रांची

उपचुनाव परिणाम के बाद भाजपा-आजसू पार्टी के बीच दरार,सुदेश महतो ने राज्य सरकार पर फोड़ा हार का ठिकरा!

आजसू पार्टी प्रमुख सुदेश महतो ने सिल्ली में अपनी हार का ठिकरा राज्य सरकार और नेताओं के सिर पर फोड़ा है..
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Updated: 1 Jun 2018, 6:03 PM IST
sudesh mahto file photo
sudesh mahto file photo

(रांची,1जून): झारखंड में सिल्ली और गोमिया विधानसभा उपचुनाव परिणाम के बाद सत्तारुढ़ राष्ट्रीय जनता दल (एनडीए) के दो प्रमुख दलों भाजपा और आजसू पार्टी के बीच दरार आ गई है । आजसू पार्टी प्रमुख सुदेश महतो ने सिल्ली में अपनी हार का ठिकरा राज्य सरकार और नेताओं के सिर पर फोड़ा है। उन्होंने चुनाव परिणाम के बाद देर शाम पत्रकारों से बातचीत में साफ कर दिया है कि वे मौजूदा गठबंधन पर विचार करेंगे।

सुदेश महतो के जीतने पर मुख्यमंत्री पर पड़ता दबाव

राजनीतिक हलकों में यह पहले से ही तय माना जा रहा था कि सिल्ली विधानसभा उपचुनाव का झारखंड की राजनीति पर दूरगामी असर पड़ेगा। यदि सुदेश महतो यहां से जीत भी जाते, तो उनके राजनीतिक कद को देखते हुए उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल करने का मुख्यमंत्री पर दबाव होता। वहीं सुदेश महता की हार की आशंका से यह भी तय माना जा रहा था कि इसका असर सेहत पर पड़ेगा।

वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के 37 विधायक चुनाव जीत कर आये थे, लेकिन बाद में झाविमो के छह विधायक भी भाजपा में शामिल हो गये, ऐसी स्थिति में 81 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए आवश्यक 41 की संख्या से अकेले ही भाजपा के पास दो सदस्य अधिक है। वहीं आजसू पार्टी के चार सदस्यों भी एनडीए सरकार में शामिल है और आजसू पार्टी के वरिष्ठ नेता चंद्रप्रकाश चौधरी को मंत्री पद भी दिया गया है। ऐसी स्थिति में यदि आजसू पार्टी यदि गठबंधन और सरकार से अलग होने का निर्णय लेती है, तो मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी को पद छोड़ना पड़ेगा। हालांकि इससे पहले भी जब मधु कोड़ा के नेतृत्व में यूपीए सरकार का गठन का हुआ था, तब आजसू पार्टी प्रमुख सुदेश महतो के कहने के बावजूद चंद्रप्रकाश चौधरी ने पद छोड़ने से इंकार कर दिया था और वे कांग्रेस,झामुमो व राजद समर्थित मधु कोड़ा सरकार में शामिल रहे थे।

परंतु इस उपचुनाव के बाद राजनीतिक परिस्थिति थोड़ी बदली है। सिल्ली में जहां पार्टी प्रमुख सुदेश महतो को हार का सामना करना पड़ा, वहीं गोमिया उपचुनाव को मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी ने प्रतिष्ठा का विषय बना लिया था, इस सीट पर उनके आप्त सचिव रहे लंबोदर महतो झारखंड प्रशासनिक सेवा से वीआरएस लेकर लड़ रहे थे। चंद्रप्रकाश चौधरी ने लंबोदर महतो की जीत सुनिश्चित कराने में अपनी पूरी ताकत झोंक दी, नामांकन से लेकर चुनाव प्रचार समाप्त होने तक वे गोमिया में लंबोदर महतो की जीत सुनिश्चित कराने के प्रयास में जुटे रहे, लेकिन परिणाम अपेक्षित नहीं आया, यहां भाजपा-आजसू पार्टी के बीच दोस्तांना संघर्ष हुआ।

चुनावी नतीजों से झारखंड की राजनीति पर पड़ सकता है प्रभाव

भाजपा के माधवलाल सिंह को करीब 40 हजार वोट आये, जबकि आजसू पार्टी उम्मीदवार को महज 1300 वोट से हार का सामना करना पड़ा, इस कारण चंद्रप्रकाश चौधरी भी भाजपा नेताओं से खासे नाराज है। आने वाले समय में इसका क्या असर पड़ेगा, इस संबंध में कुछ कहना जल्दबाजी होगा, लेकिन यह निश्चित है कि उपचुनाव का झारखंड की राजनीति पर दूरगामी असर पड़ेगा।

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