
ब्लॉक के दो दर्जन स्कूल पहुंच गए हैं ऐसी स्थिति में। फोटो-पत्रिका
बीना. शिक्षा के अधिकार और सरकारी स्कूलों को मजबूत बनाने के दावों के बीच क्षेत्र में शासकीय स्कूलों की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। कहीं स्कूल भवन ही उपलब्ध नहीं हैं, तो कहीं जर्जर भवन के चलते अभिभावकों ने बच्चों के नाम कटा लिए हैं, जिससे दर्ज संख्या शून्य हो गई है और इस शिक्षा सत्र में 3 प्राथमिक स्कूलों में ताले डल गए हैं।
जानकारी के अनुसार प्राथमिक स्कूल दौतलपुर का भवन जर्जर होने के कारण 2024 में पंचायत द्वारा तोड़ दिया गया था। इसके बाद यहां नया भवन तैयार नहीं हुआ और किराए के कमरे में स्कूल लग रहा था। स्कूल में आठ बच्चे दर्ज थे, लेकिन सुविधाओं के अभाव में अभिभावकों ने टीसी निकलवा ली हैं और 8 जुलाई को दर्ज संख्या शून्य हो गई है। इसी तरह प्राथमिक स्कूल गोदना में आठ बच्चे दर्ज थे, लेकिन जर्जर भवन और सुविधाओं के अभाव यहां भी अभिभावकों ने दूसरे स्कूल में बच्चों का एडमिशन करा दिया है, जिससे स्कूल में ताला डल गया है। प्राथमिक स्कूल रुपउ की दर्ज संख्या दो थी और यहां पदस्थ शिक्षक अरविंद दुबे भी कुछ दिन पूर्व सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जिससे अब यहां भी भी दर्ज संख्या शून्य होने से स्कूल बंद हो गया है। अधिकांश बच्चों का एडमिशन निजी स्कूलों में हो गया है। गौरतलब है कि ब्लॉक में दो दर्जन स्कूल बहुत ज्यादा जर्जर हैं और इतने ही स्कूलों की मरम्मत होना है। इसके बाद भी बजट नहीं दिया जा रहा है।
दो स्कूल पहले हो चुके हैं बंद
ब्लॉक के दो प्राथमिक स्कूल उमरिया, रसीलपुर पहले ही दर्ज संख्या शून्य होने के कारण बंद हो चुके हैं। साथ ही एक दर्जन स्कूल बंद होने की कगार पर है, क्योंकि इनमें भी दर्ज संख्या दस से कम है। इसके बाद भी दर्ज संख्या बढ़ाने के लिए शिक्षा विभाग द्वारा स्कूलों में सुविधाएं नहीं बढ़ाई जा रही हैं, न ही शिक्षक पदस्थ किए जा रहे हैं।
भेजे जाते हैं प्रस्ताव
नए भवन बनाने और जर्जर भवनों की मरम्मत कराने के लिए वरिष्ठ कार्यालय लगातार प्रस्ताव भेजे जाते हैं। भवन अच्छे न होने पर अभिभावकों ने दूसरे स्कूलों में बच्चों को प्रवेश दिला दिए हैं। कुछ बच्चों के प्रवेश शासकीय स्कूल में हुए हैं। संख्या बढ़ाने लगातार प्रयास हो रहे हैं।
महेन्द्र सिंह, बीआरसीसी, बीना
Updated on:
13 Jul 2026 11:57 am
Published on:
13 Jul 2026 11:57 am
