलाई केवल ऐतिहासिक धरोहर ही नहीं, बल्कि जनभावनाओं से जुड़े स्थल हैं। इनका संरक्षण और सुव्यवस्थित विकास प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी विभागों के समन्वय से शीघ्र कार्रवाई कर अनुपालना रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत की जाएगी।
निरीक्षण दल में अतिरिक्त कलक्टर नरेश बुनकर, जिला परिषद सीईओ बृजमोहन बैरवा, उपवन संरक्षक आर.एन. भाकर, नाथद्वारा एसडीएम रक्षा पारिक, खमनोर बीडीओ हनुवीर सिंह, तहसीलदार सुरेश नाहर, थानाधिकारी नरेंद्रसिंह भाटी सहित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, डीएलआर, आरपीसीबी, एनएचएआई एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल रहे।अधिकारियों ने दोनों स्थलों की व्यवस्थाओं, साफ-सफाई, संरचनात्मक स्थिति और सुरक्षा इंतजामों की गहन समीक्षा की।
गौरतलब है कि हाल ही में मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टों के आधार पर राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर ने हल्दीघाटी और रक्ततलाई की दुर्दशा पर स्वतः संज्ञान लिया था। न्यायालय ने अतिक्रमण, खरपतवार, शराब की खाली बोतलें, क्षतिग्रस्त पाथवे, सीवरेज का पानी और शर्मसार करने वाली गतिविधियों को गंभीर मानते हुए जनहित याचिका दर्ज की थी और 16 विभागों को पक्षकार बनाया था। हाईकोर्ट ने सभी बिंदुओं पर शपथ पत्र सहित अनुपालना रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद प्रशासन अब पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है।