
सागर. सरकारी अस्पतालों में बुजुर्ग मरीज लंबी-लंबी लाइनों में धक्के खा रहे हैं। बुढ़ापे की बीमारियों से ग्रसित मरीज जब अस्पताल पहुंचता है तो ओपीडी की लाइन से लेकर इलाज और दवाएं लेने में पूरा दिन बीत जाता है। सरकारी अस्पतालों में वृद्ध के लिए न अलग से कोई वार्ड है और ना ही डिपोर्टमेंट। शासन ने 15 साल पहले अस्पतालों में मरीजों को गाइड करने वाले मेडिको लीगल सोशल वर्कर की पोष्ट ही खत्म कर दी है और हेल्प डेस्क भी नहीं रहती जिस कारण बुजुर्ग मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ता है।
जिला अस्पताल में हर दिन करीब 350 की ओपीडी होती है, जिसमें से करीब 55 मरीज बुजुर्ग होते हैं। इसी तरह बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज की 1500 की रोज की ओपीडी में वृद्धों की संख्या 30 प्रतिशत तक होती है। बुंदेलखंड क्षेत्र में बुजुर्गों को अक्सर डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, आंख, कान, जोड़ों का दर्द, साइटिका जैसी प्रॉब्लम सामने आती हैं। अधिकांश गरीब बुजुर्ग सरकारी अस्पतालों में ही इलाज कराते हैं। लेकिन जब वृद्ध अस्पताल पहुंचते हैं तो सबसे बड़ी समस्या ओपीडी पर्ची कटवाने में होती है। अस्पतालों में बुजुर्ग-महिलाओं के काउंटर तो हैं लेकिन आए दिन यहां कर्मचारी नहीं रहते और विंडो पर सिर्फ एक लाइन लगी रहती है। पर्ची कट जाए तो डॉक्टर को खोजने में समय लग जाता है। डॉक्टर मिले तो दिखाने की लाइन, फिर जांचों की लाइन और अंत में दवा लेने की लाइन में लगना पड़ता है। अस्पतालों में वृद्धों की सुविधा के लिए बच्चों-महिलाओं की तरह अलग से कोई वार्ड या विभाग नहीं रहता।
सरकारी अस्पतालों में बजुर्गों की समस्याएं-
-मेडिको लीगल सोशल वर्कर की पोष्ट खत्म कर दी गई।
-बुजुर्गों के ओपीडी काउंटर हैं लेकिन कर्मचारी नहीं बैठते।
-बीमारियों के अलग से वार्ड व विभाग नहीं।
-आंख-कान जैसे विभागों में अलग से उपचार की व्यवस्था नहीं।
-संस्थानों में गाइड करने वाला न होने से भटकते हैं वृद्ध।
-भर्ती बुजुर्गों के हिसाब से वार्डों में पोर्टेबल चेयर, पलंग नहीं।
-अस्पतालों में शौचालय भी वृद्धों के हिसाब से नहीं बने।
-जिला अस्पताल-बीएमसी में हेल्प डेस्क का अभाव।
10 बेड का जिरियाट्रिक वार्ड अभी तक नहीं हुआ शुरू-
नेशनल हेल्थ मिशन की टीम ने मई 2023 में जिला अस्पताल का निरीक्षण कर अस्पताल में बुजुर्ग मरीजों की सहूलियत के के लिए जिरियाट्रिक वार्ड बनाने के निर्देश दिए थे। एनएचएम अधिकारियों ने 10 बेड के वार्ड के लिए 4 लाख रुपए भी तत्काल जारी किए थे। वार्ड में 5 महिला और 5 पुरुष बेड की व्यवस्था होनी थी। इसके अलावा शौचालय में बुजुर्गों की सहूलियत के हिसाब से टाइल्स, शौचालय की सीट लगाई जानी थी। इसके अलावा वार्ड में पोर्टेबल पलंग, चेयर व पकडऩे के लिए रेलिंग लगाई जानी थी। 9 माह बाद भी वार्ड तैयार नहीं हो पाया है। हालांकि अधिकारी जल्द ही वार्ड शुरू होने की बात कह रहे हैं।
एक्सपर्ट व्यू:
डॉ. डीके पिप्पल रिटायर्ड डॉक्टर जिला अस्पताल
-ओल्ड ऐज में होने वाली बीमारियों की जांच और उनका उपचार समय पर होना चाहिए। ज्यादातर बुजुर्गों में डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, आंख-कान की समस्या, घुटना-कमर दर्ज जैसी कॉमन बीमारियां होती हैं। अक्सर वृद्ध अकेले ही अस्पताल जाते हैं। अस्पतालों में बुजुर्गों को गाइड करने के लिए कर्मचारी होना चाहिए। सीनियर सीटिजन के काउंटर खुले रहें और कर्मचारी मौजूद रहें। हेल्प डेस्क खुले।
जल्द ही जिरियाट्रिक वार्ड शुरू होगा-
-अस्पताल में बुजुर्गों की सुविधा के लिए ओपीडी पर्ची का अलग से काउंटर है, अन्य सुविधाएं भी दे रहे हैं। जिरियाट्रिक वार्ड का कार्य लगभग पूरा हो चुका है, जल्द ही वार्ड शुरू होगा।
डॉ. आरएस जयंत, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल।