
खरीदी केन्द्र पर चल रही खरीदी। फोटो-पत्रिका
बीना. ग्रीष्मकालीन मूंग की समर्थन मूल्य पर प्रति एकड़ सिर्फ 78 किलो मूंग खरीदे जाने की सीमा तय होने से किसानों में भारी नाराजगी है। किसान लगातार सरकार से पूरी उपज खरीदी करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक खरीदी की मात्रा में कोई बढ़ोत्तरी नहीं की गई है। मजबूरी में किसानों को अपनी शेष उपज मंडी में समर्थन मूल्य से करीब 2500 रुपए प्रति क्विंटल तक कम कीमत पर बेचनी पड़ रही है, जिससे आर्थिक नुकसान हो रहा है।
क्षेत्र में इस वर्ष ग्रीष्मकालीन मूंग का उत्पादन अच्छा हुआ है और समर्थन मूल्य 8 हजार 768 रुपए निर्धारित किया गया है। ब्लॉक में दो समितियों पर खरीदी शुरू हो गई है, लेकिन एक एकड़ पर खरीदी मात्र 78 किलो निर्धारित की गई है। जबकि उत्पादन 6 से 8 क्विंटल एकड़ हुआ है। कम खरीदी होने पर किसानों में आक्रोश बढ़ रहा है और शत-प्रतिशत खरीदी की मांग कर रहे हैं।
सिर्फ नाम के लिए की जा रही खरीदी
बेलई के किसान अरविंद सिंह ने बताया कि उन्होंने 15 एकड़ की मूंग बेचने का पंजीयन कराया है और निर्धारित खरीदी के अनुसार 11 क्विंटल 70 किलोग्राम ही मूंग खरीदी जाएगी। जबकि उत्पादन ज्यादा हुआ है। समर्थन मूल्य पर सिर्फ नाम के लिए खरीदी हो रही है। पूरी खरीदी न होने से प्रति क्विंटल 2500 से 2700 रुपए तक घाटा हो रहा है।
खरीदी सीमा होना चाहिए खत्म
किसान रामकुमार यादव ने शासन से मांग की है कि प्रति एकड़ खरीदी की सीमा समाप्त कर शत-प्रतिशत मूंग समर्थन मूल्य पर खरीदी जाए, ताकि किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल सके। बाजार में कम दाम पर मूंग बेचने से उन्हें घाटा हो रहा है। क्योंकि ग्रीष्मकालीन मूंग में लागत भी ज्यादा आती है।
नए नियमों में उलझा रहे किसानों को
भारतीय किसान श्रमिक जनशक्ति यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष संदीप ठाकुर ने बताया कि सरकार किसानों को एमएसपी देना ही नहीं चाहती है, इसीलिए नए-नए नियम लागू कर किसानों को उलझाया जा रहा है। मूंग का उत्पादन 6 से 8 क्विंटल तक होता है, लेकिन खरीदी 78 किलो प्रति एकड़ करने से किसानों को आर्थिक रूप से कमजोर किया जा रहा है। इसके विरोध में किसान आंदोलन करेंगे।
दो केन्द्रों पर चल रही खरीदी
बीना क्षेत्र में कंजिया और पुरैना समिति पर खरीदी की जा रही है। शनिवार तक कंजिया पर करीब 1600 और पुरैना पर करीब 40 क्विंटल मूंग की खरीदी हो चुकी है।
78 किलो खरीदी का है आदेश
शासन से 78 किलो प्रति एकड़ खरीदी का आदेश है और उसके अनुसार ही खरीदी की जा रही है। खरीदी मात्रा बढ़ाने का आदेश आने पर उसपर अमल किया जाएगा।
अवधेश राय, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, बीना
Updated on:
19 Jul 2026 11:43 am
Published on:
19 Jul 2026 11:43 am
