रतलाम

नागों के राजा तक्षक का तक्षकेश्वर मंदिर, पूर्णिमा पर लगता यहां मेला

Aug 15, 2026
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datia news (भाई ने की भाई की हत्या Photo Source- Patrika)

-नाग पंचमी पर तक्षकेश्वर महादेव तीर्थ में श्रद्धालु लेंगे दर्शन लाभ

एमएन-

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हरिकृष्ण मरमट

भानपुरा।

तहसील क्षेत्र के पठार क्षेत्र में प्राकृतिक सौंदर्य के बीच स्थित नागों के राजा तक्षक का तक्षकेश्वर मंदिर जिले का ही नहीं प्रदेश व देश का जाना पहचाना मंदिर है। यह स्थान प्राकृतिक सौंदर्य से आच्छादित पूर्ण रूप से समृद्धशाली होकर सुंदरता बटोरे हुए हैं। तक्षकेश्वर मंदिर भानपुरा गांधीसागर मुख्य मार्ग से ग्राम नावली होते हुए हिंगलाजगढ़ रोड से वन क्षेत्र में स्थित है। इस प्राकृतिक सौंदर्य वाले स्थान पर हर मौसम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं सहित पर्यटकों का आवागमन लगा रहता है। क्षेत्रीय लोग इसे ताखा जी मंदिर के रूप में भी जानते हैं। यहां नागराज तक्षक की प्रतिमा पत्नी व पुत्र के साथ मौजूद है। उनके एक हाथ में मानव सिर को दिखाया गया है। यह 12 वीं सदी की होना बताई जाती है। इसी प्रकार तक्षक प्रतिमा के सामने ही भगवान धन्वंतरि की प्रतिमा भी यहां स्थापित है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार वैशाख माह की पूर्णिमा को यहां प्रतिवर्ष एक मेला आयोजित होता है।

यह यह इतिहास

राजा परीक्षित को मिले नागों के राजा तक्षक द्वारा उसे डसे जाने की श्राप के बाद उन्हें भगवान धन्वंतरि को बुलावा भेजा। ताकि तक्षक के जहर का तोड़ निकाला जा सके। सूचना पर धनवंतरी परीक्षित से मिलने जा रहे थे। तभी यह बात तक्षक को पता चली और वह चिंतित हो गए कि यदि धनवंतरी ने उन्हें दवा बता दी तो श्राप निष्फल हो जाएगा। इसी पर उन्होंने तरकीब सोची और लकड़ी बनाकर उनके मार्ग में आ गिरी। तभी धन्वंतरि की पीठ में खुजली हुई और उन्होंने इस लकड़ी को उठाकर पीठ पर खुजाल लिया। इस पर तक्षक ने फौरन ही नाग का स्वरूप रच उन्हें डस लिया। कहा जाता है कि जिस स्थान पर तक्षक ने धनवंतरी को डसा था यह वही स्थान है। जिसे अब तक्षकेश्वर मंदिर के नाम से जाना जाता है। बाद में ईश्वरीय कृपा से धनवंतरी ठीक हुए और इस स्थान को तक्षकेश्वर नाम दिया गया। यहां कई प्रजाति के नाग अक्सर ही देखने को मिलते हैं। हालांकि सावधानी बरतने पर यह किसी को नुकसान नहीं पहुंचते।



पुराणों में इसका महत्व बताया
तक्षकेश्वर मंदिर के पास ही एक कुंड व प्राकृतिक झरना स्थित है। जिसे ताखा जी कुंड कहते हैं। पुराणों में इसका काफी महत्व बताया गया है। मां गंगा के समान फल देने वाला यह कुंड अपने आप में कई रहस्य छिपाए हुए हैं। इसकी गहराई आज तक कोई पता नहीं कर पाया साथ ही कितनी भी भीषण गर्मी हो इसमें कभी पानी की कमी नहीं होती इसके आसपास का प्राकृतिक आकर्षक सौंदर्य देखते ही बनता है। नाग पंचमी के अवसर पर भानपुरा गांधीसागर मुख्य मार्ग पर स्थित नाग का चबूतरा स्थान पर भी श्रद्धालु पहुंचकर पूजा अर्चना कर दर्शन लाभ लेंगे।

Updated on:
15 Aug 2026 06:02 am
Published on:
15 Aug 2026 06:02 am