
डोम के एक हिस्से में भरा पानी। फोटो-पत्रिका
बीना. रेलवे स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया में यात्रियों को धूप और बारिश से बचाने के लिए बनाया गया डोम अब सुरक्षा के बजाय खतरा बनता जा रहा है। डोम के कबर में बारिश का पानी भरने, कई स्थानों से उसके फटने और तेज हवा के कारण लोहे के भारी एंगल लटकने से बड़ा हादसा हो सकता है। इसके बावजूद रेलवे की ओर से अब तक कोई सुधार नहीं किया जा रहा है, जिससे यात्रियों में चिंता बढ़ रही है।
वर्ष 2022 में रेलवे स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया में 22.50 बाय 22.50 मीटर आकार का कुल 506.25 वर्गमीटर क्षेत्रफल वाला आधुनिक डोम बनाया गया था। उस समय अधिकारियों ने दावा किया था कि इसमें विदेशी तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे यह लंबे समय तक टिकाऊ रहेगा और यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी। इस वर्ष मानसून की पहली ही बारिश में डोम की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। डोम का कबर कई स्थानों से फट चुका है, जबकि उसके ऊपर बड़ी मात्रा में बारिश का पानी जमा हो रहा है और पानी का दबाव बढऩे से कबर फट सकता है। यदि अचानक यह कबर फटता है और किसी यात्री के ऊपर एक साथ पानी गिरा तो वह घायल हो सकता है। यहां से हर दिन अधिकारी निकल रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी पानी को निकालने और डोम की मरम्मत कराने की जहमत नहीं उठा रहे हैं। हादस होने के बाद ही अधिकारियों की नींद खुलती है।
एंगल से हो सकता है हादसा
तेज हवा के कारण डोम के लोहे के एंगल भी कई स्थानों पर ढीले होकर लटक रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इन एंगलों का वजन करीब 10 से 15 किलोग्राम है। यदि इनमें से कोई भी हिस्सा टूटकर नीचे गिरता है, तो किसी यात्री के गंभीर रूप से घायल होने या जान जाने जैसी घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
हर दिन आते हैं सैकड़ों यात्री
यात्रियों का कहना है कि स्टेशन पर प्रतिदिन सैकड़ों लोग आते-जाते हैं, लेकिन संभावित खतरे के बावजूद भी सुधार नहीं हो रहा है। लोगों का आरोप है कि रेलवे अधिकारी समस्या से अवगत होने के बावजूद अनदेखी कर रहे हैं। यात्रियों ने मांग की है कि डोम का तत्काल सुधार होना चाहिए।
Updated on:
10 Jul 2026 12:02 pm
Published on:
10 Jul 2026 12:02 pm
