
रवि सिन्हा की रिपोर्ट...
(रांची): झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक पर राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने की खबरों पर सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने शनिवार को रांची में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि कहा कि यह झारखंड राज्य के लिये अच्छे संकेत नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि इस बिल को राष्ट्रपति से मंजूरी मिल गयी है, तो राज्य सरकार बिना शर्त्त इसे वापस ले। उन्होंने कहा कि जिस तरह से सीएनटी-एसपीटी एक्ट संशोधन बिल को वापस लिया गया था, उसी तरह से इस मामले में भी कदम उठाना चाहिए।
हेमंत सोरेन ने कहा कि इस बिल के प्रभावी हो जाने से झारखंड के आदिवासियों का जल, जंगल,जमीन का दोहन होगा और ये बिल सिर्फ अमीरों और उद्योगपतियों के लिये ही पास हुआ है। जिससे वे राज्य की जमीन पर कब्जा जमा सके और खेत-खलिहान की जगह सिर्फ अपार्टमेंट दिखाई देंगे और यहां के किसान की स्थिति कमजोर होती जाएगी।
बिल वापस नहीं लेने पर करेंगे आंदोलन
अगर सरकार इस बिल को वापस नही लेती है। तो उनकी पार्टी तमाम विपक्षी दलों समेत राज्यहित में काम कर रहे सभी समाजिक संगठनों के साथ मिलकर इस संशोधन विधयेक के खिलाफ वैसा ही आंदोलन करेगी जैसा राज्य निर्माण के आंदोलन के दौरान हुआ था। यह विषय राज्य की अस्मिता और पहचान से जुड़ा हुआ है। ऐसे में राज्य के भाजपा, और आजसू के विधायकों से भी अपील है कि वे राज्य हित में एकजुट हों और गरीबों और किसानों को उजाड़ कर उद्योगपतियों को बसाने एवम भूमाफियों सरंक्षण देने की सरकार की कोशिशों को नाकाम करें।
हेमंत सोरेन ने बताया कि राज्य के सभी राजनीति दलों एवं समाजिक संगठनों की 18 जून को रांची में बैठक बुलाई है। इस बैठक के बाद आगामी आंदोलनात्मक कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की जाएगी।