
बीना. मानसून की बेरुखी अब किसानों के लिए बड़ी चिंता का कारण बनती जा रही है। पिछले कई दिनों से अच्छी बारिश नहीं होने के कारण खेतों की नमी तेजी से खत्म हो रही है। इसका सबसे अधिक असर सोयाबीन की फसल पर दिखाई देने लगा है। नमी की कमी के चलते फसल पर इल्ली का प्रकोप बढ़ गया है, जो पौधों की पत्तियों को तेजी से चट कर रही हैं। किसानों ने दवाओं का छिडक़ाव शुरू कर दिया है। खेतों की नमी खत्म होने से दरारें आने लगी हैं, जिससे फसल की बढ़वार भी रुकेगी।
पिछले आठ दिनों से बारिश नहीं हुई है, जिसका असर फसलों पर दिखाई देने लगा है। मौसम विभाग की कम बारिश की चेतावनी के बाद भी क्षेत्र में किसानों ने बड़ी मात्रा में सोयाबीन की बोवनी की है और बारिश न होने से सबसे ज्यादा असर इसी फसल पर दिख रहा है। किसानों का कहना है कि शुरुआती बारिश के बाद बोवनी की थी और फसलों की स्थिति भी अच्छी थी, लेकिन अब बारिश रुक जाने से फसलों में कीटों का प्रकोप बढऩे लगा है। यदि समय रहते बारिश नहीं हुई या कीट नियंत्रण के उपाय नहीं किए गए, तो उत्पादन पर असर पड़ेगा। बारिश के अभाव में खेतों की मिट्टी में दरारें आने लगी हैं। बारिश न होने पर जिन किसानों के पास सिंचाई की व्यवस्था है वह तो सिंचाई कर लेंगे, लेकिन जिनके पास जलस्रोत नहीं है, उनकी फसल खराब हो जाएगी। क्षेत्र में अधिकांश किसान पूरी तरह मानसून पर निर्भर है।
उमस भरी गर्मी कर रही बेहाल
बारिश न होने से उमस भरी गर्मी पड़ रही है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रभाव पडऩे लगा है। सर्दी, बुखार सहित पेट संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं। लगातार तेज बारिश होने पर ही लोगों को राहत मिलेगी। घरों में लोग पंखा, कूलर, एसी के बिना नहीं रह पा रहे हैं। साथ ही घरों से बाहर भी गर्मी से राहत नहीं मिल पा रही है।
नियमित करें फसलों का निरीक्षण
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि किसान नियमित रूप से खेतों का निरीक्षण करें। यदि इल्ली का प्रकोप ज्यादा है, तो कृषि विभाग के अधिकारियों की सलाह पर ही कीटनाशकों का ही छिडक़ाव करें।