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बिना लाइसेंस के बेचा अमानक सोयाबीन का बीज, नहीं हुआ अंकुरण, विक्रेता पर एफआईआर दर्ज

पचास किसानों को करीब एक हजार क्विंटल बीज बेचने का है आरोप, ऑटो पार्टस की दुकान से बेचा जा रहा था बीज, बीज बेचने के लिए ब्रांड का नाम डालकर बोरियां कराई गई थीं तैयार
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Substandard soybean seeds sold without a license failed to germinate; FIR registered against the seller.

विक्रेता से पूछताछ करते हुए। फोटो-पत्रिका

बीना. खिमलासा में शांति ऑटो पार्टस के संचालक द्वारा बिना लाइसेंस के सोयाबीन का अमानक बीज बेचने और उसमें अंकुरण न होने की शिकायत किसानों ने संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में कृषि विभाग के अधिकारियों, थाना प्रभारी से की थी। इसके बाद जांच में शिकायत सही पाए जाने पर विक्रेता के खिलाफ खिमलासा पुलिस थाना में एफआईआर दर्ज की गई है।
जानकारी के अनुसार शांति ऑटो पाट्र्स दुकान के संचालक बाहुबली जैन द्वारा अवैध रूप से अमानक सोयाबीन बीज बेचे जाने की शिकायत के बाद अनुविभागीय कृषि अधिकारी खुरई जयदत्त शर्मा और वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी राजू चौहान ने फरकना नाका स्थित दुकान पर पहुंचकर जांच की। जांच में बिना लाइसेंस के बीच बेचने की पुष्टि हुई और इसके बाद वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी ने विक्रेता के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4), आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3 व 7 एवं बीज नियंत्रण आदेश 1983 की धारा 3 के तहत खिमलासा थाने में एफआईआर दर्ज कराई है।

जांच में मिली थीं दुकान में खाली बोरी
जांच के दौरान टीम को गोदाम से 30 से 40 किलो क्षमता की बीज के नाम से अंकित खाली बोरी मिली थीं। जगह-जगह सोयाबीन के बिखरे दाने मिले हैं। मौके पर उपस्थित 16 किसानों ने बाहुबली जैन से बीज खरीदने की पुष्टि भी की थी। कुछ किसानों ने ऑनलाइन भुगतान के स्क्रीनशॉट व पावती प्रस्तुत कर प्रमाण दिए थे। किसानों को जेएस 2303, एम 85, पीएस 1569 के नाम से सोयाबीन का बीज 10000 से 12000 रुपए क्विंटल दिया था, जो अंकुरित नहीं हुआ। किसानों का कहना है कि विक्रेता ने रबी सीजन में मटर भी बेचा था और हर सीजन में बीज की बिक्री की जाती है।

बीज विक्रय के समय नहीं दिया अधिकारियों ने ध्यान
पूरे जून माह जगह-जगह लोगों ने बीज के नाम सोयाबीन, उड़द सहित अन्य अमानक बीज बेचा है, लेकिन शिकायतों के बाद भी कृषि विभाग के अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। यदि पहले ध्यान दिया गया होता, तो किसानों को आर्थिक नुकसान नहीं उठाना पड़ता। क्षेत्र में अन्य जगहों पर भी बीज अंकुरित न होने की बात सामने आ रही है। किसान खराब हुए बीज और बोवनी में लगी लागत का मुआवजा दिलाने की मांग कर रहे हैं।