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बीना. रेलवे लगातार अपनी सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक तकनीकों से मजबूत बना रही है। इंटरलॉकिंग सिस्टम, स्वचालित सिग्नल, पॉइंट लॉकिंग और स्वदेशी कवच तकनीक से रेल संचालन को सुरक्षित बनाया गया है। यही वजह है कि सामान्य परिस्थितियों में एक ही ट्रैक पर दो ट्रेनों के आमने-सामने आने जैसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती और यात्री सुरक्षित यात्रा कर पाते हैं।
रेलवे के विशाल नेटवर्क पर प्रतिदिन हजारों यात्री और मालगाडिय़ां चलती हैं। इतने बड़े संचालन के बावजूद सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। रेलवे का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत है कि किसी भी ट्रैक सेक्शन पर एक समय में केवल एक ही ट्रेन को प्रवेश की अनुमति दी जाती है। जैसे ही कोई ट्रेन किसी सेक्शन में प्रवेश करती है, वह पूरा सेक्शन दूसरी ट्रेन के लिए स्वत: ब्लॉक हो जाता है।
इस पूरी प्रतिक्रया में इंटरलॉकिंग सिस्टम अहम भूमिका निभाता है। यह प्रणाली सिग्नल और ट्रैक के पॉइंट्स को आपस में जोडकऱ नियंत्रित करती है। ट्रेन के सेक्शन में प्रवेश करते ही इंटरलॉकिंग उस मार्ग को दूसरी दिशा से आने वाली ट्रेनों के लिए बंद कर देता है, जिससे टकराव की संभावना समाप्त हो जाती है। रेलवे की स्वचालित सिग्नल प्रणाली भी सुरक्षा की मजबूत कड़ी है। सेक्शन ब्लॉक होते ही संबंधित सिग्नल स्वत: लाल हो जाते हैं और चालक को आगे बढऩे की अनुमति नहीं मिलती। ट्रेन के सेक्शन खाली करने के बाद ही सिग्नल हरा होता है। साथ ही जहां ट्रैक बदलने की व्यवस्था होती है, वहां पॉइंट लॉकिंग सिस्टम पहले से ही रेल स्विच को लॉक कर देता है। जब तक पूरा रूट सुरक्षित नहीं हो जाता, तब तक सिग्नल ग्रीन नहीं होता, इससे ट्रेन गलत ट्रैक पर नहीं जा सकती है।
कवच तकनीक कर रही अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान
इसके अलावा रेलवे की स्वदेशी कवच तकनीक अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करती है। यदि किसी कारणवश चालक समय पर प्रतिक्रिया नहीं दे पाता या दो ट्रेनों के बीच खतरे की स्थिति बनती है, तो कवच स्वत: ट्रेन की गति कम कर देता है और आवश्यकता पडऩे पर ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोक देता है। इन सभी आधुनिक प्रणालियों के समन्वय से रेलवे लगातार सुरक्षित, विश्वसनीय और दुर्घटना-रहित रेल संचालन की दिशा में काम कर रही है।
Updated on:
08 Jul 2026 12:01 pm
Published on:
08 Jul 2026 12:01 pm
