दीनदयाल अंत्योदय योजना (राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन) के तहत स्वरोजगार का सपना देख रहे स्ट्रीट वेडर्स के लिए अब सिर्फ चक्कर और परेशानियां ही बची हैं
राजसमंद. दीनदयाल अंत्योदय योजना (राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन) के तहत स्वरोजगार का सपना देख रहे स्ट्रीट वेडर्स के लिए अब सिर्फ चक्कर और परेशानियां ही बची हैं। इस योजना के तहत स्ट्रीट वेंडर्स को स्वरोजगार के लिए ऋण उपलब्ध कराया जाता था। पीएम स्वनिधि के तहत तो 10 हजार से शुरू होकर 50 हजार रुपए तक का लोन दिया जाता था, जिससे वे अपने छोटे-मोटे कारोबार को आगे बढ़ा सकें।
योजना में बदलाव के बाद से पोर्टल जनवरी से बंद पड़ा है, जिससे वेंडर्स को लोन नहीं मिल पा रहा है। नगर परिषद के चक्कर लगाकर थक चुके लोग अब बेबस और परेशान हैं।
ओमप्रकाश शर्मा कहते हैं कि दस हजार का लोन ले चुका हूं, अब 20 हजार का लेना है, लेकिन बैंक वाले कह रहे हैं कि पोर्टल बंद है। नारायण लाल भी कहते हैं कि दो-तीन बार आ चुका हूं लोन के लिए, लेकिन बार-बार पोर्टल बंद होने की बात होती है। इससे परेशान हूं।
अब जिनका पहला लोन पूरा हो गया है, वे नए लोन के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
सरकार ने नई योजना लॉन्च की है, लेकिन राजसमंद में यह अभी पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू है। अब तक शहर में इसका असर नहीं दिख रहा।
नगर परिषद आयुक्त बृजेश रॉय का कहना कि "यह योजना अभी पायलट प्रोजेक्ट के रूप में कुछ शहरों में शुरू हुई है। हमारे शहर में इसका संचालन अभी बाकी है।"