राजसमंद

राजस्थान के इस शहर में 192.37 लाख से बना यह भवन पड़ा वीरान

परिवहन विभाग : धूल फांक रहा ऑटोमैटिक डाइविंग ट्रेक, हवा से टूटी जालियां और उगी झांडिय़ा 192.73 लाख रुपए की लागत से बना भवन और ट्रेक, कम्प्यूटर और सेंसर लगने का इंतजार अभी तक नहीं हुआ लोकार्पण, परिवहन विभाग कार्यालय को शिफ्ट करने पर आमजन को मिलेगी सुविधा

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राजसमंद के गुर्जरों के गुढ़ा में बना ऑटोमैटिक ड्राइविंग ट्रेक

राजसमंद. परिवहन विभाग के लिए ऑटोमैटिक डाइविंग ट्रेक सफेद हाथी साबित हो रहा है। वहां पर अभी तक कम्प्यूटर और सेंसर तक नहीं लगे हैं, इसके कारण वहां पर बने हॉल और कमरे आदि खाली पड़े हैं। ट्रेक के खाली एरिया में झांडिय़ां उग आई है, जबकि हवा के चलते हॉल और वॉच टावर आदि की जालियां टूटने लग गई है। ट्रेक का अभी तक लोकार्पण तक नहीं हुआ है। परिवहन विभाग के दफ्तर को यहां पर शिफ्ट किया जाए तो आमजन को सुविधा मिल सकती है।
शहर के गुर्जरों का गुढ़ा में आरएसआरडीसी के माध्यम से परिवहन विभाग का ऑटोमैटिक ड्राइविंग ट्रेक बनवाया गया। यहां पर दो पहिया और चौपहिया वाहन चालकों का ऑटोमैटिक ड्राइविंग ट्रेस्ट होंगे। यहां पर लगने वाले सेंसर आदि से अपने आप ही ड्राइविंग ट्रेस्ट देने वाले के फेल-पास की जानकारी मिलेगी। इस पर 192.73 लाख रुपए खर्च हुए हैं। भवन और ट्रेक करीब एक साल पहले ही बनकर तैयार हो गया, लेकिन वहां पर कम्प्यूटर और सेंसर आदि नहीं लगे हैं, इसे ऑपरेट आदि कौन करेगा अभी तक यह भी फाइनल नहीं है। आरएसआरडीसी ने विभाग को सौंप भी दिया है, लेकिन यह सिर्फ शोपिस बनकर रह गया है। वर्तमान में यहां पर सुबह के समय वाहनों की ट्रॉयल होती है, इसके अलावा यह पूरा दिन बंद पड़ा रहता है। यहां पर दो गार्ड लगा रखे हैं। ड्राइविंग ट्रेक, वाचिंग टावर, कन्ट्रोल रूम और वेटिंग एरिया आदि बनाया गया है। इसकी सार-संभाल करना भी मुश्किल हो रहा है।

दफ्तर भी यहां हो सकता है शिफ्ट

जिला परिवहन विभाग का कार्यालय हाईवे पर रामेश्वर महादेव मंदिर के पास संचालित हो रहा है। ऑटोमैट्रिक ड्राइविंग ट्रेक गुर्जरों का गुढ़ा में बनाया गया है। ऐसे में अब दोनों जगह बिजली का बिल, देखभाल आदि की जिम्मेदारी के चलते विभाग पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है, जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। ऐसे में यदि परिवहन विभाग के दफ्तर को वहीं पर शिफ्ट कर दिया जाए तो दोनों काम हो सकते हैं। वहीं चिल्डन ट्रेफिक पार्क का निर्माण बिल्कुल अलग जावद स्थित सिद्धार्थ नगर में करवाया है। इसके कारण उसकी भी सार-संभाल भी नहीं हो पा रही है।

22 लाख में हुई चारदीवारी

परिवहन विभाग के ड्राइविंग ट्रेक निर्माण के दौरान उसकी चारदीवारी की तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया। ट्रेक रोड से करीब चार से पांच फीट ऊंचा बनाने के कारण पुरानी चारदीवारी दब गई थी। इसके पश्चात चारदीवारी के निर्माण के लिए बजट की मांग की गई। इस पर करीब 22 लाख रुपए की लागत से चारदीवारी का निर्माण करवाया गया है।

कच्चा रोड, 50 लाख का मांगा बजट

परिवहन विभाग का ट्रेक बनकर तैयार है, लेकिन बारिश में वहां तक पहुंचना युद्ध जीतने के समान है। स्थिति यह है कि वहां तक पहुंचने के लिए रोड तक नहीं है। रेत के कारण दोपहिया वाहनों के वहां तक पहुंचने में परेशानी होती है। बारिश के दौरान पानी भर जाता है। ऐसे में वहां तक पक्की रोड की दरकार है, आरएसआरडीसी ने इसके लिए 50 लाख का बजट मांगा था, लेकिन अभी तक उसका भी अता-पता नहीं है।

कम्प्यूटर और सेंसर के लिए बजट का इंतजार

ट्रेक बनकर तो तैयार हो गया है। वहां पर लगने वाले सेंसर, कम्प्यूटर एवं अन्य उपकरणों का बजट नहीं आया है। वर्तमान में वहां पर ट्रॉयल आदि होती है। कार्यालय को यहां शिफ्ट करने के आदेश पर ही इसे शिफ्ट किया जा सकता है।

  • डॉ. कल्पना शर्मा, जिला परिवहन अधिकारी राजसमंद
Updated on:
09 Jul 2024 11:34 am
Published on:
09 Jul 2024 11:30 am
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