Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि भगवान शिव की आराधना का पावन पर्व है, लेकिन व्रत के दौरान मासिक धर्म शुरू हो जाए तो कई महिलाओं के मन में संकल्प और पूजा को लेकर सवाल उठते हैं।क्या यह शास्त्रों का नियम है या केवल परंपरागत मान्यता बदलते समय में इन विषयों पर स्पष्ट और संतुलित चर्चा जरूरी है।
Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि का व्रत श्रद्धा, संयम और दृढ़ संकल्प का प्रतीक माना जाता है। इस दिन भक्त पूरे विश्वास के साथ उपवास और पूजा का नियम लेते हैं, लेकिन यदि व्रत के दौरान किसी महिला को पीरियड्स शुरू हो जाएं तो मन में असमंजस पैदा होना स्वाभाविक है क्या संकल्प भंग हो जाएगा? क्या पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलेगा? दरअसल, इस विषय को लेकर शास्त्रों, परंपराओं और वर्तमान सामाजिक सोच में अलग-अलग दृष्टिकोण देखने को मिलते हैं। ऐसे में आवश्यक है कि भ्रम से दूर रहकर सही जानकारी समझी जाए, ताकि आस्था, स्वास्थ्य और मन की शांति तीनों का संतुलन बना रहे।
सालों से यह धारणा चली आ रही है कि मासिक धर्म के दौरान महिलाएं “अशुद्ध” मानी जाती हैं और उन्हें पूजा-पाठ या मंदिर जाने से रोका जाता है। लेकिन यदि धर्मग्रंथों को गहराई से देखा जाए तो कहीं भी स्पष्ट रूप से यह नहीं कहा गया कि स्त्री अपवित्र है।पुराने समय में महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान विश्राम देने की परंपरा थी। उस दौर में स्वच्छता के साधन सीमित थे और शारीरिक असुविधा अधिक होती थी। हार्मोनल बदलाव, पेट और कमर दर्द के कारण शरीर कमजोर महसूस करता है। ऐसे में उन्हें घरेलू काम और धार्मिक अनुष्ठानों से दूर रखकर आराम दिया जाता था।समय के साथ यह परंपरा कठोर नियम में बदल गई और इसे “अशुद्धता” से जोड़ दिया गया। जबकि सच्चाई यह है कि स्त्री स्वयं शक्ति का स्वरूप मानी जाती है। जहां शक्ति है, वहां अपवित्रता का प्रश्न ही नहीं उठता।
यदि आपने महाशिवरात्रि का व्रत रखा है और उसी दौरान मासिक धर्म शुरू हो जाता है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आपका संकल्प केवल शारीरिक कर्मकांड से नहीं, बल्कि श्रद्धा और भावना से जुड़ा होता है।
महाशिवरात्रि व्रत के दौरान यदि पीरियड्स शुरू हो जाएं तो घबराने की आवश्यकता नहीं है और न ही व्रत को बीच में छोड़ना जरूरी है। ऐसी स्थिति में स्वयं विधि-विधान से पूजा करने के बजाय घर के किसी अन्य सदस्य से पूजा संपन्न करवाई जा सकती है।इस दौरान मानसिक रूप से भगवान शिव का स्मरण, मंत्र जाप और ध्यान करना श्रेष्ठ माना जाता है। साथ ही परंपरागत मान्यताओं के अनुसार मासिक धर्म के समय पूजा सामग्री और वेदी को स्पर्श करने से परहेज रखना चाहिए।