
हय्मन एंगल का लोगो रहेगा
आशीष पाठक
रतलाम। सपने देखने के लिए न बड़ा शहर चाहिए, न घर में दौलत का अंबार। जरूरत होती है तो बस आंखों में एक मंजिल और उसे पाने का हौसला। जिले के अंचल से ऐसे ही संघर्ष और सफलता की कई कहानियां सामने आई हैं। री-नीट 2026 के परिणाम और प्रथम चरण की काउंसलिंग में चयनित इन विद्यार्थियों ने साबित कर दिया कि आर्थिक तंगी, मजदूरी, गैराज की नौकरी या शारीरिक अक्षमता भी मजबूत इरादों के सामने छोटी पड़ जाती है। किसी के पिता मजदूरी करते हैं, किसी के पिता छोटी गुमटी में गैराज चलाते हैं, तो किसी विद्यार्थी ने खुद मेडिकल स्टोर पर काम करते हुए डॉक्टर बनने का सपना देखा। इन बच्चों में से अधिकांश में से किसी ने अपने भाई या बहन को वादा किया था, वो डॉक्टर बनकर दिखाएंगे।
मजदूर बेटी ने पाया भोपाल मेडिकल कॉलेज
फोटो-आरटी-2808-प्रेमलता पंवार
प्रेमलता पवार के पिता मजदूरी करते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। प्रेमलता रतलाम के साइंस एंड आर्ट्स कॉलेज में बीएससी की पढ़ाई कर रही थीं। इसी दौरान उन्हें अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने एक साल तक पूरी लगन से तैयारी की और नीट-2026 में सफलता हासिल की। प्रथम चरण की काउंसलिंग में उन्हें जीएमसी भोपाल में प्रवेश मिला। परिवार के संघर्षों के बीच यह सफलता किसी सपने के सच होने से कम नहीं है।
गेराज में काम करते पिता, बेटे ने हासिल की मेडिकल सीट
फोटो-आरटी-2807-पुष्कर कनोजिया
पुष्कर कनौजिया के पिता जितेंद्र कनौजिया रेलवे अस्पताल के पास छोटी सी गुमटी में गेराज का काम करते हैं। सीमित साधनों के बावजूद पुष्कर ने पढ़ाई के लिए कोई समझौता नहीं किया। मेहनत का परिणाम आया तो नीट-2026 के प्रथम राउंड की काउंसलिंग में उन्हें ईएसआईसी गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, इंदौर में सीट मिल गई।
बेकरी कर्मचारी की बेटी बनेगी डॉक्टर
फोटो-आरटी-2806-सिमरन अब्बासी
सिमरन अब्बासी के पिता अब्दुल शब्बीर काटजू नगर स्थित एक बेकरी में काम करते हैं। पिता का सपना था कि बेटी खूब पढ़े और परिवार का नाम रोशन करे। सिमरन ने अभ्यास को अपनी तैयारी का माध्यम बनाया और नीट-2026 में सफलता हासिल कर प्रथम चरण की काउंसलिंग में अमलतास मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाया।
मेडिकल स्टोर से मेडिकल कॉलेज तक का सफर
फोटो-आरटी-2805-निर्मल कुमावत
नामली के निर्मल कुमावत स्वयं मेडिकल स्टोर पर काम करते थे। आर्थिक परिस्थितियां आसान नहीं थीं, लेकिन मन में डॉक्टर बनने का विचार आया। किसी परिचित से रतलाम में अभ्यास कोचिंग की जानकारी मिली। एक वर्ष की मेहनत के बाद नीट-2026 में सफल हुए और प्रथम चरण की काउंसलिंग में जीएमसी नीमच में सीट हासिल की।
हिंदी माध्यम के अर्जुन ने रचा इतिहास
फोटो-आरटी-2804-अर्जुन पाटीदार
धामनोद गांव के किसान परिवार से आने वाले अर्जुन पाटीदार ने उत्कृष्ट विद्यालय रतलाम से 12वीं की पढ़ाई पूरी की। हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने वाले अर्जुन ने अपने पहले ही प्रयास में नीट-2026 पास किया और जीएमसी रतलाम में प्रवेश पाया।
पहले प्रयास में सफलता
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पूजा चौहान के पिता मजदूरी करते हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कठिन है। पूजा ने अपने पहले प्रयास में नीट परीक्षा पास कर प्रथम चरण की काउंसलिंग में रतलाम मेडिकल कॉलेज में जगह बनाई।
कमजोरी बनी हिम्मत
फोटो-आरटी-2802-अरशान अली
हाथ से दिव्यांग अरशान अली ने भी अपनी शारीरिक कमजोरी को कभी अपनी मंजिल के बीच नहीं आने दिया। आर्थिक परेशानियों के बावजूद डॉक्टर बनने का सपना देखा और अभ्यास में मेहनत की। नीट-2026 की प्रथम चरण की काउंसलिंग में उन्हें मंदसौर मेडिकल कॉलेज मिला।
आंखों में बड़े सपने पलते
फोटो-आरटी-2809-डॉ राकेश कुमावत, डायरेक्टर, अभ्यास कॅरियर इंस्टीट्यूट
इन विद्यार्थियों की कहानियां केवल नीट में सफलता की खबर नहीं हैं, बल्कि उन परिवारों के संघर्ष की तस्वीर हैं, जहां सीमित साधनों के बावजूद बच्चों की आंखों में बड़े सपने पलते हैं। इनकी सफलता यह संदेश देती है कि हालात चाहे कितने भी कठिन हों, हौसला और मेहनत साथ हो तो मंजिल तक पहुंचने का रास्ता जरूर निकल आता है। असल में यह बच्चे उनके लिए प्रेरणा है, जो थोड़ी सी असफलता में जिंदगी से खिलवाड़ का कदम उठाते है।
-डॉ राकेश कुमावत, डायरेक्टर, अभ्यास कॅरियर इंस्टीट्यूट