सागर

मनमाने दामों पर बिक रहीं निजी स्कूलों की पुस्तकें, दुकानें की हैं चिंहित

जिम्मेदार अधिकारी नहीं दे रहे ध्यान, नर्सरी की कॉपी और पुस्तक भी मिल रहीं डेढ़ हजार रुपए में

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Apr 11, 2025
बोरी में भरकर पुस्तकें ले जाते हुए अभिभावक

बीना. निजी स्कूलों की मनमर्जी पर रोक न लगने से अभिभावकों महंगे दामों पर पुस्तक, गणवेश खरीदनी पड़ रही हैं। नर्सरी, एलकेजी की पुस्तक, कॉपी का सेट हजारों रुपए में लेना पड़ रहा है और इसके बाद भी शिक्षा विभाग के अधिकारी अंजान बने हुए हैं। जबकि प्रवेश शुरू हो चुके हैं और पुस्तक, गणवेश की बिक्री जोरों पर चल रही है।
कलेक्टर ने आदेश दिया था कि एक दुकान पुस्तक और गणवेश बिक्री के लिए निजी स्कूल चिंहित न करें, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। शहर के बड़े स्कूल चिंहित दुकानों पर ही पुस्तक, गणवेश रख रहे हैं और अभिभावकों को स्कूल प्रबंधन ही बताता है कि कहां से पुस्तक लेना है। एक अभिभावक ने बताया कि एलकेजी और कक्षा ३ की पुस्तक व कॉपी छह हजार रुपए में मिली हैं। पहले कॉपी पर कुछ रियायत दी जाती थी, लेकिन कुछ स्टेशनरी संचालक प्रिंट रेट पर ही कॉपी दे रहे हैं। स्टेशनरी संचालकों का कहना है कि उन्हें पुस्तक पर कोई लाभ नहीं दिया जाता है। इसी तरह स्कूल की गणवेश भी मनमाने दामों पर ही मिल रही है।

अभिभावकों की मांग, कलेक्टर दें ध्यान
अभिभावकों का कहना है कि इस ओर कलेक्टर को ध्यान देने की जरूरत है, जिससे उन्हें कुछ रियायत मिल सके और बच्चों को पढ़ाने में परेशानी न हो। कई जगह पुस्तक मेला भी लग रहे हैं, लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं है। जबकि करीब पचास निजी स्कूल संचालित हो रहे हैं। पालक संघ स्कूलों में प्रवेश शुरू होने के पहले ही अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर स्कूल संचालकों की मनमर्जी पर रोक लगाने की मांग की थी, लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों की लेंगे बैठक
इस संबंध में बीइओ, बीआरसीसी के साथ बैठक कर चर्चा की जाएगी और दिशा-निर्देश दिए जाएंगे, जिससे अभिभावकों को परेशानी न हो।
विजय डेहरिया, एसडीएम, बीना

Published on:
11 Apr 2025 12:15 pm
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